यूपी चुनाव 2027: सपा ने 234 वोट से जीती चाँदपुर सीट, इस बार BJP के लिए राह आसान!
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में एक विधानसभा सीट है- चांदपुर। इस सीट पर पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2022 में समाजवादी पार्टी की 234 वोटों की जीत हुई थी। समाजवादी पार्टी के स्वामी ओमवेश ने भाजपा की कमलेश सैनी को हराया था। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के साथ गठबंधन था। रालोद अब भाजपा के साथ NDA गठबंधन में है।
साल 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में सपा-रालोद गठबंधन के प्रत्याशी स्वामी ओमवेश को 90,522 वोट मिले थे। वहीं, भाजपा की प्रत्याशी श्रीमती कमलेश सैनी को उन्हें 90,288 वोट मिले थे। साल 2017 में भाजपा ने कमलेश सैनी को उम्मीदवार बनाया और उन्होंने 35,649 वोट के बड़े अंतर से चुनाव जीता था।
चाँदपुर सीट पर जाट समाज से आने वाले सपा प्रत्याशी स्वामी ओमवेश को कुल प्राप्त मतों का 40.34 प्रतिशत वोट मिला था, जबकि सैनी समाज से आनी वाली भाजपा की कमलेश सैनी को 40.24 प्रतिशत मत मिले थे। इस तरह इस जीत-हार में सिर्फ 0.10 प्रतिशत का नाममात्र का अंतर रहा था। यहाँ कुल मत 68.5 प्रतिशत डाले गए थे।
इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी (BSP-बसपा) की ओर से शकील अहमद चुनाव लड़े और 37,359 वोट लाकर तीसरे स्थान पर रहे। वहीं, कांग्रेस ने उदित त्यागी को अपना प्रत्याशी बनाया था, जिन्हें 1,484 (0.66%) वोट मिले। आम आदमी पार्टी के मनोज कुमार को 364 (0.16%) वोट मिले थे।
क्या होगा 2027 विधानसभा चुनाव का हाल
साल 2027 में इस विधानसभा सीट पर समीकरण बदल सकते हैं और यह सीट एक बार फिर भाजपा के कब्जे में जा सकती है। इसके पीछे कई समीकरण काम कर रहे हैं। पहली बात तो यह है कि सपा के विधायक स्वामी ओमवेश ने चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की है। दूसरी बात राजनीतिक गठबंधन और तीसरी मतदाताओं का रवैया है।
स्वामी ओमवेश ने एक अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा था कि वह साल 2027 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा था कि इसकी जानकारी उन्होंने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को दे दी है। उन्होंने यह भी कहा था कि इस सीट पर संसार चौधरी को लड़ाने के लिए उन्होंने अखिलेश यादव से अनुशंसा की थी।
पिछे चुनाव में ओमवेश 71 साल के थे। साल 2027 में वह 76 साल के होंगे। यह उनकी उम्र का तकाजा है या ‘कुछ वोटों’ से जीत की अंतर का दबाव, जो वे अगला चुनाव नहीं लड़ने की बात कर रहे हैं। हालाँकि, राजनीति में कहने की और करने की प्रवृत्ति कुछ और होती है। इस तरह की बात के पीछे राजनीतिक उद्देश्य भी हो सकते हैं।
अगर सपा स्वामी ओमवेश की जगह संसार चौधरी को वोट देती है तो इसका सीधा प्रभाव वोटरों के मनोविज्ञान पर पड़ेगा। स्वामी खुद को आर्यसमाजी कहते हैं और संत वेश में रहते हैं। इसलिए जाट समुदाय से होने के बावजूद भी स्वामी ओमवेश को अन्य समाज के लोगों के कुछ वोट मिल जाते रहे हैं। वहीं, संसार चौधरी को ये लाभ नहीं मिलेगा।
साल 2022 के चुनाव में सपा प्रत्याशी ओमवेश को मुस्लिमों के साथ-साथ जाटों का वोट मिला था। वहीं, भाजपा के हिस्से में क्षत्रिय का कुछ हिस्सा, अति पिछड़ी जातियों और अनुसूचित जाति के बाल्मिकी समुदाय के वोट मिले थे। बसपा को सिर्फ एससी समाज का वोट मिला था, जिसका कुछ हिस्सा भाजपा के हिस्से भी गया था।
उस समय हुए 68.86% वोटिंग में भारी मतदान मुस्लिम समुदाय का माना जाता है। इसमें अगड़ों की उदासीनता का असर भाजपा प्रत्याशी कमलेश सैनी की हार के रूप में मिला। इन समाजों की एक बड़ी संख्या बूथों तक नहीं पहुँचे थे। मतदान के दौरान प्रत्याशियों की जाति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसका दूसरा प्रमुख कारण समाजवादी पार्टी के साथ राष्ट्रीय लोकदल का गठबंधन भी था। रालोद जाट नेता जयंत चौधरी की पार्टी है। इसलिए जाटों का एकमुश्त वोट सपा-रालोद प्रत्याशी को मिला था। इस तरह मुस्लिम, जाट और अहिर का एकमुश्त वोट सपा गठबंधन की ओर गया था।
हालाँकि, साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा-रालोद गठबंधन हो गया। इसके बावजूद चाँदपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी चंदन चौहान सपा प्रत्याशी दीपक सैनी से 10 हजार से अधिक वोटों से पीछे रहे। इसके पीछे का गणित क्षत्रियों की भाजपा से नाराजगी में छिपी हुई है।
इस सीट पर क्षत्रियों की आबादी लगभग 9 प्रतिशत है। लोकसभा चुनावों के दौरान भाजपा के कई नेताओं ने क्षत्रिय महापुरुषों और क्षत्राणियों पर अशोभनीय टिप्पणियाँ की थीं। इसके कारण गुजरात से लेकर राजस्थान और यूपी-बिहार तक प्रदर्शन हो रहे थे। इसका असर लोकसभा चुनाव में दिखा और भाजपा 240 सीटों के साथ अल्पमत में आ गई।
हालाँकि, साल 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा-रालोद गठबंधन को जाट वोट मिला, जो साल 2022 के विधानसभा चुनावों में नहीं मिला था। लेकिन, भाजपा से क्षत्रियों की नाराजगी और सपा के सैनी प्रत्याशी के साथ कश्यप और प्रजापति का वोट जाने से भाजपा यह चुनाव भारी अंतर से हार गई। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में कश्यप और प्रजापति भाजपा के साथ थे।
इसके अलावा, प्रत्याशियों की जाति ने समीकरण को उलट दिया। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सैनी समाज की कमलेश सैनी को टिकट दिया था। इस कारण से सैनी समाज भाजपा की ओर चला गया। जब 2024 में सपा ने सैनी प्रत्याशी उतारा तो सैनी समाज का वोट सपा की तरफ चला गया।
साल 2027 में सपा फिर से जाट पर दाव लगाकर संसार सिंह चौधरी को टिकट दे सकती है। ऐसी स्थिति में सपा को मुस्लिमों के साथ जाटों का कुछ वोट मिल सकता है। हालाँकि, 2024 की तरह 2027 में क्षत्रियों की नराजगी नहीं है। इसलिए इस समाज का एकतरफा वोट भाजपा के पक्ष में जाने की उम्मीद है। बाल्मिकी, प्रजापति, कश्यप, सैनी आदि भी भाजपा के पक्ष में हैं।
चाँदपुर का मतदाता समीकरण
चाँदपुर विधानसभा सीट पर सबसे अधिक मुस्लिम वोटर हैं। इनकी तदाद करीब 44% है। इसके बाद अनुसूचित जाति यानी SC समाज की आबादी 16% है। यहाँ जाटों की आबादी लगभग 12% है। वहीं, क्षत्रिय और सैनी वोटर 9-9% हैं। बाकी 10 प्रतिशत में अन्य जातियाँ हैं।
साल 2024 के लोकसभा चुनाव के समय इस सीट पर मतदाताओं की कुल संख्या 3,30,159 थी। हालाँकि, साल 2026 में हुए SIR में इस सीट पर 21,473 मतदाता कम हो गए। अब यहाँ मतदाताओं की कुल संख्या 3,08,686 रह गई है। माना जा रहा है कि यहाँ पर मुस्लिम और उसके बाद जाट मतदाताओं की संख्या में कमी आई है।
चाँदपुर विधानसभा सीट पर ग्रामीण मततदाताओं की संख्या सबसे अधिक है। साल 2011 की जनगणना के अनुसार यहाँ 2,55,000 से अधिक ग्रामीण मतदाता हैं। यह इस सीट के कुल वोटरों का लगभग 80 प्रतिशत है। वहीं, यहाँ शहरी मतदाताओं की संख्या लगभग 65,000 है, जो लगभग 20 प्रतिशत है।
साल 2024 लोकसभा चुनाव में सीट की स्थिति
चाँदपुर विधानसभा बिजनौर संसदीय सीट के अंतर्गत आने वाले 5 विधानसभा सीटों में से एक है। पिछले लोकसभा चुनाव 2024 में बिजनौर लोकसभा सीट पर भाजपा के गुज्जर प्रत्याशी चंदन कुमार चौहान ने समाजवादी पार्टी के दीपक सैनी को 37,508 वोटों से हराया था। इस संसदीय चुनाव में भाजपा और रालोद का गठबंधन था।
अगर लोकसभा चुनाव 2024 में चाँदपुर विधानसभा सीट की स्थिति पर नजर डालें तो कहानी अलग होगी। इस विधानसभा पर समाजवादी पार्टी के दीपक सैनी ने रालोद-प्रत्याशी चंदन चौहान को 10,616 वोटों से पीछे धकेल दिया था। यानी 2022 का विधानसभा चुनाव और साल 2024 का लोकसभा चुनाव, दोनों भाजपा के लिए मुश्किल भरे रहे।
विधानसभा चुनावों में चाँदपुर सीट की स्थिति
चाँदपुर सीट बिजनौर जिले की 8 विधानसभा सीटों में से एक है। इस चाँदपुर स्याऊ के नाम से भी जाना जाता है। स्याऊ रियासत और उसके राजा गुलाब सिंह के कारण यह इलाका पहचाना जाता है। पहले यहाँ गुड़ बनाने और बेचने का कारोबार होता था। अब यहाँ भूरा (बारिक चीनी) और बताशे का कारोबार बड़े पैमाने पर होता है।
साल 1956 के परिसीमन में इस विधानसभा सीट का गठन किया गया था। इसके बाद साल 1957 में इस सीट पर पहली बार चुनाव हुआ था, जिसमें नरदेव सिंह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की थी। वे लगातार यहाँ से तीन बार निर्दलीय जीते। चाँदपुर बहुत बड़ी विधानसभा सीट है, जो अमरोहा और मेरठ जिले की सीमा तक फैली हुई है।
नरदेव सिंह के बाद वर्तमान सपा विधायक स्वामी ओमवेश ही इस सीट पर तीन बार चुनाव जीते हैं। हालाँकि, वे अलग-अलग दलों से इस पर जीत हासिल की है। ओमवेश ने 1996 में निर्दलीय, साल 2002 में राष्ट्रीय लोकदल और फिर साल 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चाँदपुर से जीत हासिल की है। इस जीत के साथ स्वामी ओमवेश का 20 साल का वनवास खत्म हुआ था।
अगर भारतीय जनता पार्टी की दृष्टि से देखा जाए तो सबसे पहले इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी अमर सिंह ने साल 1991 में जीत हासिल की थी। इसके बाद 26 साल बाद भाजपा ने साल 2017 में इस विधासभा पर अपना कब्जा जमाया। लेकिन साल 2022 में भाजपा फिर हार गई और सपा जीत गई। इस सीट पर सपा की यह पहली जीत है।
अगर बसपा की बात करें तो इस सीट पर उसका 2007 और 2012 में कब्जा रहा। दोनों ही बार बसपा प्रत्याशी के रूप में मोहम्मद इकबाल ने यहाँ झंडे गाड़े। वहीं, स्वामी ओमवेश का 1996 में स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में और 2002 में रालोद प्रत्याशी के रूप में इस सीट पर कब्जा रहा। साल 1993 में तेजपाल सिंह निर्दलीय जीते।