पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के अंतर्गत आने वाला पटियाली विधानसभा सीट उन सीटों में से एक है, जिस पर पक्ष और विपक्ष पैनी निगाह है। यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में समाजवादी पार्टी (सपा) की उम्मीदवार नादिरा सुल्तान ने इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रत्याशी ममतेश शाक्य को 4,001 मतों से हराया था।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में सपा की नादिरा सुल्तान को 91,958 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के ममतेश शाक्य को 87,957 वोट मिले थे। इस तरह साल 2017 में इस सीट पर 24 साल बाद मिली जीत को भाजपा सँभाल नहीं सकी और 2022 के विधानसभा चुनाव में हार गई।

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 के लिए पार्टियों ने बिसात बिछानी शुरू कर दी है। पिछले यानी 2022 के विधानसभा चुनावों में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रत्याशी नीरज किशोर मिश्रा को 30,626 मत मिले थे। इसलिए बसपा को भी यहाँ उम्मीद है। वहीं, कॉन्ग्रेस प्रत्याशी मोहम्मद इमरान अली सिर्फ 1,251 वोट ला पाए थे।  

विधानसभा सीट की स्थिति

पटियाली विधानसभा सीट वर्तमान में एटा संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आता है। एटा लोकसभा क्षेत्र के पाँच विधानसभा सीटों में से यह एक सीट है। इस विधानसभा सीट का गठन साल 1967 के परिसीमन आयोग की सिफारिश पर हुआ था और सन 1969 में यहाँ पहली बार चुनाव हुआ था। इस सीट पर अब तक कुल 14 बार चुनाव हो चुके हैं।

शुरुआत में इस सीट पर कॉन्ग्रेस का दबदबा रहा और उसने यह सीट 4 बार जीती। उसके बाद यह सीट भाजपा और समाजवादी पार्टी ने तीन-तीन बार जीती। बसपा ने भी इस सीट पर दो बार जीत हासिल की है। इस तरह, ये ऐसी सीट है जिस पर किसी पार्टी का एकाधिकार नहीं रहा।

साल 2022 में यह सीट सपा के खाते में है, जबकि यूपी विधानसभा चुनाव 2017 में इस सीट पर भाजपा के ममतेश शाक्य ने सपा प्रत्याशी किरण यादव को 3,771 वोटों से हराया था। ममतेश को 72,414 और किरण को 68,643 वोट मिले थे। वहीं, बसपा प्रत्याशी धीरेंद्र बहादुर सिंह (धीरू) को 44,131 वोट मिले थे।  

पटियाली विधानसभा सीट (Patiyali Assembly Seat) पर 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 24 साल बाद जीत मिली थी। इस सीट पर भाजपा को सबसे पहले साल 1991 के विधानसभा चुनाव में जीत मिली थी। इसके बाद साल 1993 के विधानसभा में जीत मिली। इसके बाद साल 2017 में जीत मिली।

इससे पहले यानी यूपी विधानसभा चुनाव 2012 में इस सीट पर सपा ने जीत हासिल की थी। यहाँ सपा प्रत्याशी नजीवा खान जीनत ने बसपा प्रत्याशी सूरज शाक्य को 27,775 वोटों से हराया था। जीनत को 62,493 और सूरज को 34,718 वोट मिले थे। वहीं, 13% वोटों के साथ भाजपा चौथे स्थान पर थी।

लोकसभा चुनावों में इस सीट की स्थिति

साल 2024 के लोकसभा चुनावों में इस विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी ने 43,098 वोटों से बढ़त बनाई थी। सपा प्रत्याशी देवेश शाक्य को 1,12,940 वोट मिले थे, जबकि भाजपा प्रत्याशी राजवीर सिंह को 69,842 मत मिले थे। हालाँकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में यहां से सपा को सिर्फ 2,572 वोटों की बढ़त मिली थी।

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा ने सपा पर सिर्फ 558 वोटों से बढ़त बनाई थी। ये वो दौर था जब पूरे देश में हर तरफ नरेंद्र मोदी की लहर थी और केंद्र में भाजपा ने पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। इसके बावजूद इस विधानसभा सीट पर भाजपा को कोई खास फायदा नहीं हुआ था।

ये तब हुआ था, जब लोधी-शाक्य बहुल इस सीट पर ये पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भाजपा में लौटकर आ चुके थे। इससे कल्याण सिंह ने भाजपा को छोड़कर अपनी खुद की पार्टी बनाई थी। साल 2009 के लोकसभा चुनाव में कल्याण सिंह ने निर्दलीय लड़ा था और इस विधानसभा सीट में उन्होंने बसपा पर 7,004 वोटों से बढ़त बनाई थी। 

पटियाली का जातीय समीकरण

पटियाली हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है, फिर भी मुस्लिम यहाँ बेहद प्रभावी हैं। यहाँ पर मुस्लिम वोटरों की आबादी लगभग 22 प्रतिशत है। मुस्लिमों के बाद सबसे अधिक आबादी यहाँ क्षत्रिय समाज की है। ओबीसी में सबसे अधिक आबादी काछी जाति की है, जो खुद को शाक्य कहते हैं

काछी समाज की आबादी यहाँ लगभग 12 प्रतिशत है। वहीं यादव कहलाने वाले अहीर समाज की आबादी लगभग 8 प्रतिशत है। इसके अलावा लोधी समाज की यहाँ लगभग 9 प्रतिशत आबादी है। ओबीसी की अन्य जातियों की भी यहाँ ठीक-ठाक आबादी है।

इसके बाद यहाँ सवर्ण समाज की आबादी है। इनमें सबसे अधिक क्षत्रिय समाज की आबादी है, जो लगभग 16 प्रतिशत हैं। इसके बाद ब्राह्मण समाज की आबादी 7 प्रतिशत के आसपास है। यहाँ कुछ वैश्य समाज को लोग भी हैं। अनुसूचित जातियों (SC) की आबादी यहाँ लगभग 16 प्रतिशत है। 

साल 2026 में हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में यहाँ मतदाताओं की कुल संख्या 3,17,691 है। इससे पहले 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान यहाँ मतदाताओं की कुल संख्या 3,62,617 थी। SIR के बाद इस विधानसभा क्षेत्र में 41,587 मतदाता कम हुए हैं।

यूपी विधानसभा 2027 की अनुमानित स्थिति

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में मुकाबला एक बार फिर समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच रहने की उम्मीद है। सपा यहाँ पर गैर-मुस्लिम और गैर-यादव पर दाँव लगा सकती है, क्योंकि मुस्लिम और यादव का 20 प्रतिशत वोटर उसका डेडिकेटेड वोटर है।

साल 2024 के लोकसभा चुनावों में सपा उम्मीदवार देवेश शाक्य ने 1,12,940 वोट लाकर भाजपा पर 43,098 वोटों से बढ़त बनाई। इसलिए अगर सपा किसी शाक्य को टिकट देती है तो यह समुदाय मुस्लिम-यादव-सपा का एक त्रिकोण बना सकता है। हालाँकि, शाक्य सांसद के रहते हुए शाक्य उम्मीदवार उतारने का विरोध भी हो सकता है। 

इसके अलावा, साल 2012 और 2022 में सपा ने अपने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे तो उन्हें जीत मिली, जबकि साल 2017 में यादव उम्मीदवार उतारे तो हार मिली। तो सपा एक बार फिर से मुस्लिम उम्मीदवार उतार सकती है या फिर गैर-मुस्लिम, गैर-यादव और गैर-शाक्य पर दाँव खेल सकती है।

वहीं, भाजपा में ममतेश शाक्य की जगह अब डॉक्टर शिव प्रताप सिंह को ज्यादा समर्थन मिल रहा है। शिव प्रताप सिंह के अलावा ममतेश शाक्य के एक और प्रतिद्वंद्वी हैं, केपी सोलंकी। इन्होंने भी क्षेत्र में अपना अच्छा प्रभाव बनाया है, जिसके कारण इनकी लोकप्रियता बनी हुई है।

सपा में भी वर्तमान विधायक नादिरा सुल्तान के प्रतिद्वंद्वी के रूप में अब्दुल हफीज गाँधी और नाशी खान मौजूद हैं।