भारत के सबसे बड़े और सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सत्ताधारी भाजपा तीसरी बार सरकार बनाकर प्रदेश में एक नया इतिहास लिखने की कोशिश कर रही है। इसी संभावना अब विदेशी मीडिया भी जताने लगी है।

अगर भाजपा इस बार भी पूर्ण बहुमत की सरकार बना लेती है तो भाजपा उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की कॉन्ग्रेस की बराबरी कर लेगी। उत्तर प्रदेश में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड योगी आदित्यनाथ पहले ही बना चुके हैं।

योगी आदित्यनाथ ने खबर लिखे जाने तक की तारीख तक मुख्यमंत्री के रूप में अपना 9 वर्ष 154 दिन का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। योगी से पहले यह रिकॉर्ड स्वतंत्र भारत में यूपी के पहले मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत के नाम था। पंत का कुल कार्यकाल लगभग 8 वर्ष 127 दिन का रहा है।

उत्तर प्रदेश में अभी तक कॉन्ग्रेस ही ऐसी पार्टी है, जिसने लगातार तीसरी बार सरकार बनाई है। ये भी उस समय समय हुआ था, जब देश को तुरंत आजादी मिली थी और कॉन्ग्रेस को चुनौती देने वाली कोई पार्टी नहीं थी। जनता का कॉन्ग्रेस पर अटूट विश्वास था। हालाँकि, अब हालात बदल गए हैं और विदेशी मीडिया भी इसे जानती है।

ब्रिटेन के प्रतिष्ठित बिजनेस अखबार Financial Times (FT) जैसी विदेशी मीडिया भी योगी आदित्यनाथ की प्रसिद्धि और जनलोकप्रियता को नजरअंदाज नहीं कर पाते। इस अखबार ने 19 अगस्त 2026 को अपने ऑनलाइन लेख में योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराधिकारी बताया है।

फाइनेंशियल टाइम्स ने लिखा है कि योगी के नाम से प्रसिद्ध योगी आदित्यनाथ अगले साल की शुरुआत में राज्य में होने वाले चुनाव में लगातार तीसरी बार जीत के रूप में लोगों की सबसे पसंदीदा चेहरा हैं। यह जीत योगी को पीएम मोदी के संभावित उत्तराधिकारियों की अग्रिम पंक्ति में ले जाएगी। पीएम मोदी अभी 75 साल के हैं। 

FT लिखता है कि सीएम योगी ने ‘हिंदू-फ़र्स्ट’ एजेंडा के कारण अपनी अलग पहचान बनाई है। पीएम मोदी का भी यही एजेंडा है। साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले दोनों नेता जनता में बेहद लोकप्रिय हैं और मेहनती नेता के रूप में देखे जाते हैं। दोनों ही नैरेटिव (जन-धारणा) को आकार देने की कला में महारत हासिल कर ली है।

इस रिपोर्ट में नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ को तेज विकास पर जोर देने वाला नेता बताया गया है। इसमें कहा गया है, “उत्तर प्रदेश कई दशकों तक भारत के सबसे कम विकसित राज्यों में से एक था, लेकिन एक संत ने 2017 में पद संभाल कर सैकड़ों किलोमीटर लंबी सड़कों के निर्माण किया और डॉलर में निवेश हासिल किए।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के निवासी योगी आदित्यनाथ को बेहतर आर्थिक विकास और अपराध दर में उल्लेखनीय गिरावट का श्रेय देते हैं। यही कारण है कि योगी आदित्यनाथ प्रदेश में मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में लगातार तीसरी बार सबसे प्रमुख चेहरा हैं। 

योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या भी लोगों के लिए उत्सुकता का विषय रहती है। FT में लिखा गया है कि योगी आदित्यनाथ सुबह 4 बजे लकड़ी की चौकी पर लगे साधार बिस्तर से उठते हैं और दो घंटे तक ध्यान और प्रार्थना करते हैं। इसके बाद वे सादा नाश्ता करते हैं और फिर प्रदेश के काम में लग जाते हैं।

FT लिखता है कि योगी अगले साल की शुरुआत में होने वाले राज्य चुनावों में लगातार तीसरी बार जीत हासिल करने के प्रबल दावेदार हैं। यह जीत उन्हें 75 साल के मोदी के संभावित उत्तराधिकारियों की अगली कतार में लाकर खड़ा करेगी। हालाँकि, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी मोदी के प्रबल वारिस माने जाते हैं।

हालांकि, इसी रिपोर्ट में BBC की उस रिपोर्ट का भी जिक्र किया गया है, जिसमें योगी के आलोचकों ने उन्हें “बाँटने वाला” बताया था। साल 2020 में सीएम ने BBC से कहा था कि आज़ादी के बाद उपमहाद्वीप के बंटवारे के बाद भारत में रुककर मुसलमानों ने भारत पर कोई एहसान नहीं किया था।

हालाँकि, यह बयान ऐसे दौर का था जब देश में मुस्लिम तुष्टिकरण चरम पर थी। हिंदू नेता मंदिर नहीं जाते थे, लेकिन नमाजी टोपी पहनकर मुस्लिमों का रोजा तुड़वाते हुए फोटो जरूर डालते थे। मुस्लिम लव जिहाद जैसे अंतर्राष्ट्रीय षडयंत्र का बचाव करते हुए ‘भारत में मुस्लिमों के साथ भेदभाव’ का फर्जी रोना रोते थे। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह बयान तुष्टिकरण और स्पेशल ट्रिटमेंट की चाह रखने वाले लोगों को भले बुरा लगे, लेकिन उन्होंने कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में किसी जाति, धर्म या समुदाय के लोगों के साथ भेदभाव नहीं किया।  

फाइनेंशियल टाइम्स से योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कर दिया कि मठ का जीवन और सामुदायिक जीवन अलग-अलग नहीं है। उन्होंने कहा, “यह हमारे लिए समाज और उसकी समस्याओं को समझने का एक ज़रिया है।”