उत्तर प्रदेश के एटा जिले में अलीगंज के अलावा एक और सीट है, जहाँ पिछले विधानसभा चुनाव 2022 में हार-जीत का अंतर 5,000 वोटों से कम था। यह सीट है जलेसर विधानसभा सीट। यह सीट SC के लिए सुरक्षित है। यहाँ पर भाजपा के संजीव कुमार दिवाकर ने सपा के रंजीत सुमन को 4,441 वोटों से हराया था।  

यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में संजीव ने 91,339 वोट हासिल किए थे। वहीं, सपा सांसद रामजीलाल सुमन के बेटे रंजीत सुमन को 86,898 वोट मिले थे। दोनों को मिले वोटों में सिर्फ 2.20% का अंतर था। वहीं, बसपा के आकाश सिंह 19,364 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर थे। कॉन्ग्रेस की विनीता को सिर्फ 860 वोट मिले थे। 

जलेसर विधानसभा सीट का इतिहास

एटा जिले का जलेसर विधानसभा सीट आगरा संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आता है। साल 1956 में इस सीट का गठन हुआ था और 1957 में यहाँ पहली बार मतदान हुआ था। यहाँ कुल 17 विधानसभा चुनाव हुए हैं। इस सीट कॉन्ग्रेस की पारंपरिक सीट रही है और उसने इस पर पाँच बार जीत दर्ज की है। उसकी अंतिम जीत 1985 में हुई थी।

कॉन्ग्रेस के बाद यह सीट भाजपा के खाते आ गया। भाजपा यहाँ पर 6 बार जीत हासिल की है। साल 1989 के चुनाव में भाजपा ने पहली बार इस सीट पर कब्जा किया। भाजपा प्रत्याशी माधव ने यहाँ जीत हासिल करके यह सीट भाजपा की झोली में डाल दी थी। माधव लगातार दो बार यहाँ से जीत हासिल किए। 

वहीं, समाजवादी पार्टी ने भी इस सीट पर तीन बार जीत दर्ज की है। इसके अलावा, स्वतंत्र पार्टी, भारतीय क्रांति दल और जनता पार्टी ने एक-एक बार जीत हासिल की है। बसपा का यहाँ खाता नहीं खुला है। हालाँकि, साल 2012 के विधानसभा चुनाव में सिर्फ 72 वोटों से बसपा दूसरे नंबर पर रह गई थी।

साल 2022 के चुनाव में भाजपा ने इस सीट पर लगातार दूसरी बार कब्जा किया था। साल 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा के संजीव कुमार दिवाकर ने सपा के तत्कालीन विधायक रंजीत सुमन को 19,808 वोटों से हराया। रंजीत सुमन ने साल 2012 में बसपा के ओम प्रकाश दलित को 22,569 वोटों से हाराया था।

इस सीट पर सबसे पहला विधायक बने कॉन्ग्रेस के चिरंजी लाल और साल 1989 में पहली बार भाजपा को जीताने वाले माधव के बाद संजीव कुमार दिवाकर ही हैं, जो यहाँ से लगातार दो बार जीते हैं। धोबी समाज के आने वाले संजीव कुमार दिवाकर को अगर तीसरी बार भी टिकट मिलती है और वे जीतते हैं तो यहाँ इतिहास बन जाएगा।

लोकसभा चुनावों में जलेसर विधानसभा सीट की स्थिति

अगर हम लोकसभा चुनावों में जलेसर सीट पर स्थिति का आँकलन करें तो यहाँ लगातार तीन बार से भाजपा लीड कर रही है। पिछले लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा ने यहाँ से 9,775 वोटों से लीड ली थी। यहाँ भाजपा प्रत्याशी सत्यपाल सिंह बघेल को 86,458 और सपा प्रत्याशी सुरेशचंद कर्दम को 76,683 वोट मिले थे।  

इससे पहले के लोकसभा चुनाव 2019 में भी भाजपा ने सपा पर 6,794 वोटों से बढ़त बनाए रखी। साल 2014 को लोकसभा चुनावों में यह बढ़त अधिक थी। भाजपा ने यहाँ सपा पर 27,640 वोटों की बढ़त हासिल की थी। वहीं, साल 2009 के लोकसभा चुनाव में सपा ने बसपा पर 23,157 वोटों की बढ़त बनाई थी। 

जलेसर का जातीय समीकरण

जलेसर विधानसभा सीट पर अहीर और दलित वोट सबसे अधिक है। दोनों वर्ग के मतदाताओं की संख्या लगभग 70-70 हजार है। वहीं, क्षत्रिय की संख्या 40 हजार, मुस्‍लिम 30 हजार, लोधी 25 हजार, बघेल करीब 23 हजार, वैश्य 13 हजार और ब्राह्मण 7 हजार हैं। क्षत्रिय समाज यह सीट पर प्रत्याशियों की जीत तय करता है। 

साल 2026 में हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद यहाँ मतदाताओं की कुल संख्या अब 2,77,943 रह गई है। इससे पहले साल 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान यहाँ मतदाताओं की कुल संख्या 3,04,716 थी। SIR के बाद इस विधानसभा क्षेत्र में 26,773 मतदाता कम हुए हैं।

साल 2027 के विधानसभा चुनाव का गणित

इस सीट यादव मतदाताओं की आबादी अधिक है। साथ ही मुस्लिम मिल जाने के कारण ये सबसे बड़े मतदाता समूह बन जाते हैं, जिसके कारण समाजावादी पार्टी का यहाँ दबदबा बनता दिख जाता है। इसके कारण यहाँ यादव बनाम गैर-यादव का स्थिति बन जाती है।

भाजपा के पारंपरिक वोटर क्षत्रिय, वैश्य और ब्राह्मण के साथ लोधी और बघेल मिलकर एक बड़ा समूह बना लेते हैं। यही कारण है कि भाजपा यहाँ से लगातार छह बार से जीत रही है। लोधी या बघेल वोटों में थोड़ा बहुत स्विंग भी भाजपा की स्थिति को नाजुक बना देता है। वहीं, एससी समाज का एक बड़ा वर्ग भी भाजपा को वोट करता है।

पिछले चुनाव में अनुसूचित जाति और बघेल समाज के कुछ वोटरों के छिटक गए थे। इसके कारण पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत का अंतर खिसक कर 4,441 पर आ गया। बता दें कि भाजपा के प्रत्याशी संजीव कुमार दिवाकर धोबी समाज से आते हैं, जबकि सपा के रंजीत सुमन जाटव समाज से आते हैं।