यूपी विधानसभा चुनाव 2027: सिर्फ 307 वोटों से BJP ने जीती बिलासपुर सीट, अब सपा की नजर
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रामपुर जिले की एक विधानसभा सीट है- बिलासपुर। इस सीट पर पिछले विधानसभा चुनाव यानी यूपी विधानसभा चुनाव-2022 में सिर्फ 307 वोटों से जीत-हार हुई थी। भाजपा के बलदेव सिंह औलख ने समाजवादी पार्टी के अमरजीत सिंह को हराया था। दोनों को मिले वोटों में सिर्फ 0.13% का फर्क था।
बलदेव सिंह औलख को कुल 1,01,998 वोट मिले थे। वहीं, उनके निकटतम प्रतिद्वंदी अमरजीत सिंह को कुल 1,01,691 वोट मिले थे। रामपुर जिले के अंतर्गत आने वाले इस विधानसभा सीट पर 67.9 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। औलख को डाले गए कुल वोटों का 43.17% मिला था, जबकि अमरजीत सिंह को 43.04% वोट मिले थे।
इस सीट पर तीसरे स्थान पर बहुजन समाज पार्टी (BSP) के प्रत्याशी रामअवतार कश्यप रहे थे। कश्यप को 18,870 वोट मिले थे, जो डाले गए कुल वोटों का 7.99% था। वहीं, चौथे स्थान पर संजय कपूर रहे। संजय कपूर को भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस ने उम्मीदवार बनाया था। कपूर को 9,814 वोट यानी 4.15% वोट मिले थे।
कब कौन जीता?
बलवीर सिंह औलख इस सीट पर लगातार दूसरी बार जीते हैं। हालाँकि, उनकी जीत की मार्जिन में लगातार गिरावट आई है। साल 2017 के यूपी विधानसभा चुनावों में औलख को कुल 99,100 वोट मिले थे। यह कुल वोटों का 44.30% था। उनकी जीत भी शानदार 22,359 वोटों के अंतर से हुई थी।
औलख के सामने 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के अमरजीत सिंह मुख्य प्रतिद्वंद्वी थे, जबकि साल 2017 के विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस के संजय कपूर मुख्य प्रतिद्वंद्वी थे। साल 2017 में संजय कपूर को 76,741 वोट मिले थे, जो इस सीट पर मतदान हुए कुल वोटों का 34.31% था। इस तरह साल 2017 में दोनों के जीत हार के बीच 10% वोटों का अंतर था।
संजय कपूर इस सीट पर कॉन्ग्रेस प्रत्याशी के रूप में दो बार- साल 2012 और साल 2007 में विधायक निर्वाचित हो चुके हैं। साल 2007 में वह सिर्फ 722 वोटों से जीते थे, जबकि साल 2012 में उन्होंने शानदार 10,177 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। उन्हें 2007 में 21% और 2012 में 27% वोट मिले थे।
अगर सपा के नजरिए से देखें तो यह सीट उसके खाते में दो बार आई है। साल 2002 में सपा की प्रत्याशी बीना भारद्वाज ने 20,410 वोटों के अंतर से शानदार जीत हासिल की थी। वहीं, 1993 में सपा की ओर से हरेंद्र सिंह ने 11,497 वोटों के अंतर से इस जीत पर अपना परचम फहराया था।
साल 1977 से इस सीट पर कॉन्ग्रेस ने 5 बार जीत हासिल की है, जबकि भाजपा ने 3 बार अपना विजय पताका फहराया है। साल 2022 और 2017 से पहले भाजपा ने यहाँ साल 1991 में जीत हासिल की थी। तब भाजपा उम्मीदवार ज्वाला प्रसाद ने 22% वोट हासिल करके कॉन्ग्रेस को 5,058 वोटों से हराया था।
लोकसभा चुनाव 2024 में इस सीट की स्थिति
बिलासपुर विधानसभा सीट रामपुर जिले और रामपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली कुल 5 विधानसभा सीटों में एक है। रामपुर लोकसभा सीट के अंतर्गत बिलासपुर के अलावा चमरौआ, रामपुर, मिलक और स्वार विधानसभा आते हैं।
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में रामपुर लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी मोहीबुल्लाह नदवी ने जीत हासिल की थी। मोहीबुल्लाह नदवी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रत्याशी घनश्याम लोधी को 87,434 वोटों के बड़े अंतर से हराया था।
दरअसल, बिलापुर विधानसभा सीट पर 1977 से लेकर आज तक भले ही एक मुस्लिम प्रत्याशी जीता हो, लेकिन रामपुर लोकसभा सीट पर मुस्लिमों का दबदबा रहा है। यहाँ के मतदाताओं में मुस्लिमों की संख्या लगभग 50% है। इसलिए यह सीट समाजवादी पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है।
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में बिलासपुर विधानसभा सीट पर भाजपा के पक्ष में सबसे अधिक वोटिंग हुई थी। इस विधानसभा सीट पर भाजपा के लोकसभा प्रत्याशी घनश्याम लोधी को 1,03,631 वोट मिले थे। वहीं, सपा के पक्ष में 83,764 वोट और बसपा को 19,628 वोट मिले थे।
इस तरह साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के घनश्याम लोधी ने बिलासपुर विधानसभा सीट पर सपा के मोहिबुल्लाह पर 20 हजार वोटों से बढ़त बनाई थी। सपा को 2024 में लगभग 83,000 वोट ही मिल पाए, जबकि साल 2022 के विधानसभा चुनावों में इस सीट पर सपा को 1,01,691 वोट मिले थे।
जातीय/धार्मिक समीकरण
इस साल यानी 2026 के Special Intensive Revision (SIR) के बाद मतदाता सूची को अपडेट किया गया है। इसके बाद बिलासपुर विधानसभा में कुल 3,27,102 मतदाता हैं। इनमें 1,77,544 पुरुष हैं, जबिक 1,49,552 महिला और 6 अन्य मतदाता शामिल हैं। पहले के मुकाबले 32,158 मतदाताओं की कमी हुई है।
इस विधानसभा सभा में सबसे अधिक संख्या मुस्लिम, कुर्मी, अनुसूचित जाति, सिख, वैश्य, लोधी आदि की संख्या है। यहाँ मुस्लिम करीब 29%, कुर्मी करीब 15%, अनुसूचित जाति करीब 13%, सिख 9%, सैनी 5%, लोधी 4%, यादव 3%, क्षत्रिय 3 %, वैश्य 3.5% और बाकी अन्य जातियाँ हैं।
साल 2027 का चुनावी परिदृश्य
साल 2022 के विधानसभा चुनाव परिणाम और 2024 के लोकसभा चुनाव में बिलासपुर विधानसभा के वोटिंग पैटर्न को साथ रखकर देखें तो साल 2027 विधानसभा चुनाव में यह सीट भाजपा के लिए सुरक्षित सीट नहीं कही जा सकती। हालाँकि, सपा के लिए भी यह आसान वापसी वाली सीट नहीं है।
2022 में भाजपा ने 307 वोटों के बहुत मामूली अंतर से जीत हासिल की थी, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में इसी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को 19,867 वोटों की बढ़त मिली थी। इसका मतलब यह है कि 2022 चुनाव का परिणाम सपा के मजबूत होने की गारंटी नहीं है।
भाजपा को सिख वोटरों पर काम करने की जरूरत है, क्योंकि साल 2022 में भाजपा और सपा, दोनों के उम्मीदवार सिख थे। इस कारण सिख वोट दोनों पार्टियों में बँट गया। वहीं, अनुसूचित जाति का बड़ा तबका बसपा की ओर शिफ्ट हो गया, जिससे भाजपा के वोट में भारी कमी आ गई और जीत का अंतर 307 पर सिमट गया।
इसके अलावा, कुर्मी और सैनी वोटों पर भी भाजपा को काम करने की जरूरत है। यहाँ करीब 15% कुर्मी मतदाता बताए जा रहे हैं। यही समूह 2027 में चुनाव का सबसे महत्वपूर्ण स्विंग वोटर बन सकता है। अगर मुस्लिम और यादव के साथ इसका बड़ा हिस्सा सपा की ओर मुड़ जाता है तो भाजपा के लिए खतरा हो सकता है।
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अगर मान लिया जाए कि कुर्मी वोट सपा की ओर स्विंग करेगा और SC बसपा की ओर मुड़ेगा, ऐसे में भाजपा को सैनी, लोधी, वैश्य, गैर-यादव अन्य ओबीसी तथा सवर्ण वोटों को अपनी तरफ मोड़ना पड़ेगा। इसके साथ ही सवर्णों को वोटिंग के दिन घर से बाहर निकलकर पोलिंग बुथ तक जाने के लिए प्रेरित करना होगा।
SIR में जो 32 हजार से अधिक नाम हटे हैं, उसे आबादी के अनुपात में मान लिया जाए तो सबसे अधिक मुस्लिम वोटरों के नाम कटे होंगे। इसके बाद कुर्मी एवं सैनी के। इसका असर भी भाजपा के पक्ष में होगा। हालाँकि, इसका निर्णायक प्रभाव में बारे में कहना अभी जल्दबाजी होगी।
वहीं, भाजपा अगर उम्मीदवार बदलती है तो भी इसका असर दिखेगा। भाजपा की ओर से बलदेव सिंह औलख के अलावा चित्रक मित्तल, धर्मवीर मित्तल और ज्वाला प्रसाद भी टिकट की दौड़ में हैं। वहीं, सपा की ओर से अमरजीत सिंह, अब्दुल सलाम और सतनाम मट्टू हैं।