नहटौर में 258 वोट से बची थी BJP की लाज! 2027 में बदले गठबंधन, क्या फिर खिलेगा कमल?
उत्तर विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों ने अपनी रफ्तार पकड़ ली है। इसको लेकर सभी दल अपना समीकरण बैठाने में लग गए हैं। विपक्षी दलों की निगाह विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की उन सीटों पर है, जहाँ पिछले यानी यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी।
ऐसी ही एक सीट बिजनौर जिले का नहटौर विधानसभा सीट है। इस आरक्षित सीट पर 2022 केविधानसभा चुनाव में भाजपा को कड़ी टक्कर मिली थी। भाजपा प्रत्याशी ओम कुमार महज 258 वोटों से चुनाव जीते थे। उन्होंने सपा गठबंधन में शामिल राष्ट्रीय लोक दल यानी रालोद के प्रत्याशी मुंशीराम को हराया था।
ओम कुमार की यह लगातार तीसरी जीत है, लेकिन भाजपा की यह लगातार दूसरी जीत है। हालाँकि, 2012 में पहली बार इस सीट पर हुए चुनाव से लेकर अब तक यानी 2022 के चुनाव तक में ओम कुमार की जीत का अंतर लगातार कम होता जा रही है। साल 2008 के परिसीमन में यह सीट पहली बार अस्तित्व में आई थी।
पिछले विधानसभा चुनावों का गणित
साल 2022 के विधानसभा में ओम कुमार को कुल 77,935 वोट मिले थे। यह कुल मतों का 38.98 प्रतिशत था। वहीं, सपा गठबंधन के मुंशीराम को 77,677 वोट मिले थे। उन्हें कुल वोटों का 38.86 प्रतिशत वोट मिले थे। इस तरह वोटों में 258 का और वोट प्रतिशत में सिर्फ 0.12 प्रतिशत का अंतर था।
इस सीट पर मायावती की बहुजन समाज पार्टी यानी बसपा को भी ठीक-ठाक वोट मिले थे। बसपा की उम्मीदवार प्रिया सिंह को कुल 38,020 वोट मिले थे। यानी 19.02 प्रतिशत वोट बसपा की झोली में गिरे थे। भाजपा के ओम कुमार साल 2022 में यहाँ से लगताार तीसरी बार जितने में कामयाब रहे, लेकिन आगे की राह आसान नहीं है।
साल 2017 में हुए चुनाव में भाजपा नहटौर विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी के रूप में ओम कुमार ने कुल 76,644 वोट हासिल करते हुए, सपा-कांग्रेस गठबंधन के मुन्नालाल प्रेमी को 23,151 वोटों से हराया था। मुन्नालाल को 53,493 वोट मिले थे। वहीं, बसपा प्रत्याशी विवेक सिंह 47,059 वोट लेकर तीसरे नंबर पर रहे।
इसी तरह, 2012 के विधानसभा में बसपा उम्मीदवार रहे ओम कुमार 51,389 वोट लेकर सपा प्रत्याशी राजकुमार को 19,398 वोटों से हराया था। राजकुमार को 31,991 वोट मिले थे। वहीं, रालोद प्रत्याशी मुंशीराम को 27,397 मत मिले। भाजपा के सुभाष चंद्र बाल्मीकि 20,872 वोटों के साथ चौथे स्थान पर रहे थे।
जातीय समीकरण का खेल
इस उतार-चढ़ाव के में जातीय समीकरण के साथ-साथ गठबंधन की भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका थी। यूपी विधानसभा चुनाव 2012 में कॉन्ग्रेस का राष्ट्रीय लोकदल के साथ गठबंधन था। वहीं, भाजपा, सपा और बसपा ने अकेले चुनाव लड़ने का निर्णय लिया था। साल 2022 में सपा और रालोद साथ थे।
साल 2012 में अस्तित्व में आए नहटौर अगर 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव की बात करें तो रालोद ने समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। वहीं, रालोद इस बार भाजपा के नेतृत्व वाली NDA गठबंधन का हिस्सा है। इस गठबंधन में ओमप्रकाश राजभर की सुभासपा और संजय निषाद की निषाद पार्टी भी शामिल है।
इस आरक्षित सीट के जातीय समीकरण की बात करें तो यहाँ पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है। इस सीट पर मुस्लिम मतदाता 27% के आसपास हैं। वहीं, दलित मतदाता लगभग 23%, क्षत्रिय 14%, जाट 11% और सैनी एवं अन्य OBC मतदाता 15% हैं। बाकी अन्य जातियों के मतदाता हैं।
इसके अलावा, यहाँ धार्मिक ध्रुवीकरण शुरू से रहा है। समाजवादी पार्टी के शिवपाल यादव द्वारा आजम खान को गृहमंत्री बनाने के बयान के बाद यहाँ लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। दलित वर्ग सपा से दूरी बनाकर रहता है। विश्लेषकों का कहना है कि दलितों का एक बड़ा वर्ग सपा को हराने के लिए भाजपा को वोट करत सकता है।
गठबंधन बदल सकता है खेल
पिछले विधानसभा चुनाव में सपा और रालोद की गठबंधन होने के कारण इस गठबंधन को मुस्लिम, यादव और जाटों का बहुत बड़ा हिस्सा वोट के रूप में मिला था। वहीं, बसपा भी दलित के साथ कुछ अन्य जातियों की वोट लेने में कामयाब रही थी। इस तरह यह जीत का अंतर सिकुड़ गया था।
साल 2027 के चुनाव के लिए खबर लिखे जाने तक जो राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं, वह साल 2022 के विधानसभा चुनाव से बिल्कुल अलग हैं। इस बार एनडीए के साथ रालोद है। इसके कारण जाटों का बड़ा तबका भाजपा की ओर मुड़ सकता है। वहीं, अधिकांश क्षत्रिय भाजपा को ही वोट देंगे, ऐसा माना जा सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा से नाराजगी के कारण क्षत्रिय वोटों का कुछ हिस्सा पिछले चुनाव में छिटक गया था, जो इस बार ऐसा होने की उम्मीद कम है। बसपा के वोट में भी बहुत बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा। इसलिए 2027 का चुनाव अगर सब कुछ सामान्य रहा तो एक बार फिर यह सीट भाजपा के पक्ष में जा सकती है और जीत पिछली बार से बड़ा हो सकता है।
लोगों की अपनी समस्याएँ
हालाँकि, इस विधानसभा सीट के लोगों की कुछ अपनी समस्याएँ है जो मतदान को थोड़ा-बहुत प्रभावित कर सकती हैं। इनमें एक बड़ा मुद्दा बाढ़ का है। इस क्षेत्र में गांगन नदी के कारण हर साल बाढ़ के हालात पैदा हो जाते हैं और किसानों की फसलों का नुकसान होता है।
इसके अलावा, शहर का मुख्य मार्ग मुख्य कपड़ा बाजार से जुड़ा है, जहाँ जाम की समस्या रहती है। लोगों का कहना है कि बाईपास के हालात भी ठीक नहीं हैं। इसके अलावा, लोगों की एक बड़ी समस्या यातायात की है। उनका कहना है कि यहाँ बसें नहीं रुकती हैं। बिजनौर, हल्दौर, धामपुर व अन्य स्थानों की बसें रोडवेज बस अड्डे के बाहर से ही जाती हैं।
नहटौर को टेक्सटाइल बिजनेस के लिए जाना जाता है। यहाँ के स्टॉल और स्कार्फ विश्व प्रसिद्ध हैं। पिछले कुछ सालों में यहाँ के कारोबार की स्थिति कुछ गड़बड़ हुई है। इसे लोग बेहतर बनाने की माँग कर रहे हैं। यहाँ अब 10 से 15 कपड़ा मिल से ही उत्पादन हो रहा है। स्थानीय लोग इसमें भी सरकार से सहयोग की माँग कर रहे हैं।
भाजपा सरकार के कुछ प्रमुख कार्य
हालाँकि, अधिकांश लोगों का यह भी कहना है कि यहाँ भाजपा सरकार ने कुछ बेहतरीन काम भी किए हैं। इनमें 17 करोड़ रुपये की लागत से शादिपुर-नहटौर मार्ग का नवनिर्माण व चौड़ीकरण, लगभग 140 करोड़ रुपये की लागत से सल्लाहपुर-नसीरपुर-नेन सिंह मार्ग का निर्माण भी शामिल है।
इसके अलावा, सुंदरपुर गाँव में 25 करोड़ रुपए की लागत से कंपोजिट विद्यालय का निर्माण, 13 करोड़ रुपए की लागत से राजकीय आईटीआई और राजकीय बालिका इंटर कॉलेज का भी निर्माण कराया गया है। इसके अलावा, स्ट्रीट लाइट, यात्री शेड, कूड़ा निस्तारण आदि का काम भी हुआ है।
बता दें कि उत्तर प्रदेश के कुल 75 जिलों में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं। वहीं, बिजनौर जिले में कुल विधानसभा की कुल 8 सीटें हैं। इन सीटों में नजीबाबाद, नगीना, बढ़ापुर, धामपुर, नहटौर, बिजनौर, चाँदपुर और नूरपुर की सीटें शामिल हैं।