उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले का सदर विधानसभा सीट प्रदेश के उन कई सीटों में शामिल है, जहाँ पिछले विधानसभा चुनाव में हार-जीत बेहद कम मार्जिन से हुई थी। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा की श्रीमती सूची मौसम चौधरी ने सपा-रालोद गठबंधन के प्रत्याशी नीरज चौधरी को सिर्फ 1445 वोटों से हराया था। 

सूची मौसम चौधरी को 97,165 वोट मिले थे, जो कुल मतों का 38.54 प्रतिशत था। वहीं, सपा गठबंधन के रालोद प्रयाशी नीरज चौधरी को 95,720 मत मिले थे, जो कुल मतों का 37.96 प्रतिशत था। वहीं, बसपा की रूचिवीरा भी 52,035 मत लाने में कामयाब रही थीं। उनके हिस्से 20.64 प्रतिशत मत आए।

विधानसभा चुनावों में बिजनौर सीट की स्थिति

बिजनौर के साहनपुर जमींदार परिवार के भारतेंद्र सिंह भाजपा प्रत्याशी के रूप में इस सीट पर साल 2002 में 16,339 वोटों से और साल 2012 में 17,836 वोटों से जीते थे। साल 2014 में वे बिजनौर लोकसभा सीट से भाजपा सांसद बन गए। इसके बाद 2017 से इस विधानसभा सीट पर सूची चौधरी जीत रही हैं। हालांकि, यह जीत 27,281 से घटकर 1445 पर आ गई है। 

भारतेंद्र सिंह से पहले इस सीट पर महेंद्रपाल सिंह सन 1991 में और फिर सन 1993 के विधानसभा चुनावों में विजयी हुए थे। दोनों बार की जीत 15,000 से अधिक मार्जिन के साथ हुई थी। वहीं, कॉन्ग्रेस इस सीट पर अंतिम बार सन 1985 में जीती थी। कॉन्ग्रेस प्रत्याशी अजीज उर्रहमान 3,681 वोट से लगातार तीसरी बार जीते थे।

बसपा के खाते में यह सीट साल 1996 और साल 2007 में गई है। साल 1996 में यहाँ से राजा गजाफ्फर 26,000 वोट से जीते थे, जबकि 2007 में शहनवाज राणा सिर्फ 557 मतों से जीते थे। समाजवादी पार्टी का यहाँ से कभी खाता नहीं खुला। आने वाले 2027 के चुनाव में भी इसकी संभावना नहीं दिख रही है। 

लोकसभा चुनावों में बिजनौर विधानसभा के मत

बिजनौर विधासभा सीट मुस्लिम बहुल सीट है और लोकसभा चुनावों में इसका असर दिखा था। अगर पिछले लोकसभा यानी 2024 के चुनाव के संदर्भ में बिजनौर विधानसभा सीट की स्थिति का मुल्यांकन किया जाए तो यह भाजपा के लिए नुकसानदायक रहा है। इसके पीछे कई कारण हैं।

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साल 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान सपा प्रत्याशी दीपक सैनी को इस विधासनभा क्षेत्र में 89,429 मत मिले थे। वहीं, भाजपा गठबंधन के रालोद उम्मीदवार चंदन चौहान को 88,438 मत मिले थे, जबकि बसपा के खाते में 41,958 मत गए थे। इस तरह सपा यहाँ भाजपा-रालोद से 991 वोट से आगे रही थी।

इससे पहले साल 2019 में यहाँ के निवर्तमान सांसद भारतेंद्र सिंह को हार का सामना करना पड़ा था। भाजपा प्रत्याशी भारतेंद्र सिंह पर उस समय के सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीदवार मलूक नागर ने भारी अंतर से जीत हासिल की थी। उस समय यह बात सामने आई कि इस हार में बिजनौर से भाजपा विधायक सूची चौधरी का भी हाथ था।

कहा जाता है कि जाट समाज के इन दोनों नेताओं की आपसी खींचतान में यह संसदीय सीट भाजपा हार गई। वहीं, साल 2022 के चुनाव में भी यह अनबन देखने को मिली। हालाँकि, इस अनबन को दूर करने के लिए भारतेंद्र सिंह को मुस्लिम बहुल नजीमाबाद से टिकट दिया गया और सूची चौधरी को बिजनौर सीट पर बनाए रखा गया।

यहाँ ये याद रखना जरूरी है कि भारतेंद्र सिंह के सांसद बनने के कारण खाली हुई बिजनौर विधानसभा सीट सूची चौधरी को मिली थी। वहीं, भारतेंद्र सिंह का पुश्तैनी साहनपुर रियासत का उनका घर आज के नजीमाबाद विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है। लेकिन, भारतेंद्र सिंह शुरू से बिजनौर विधासभा सीट से चुनाव लड़े और हारे-जीते।

भरत के पिता की भूमि से भारतेंद्र बेदखल

कहा जाता है कि जिस सम्राट भरत के नाम पर आज यह देश भारत कहलाता है, उनके पिता सम्राट दुष्यंत और माता शकुंलता की प्रथम मुलाकात इसी बिजनौर में हुई थी। महात्मा विदुर यहीं रहते थे। लेकिन, राजनीति की दुविधा देखिए कि उसी बिजनौर से भारतेंद्र सिंह को बेदखल कर एक असंभव सीट पर भेज दिया गया। 

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भारतेंद्र सिंह को नजीमाबाद नाम की ऐसी सीट पर भेजा गया, जहाँ सपा-बसपा के मुस्लिम उम्मीदवार ही जीतते रहे हैं। साल 2022 में भारतेंद्र सिंह इस सीट पर सपा के तसलीम अहमद से 23,770 वोटों से हार गए। तसलीम यहाँ साल 2017 के भाजपा लहर में भी जीतने में कामयाब रहे थे।

भारतेंद्र सिंह को को नजीमाबाद भेजना भी उनके समर्थकों में गलत संदेश भेजा। इसका असर सूची चौधरी की जीत पर साफ दिखा। यह जीत 27,281 से घटकर 1445 पर आ गई है। अगले साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों में इस कलह को पाटा गया तो यह सीट भाजपा के हाथ से निकल सकती है।

बिजनौर का जातीय समीकरण

बिजनौर विधानसभा सीट पर सबसे अधिक आबादी मुस्लिम वोटरों की है। यहाँ मुस्लिम मतदाता 1,00,000 से अधिक हैं। इसके बाद दूसरे स्थान पर अनुसूचित जाति है, जिनकी आबादी लगभग 60,000 हैं। तीसरे स्थान पर जाट हैं, जिनकी आबादी 50,000 है। इसके बाद क्षत्रिय हैं, जिनकी आबादी लगभग 40,000 है।

इसके अलावा, अन्य जातियां भी यहां प्रमुख हैं। इनमें सैनी 25 हज़ार, कश्यप 12 हज़ार, पाल 10 हज़ार, नाई 7 हज़ार, प्रजापति 6 हज़ार, बंगाली 5 हज़ार, गुज्जर 5 हज़ार, भुईयां 4 हज़ार, वैश्य 5 हज़ार, पंजाबी 4 हज़ार, ब्राह्मण 3 हज़ार हैं।  

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बिजनौर विधानसभा सीट पर मतदाताओं की कुल संख्या 3,95,082 थी। हालाँकि, साल 2026 में एसआईआर के बाद इस सीट पर 52,127 वोट कम हुए हैं और यह संख्या 3,42,955 रह गई है। माना जा रहा है कि SIR के बाद मुस्लिम मतदाताओं की संख्या सबसे कम हुई है और यह संख्या 85,000 के आसपास रह गई है। 

जिले की विधानसभा सीटों पर विजेताओं की जातीय स्थिति

बिजनौर जिले में कुल 8 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से एक आरक्षित सीट है। पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा ने बिजनौर जिले में 3 क्षत्रिय, 2 जाट, 2 अनुसूचित जाति और 1 सैनी को टिकट दिया था। वहीं, रालोद-सपा गठबंधन ने 2 जाट, 2 अनुसूचित जाति, 1 सैनी, 1 गुज्जर और 2 मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। 

वहीं, बसपा ने जिले में 4 मुस्लिम, 2 अनुसूचित जाति, 1 वैश्य और 1 क्षत्रिय को टिकट दिया था। इसके अलावा, कॉन्ग्रेस ने 4 मुस्लिम, 2 अनुसूचित जाति, 1 सैनी और 1 त्यागी को मैदान में उतारा था। हालाँकि, बिजनौर सीट से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी अकबरी बेगम का पर्चा निरस्त हो गया था।

इस तरह देखें तो जिले में चार प्रमुख दलों की ओर से कुल 9 मुस्लिम, 8 अनुसूचित जाति, 4 क्षत्रिय,  4 जाट, 3 सैनी, 1 गुज्जर, 1 त्यागी को मैदान में उतारा गया था। इनमें से एक मुस्लिम (नजीबाबाद से सपा प्रत्याशी तसलीम अहमद) और एक सैनी 1 सैनी (नूरपुर से सपा के रामअवतार सैनी) जीते।

वहीं, 2 क्षत्रिय (बढ़ापुर से कुँवर सुशांत सिंह और धामपुर से अशोक कुमार राणा), 2 जाट (बिजनौर से भाजपा की सूची चौधरी और चाँदपुर से सपा के स्वामी ओमवेश) और 2 अनुसूचित जाति (नगीना (असु.) से सपा प्रत्याशी मनोज पारस और नेहटौर (असु.) से भाजपा प्रत्याशी ओम कुमार) जीतने में कामयाब रहे।

अगर जाति आधारित जीत की स्ट्राइक रेट की बात करें तो मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत का स्ट्राइक क्षत्रिय की 50%, जाट की 50%, सैनी की 33.33%, अनुसूचित जाति की 25% और मुस्लिम उम्मीदवारों की 11.11 प्रतिशत है। वहीं, गुज्जर और त्यागी उम्मीदवारों की जीत का स्ट्राइक रेट 0 है।