उत्तर प्रदेश में फिरोजाबाद जिले के जसराना विधानसभा सीट पर यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में काँटे की टक्कर रही थी। इस सीट पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार सचिन यादव ने भाजपा उम्मीदवार मानवेंद्र सिंह लोधी को सिर्फ 836 वोटों से हराया था। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में भाजपा का इस सीट पर विशेष नजर है।

सचिन को कुल 1,08,289 वोट मिले थे, जो कुल वोटिंग का 43.99% था। वहीं, मानवेंद्र सिंह लोधी को 1,07,453 मत मिले थे, जो कुल वोटिंग का 43.65 प्रतिशत रहा। वहीं, बसपा के सूर्य प्रताप सिंह को 16,955 वोट (6.89%) मिले। निर्दलीय प्रत्याशी शिव प्रताप सिंह यादव 7,765 वोट लाकर चौथे स्थान पर रहे।

विधानसभा सीट की स्थिति

इस विधानसभा सीट का गठन 1952 में हुआ था। तब से लेकर अब तक इस पर 18 चुनाव हो चुके हैं। इस सीट पर 1952 से लेकर 1989 तक 5 बार कॉन्ग्रेस का कब्जा रहा। साल 1993 से लेकर 2022 के बीच इस सीट पर 2017 छोड़कर समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा।

साल 2017 में इस सीट पर पहली बार भाजपा ने कब्जा किया था। सबसे बड़ी बात ये है कि इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी दो बार जीत हासिल की है। इसके अलावा स्वतंत्र पार्टी, भारतीय क्रांति दल, जनता पार्टी, लोक दल और जनता दल ने भी एक-एक बार यहाँ जीत हासिल की है। 

साल 2012 के विधानसभा चुनाव में इस सीट को समाजवादी पार्टी के रामवीर सिंह ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के रामगोपाल लोधी को 28,636 वोटों से हराया था। इस चुनाव में भाजपा को सिर्फ 2.06% वोट मिला था और वो अपनी जमानत जब्त करवाकर वह तीसरे नंबर पर चली गई थी। 

साल 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले रामगोपाल लोधी भाजपा में शामिल हो गए। इस चुनाव में भाजपा की ओर से रामगोपाल लोधी ने सपा के शिव प्रताप सिंह को 20,328 वोटों से हरा दिया। वहीं, सपा विधायक रहे रामवीर सिंह लोकदल में शामिल हो गए और वे इस चुनाव में चौथे स्थान पर चले गए।

लोकसभा चुनाव 2024 में जसराना विधानसभा सीट की स्थिति

जसराना विधानसभा सीट फिरोजाबाद संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आता है। इस पर वर्तमान में समाजवादी पार्टी के अक्षय यादव सांसद हैं। अक्षय यादव सपा नेता रामगोपाल यादव के बेटे और सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के भतीजे हैं। वर्तमान सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव उनके चचेरे भाई हैं।

मुलायम परिवार से जुड़ा सीट होने के कारण फिरोजाबाद सीट हाईप्रोफाइल सीट बन गई है। साल 2024 में सपा के अक्षय यादव के सामने भाजपा ने विश्वदीप सिंह को मैदान में उतारा था। इस चुनाव में अक्षय यादव को इस विधानसभा में भारी बढ़त मिली थी।

अक्षय यादव को जसराना विधानसभा में 1,15,650 वोट मिले थे, जबकि विश्वदीप सिंह को 25,897 वोट मिले थे। इस तरह, जसराना सीट पर समाजवादी पार्टी को 25,897 वोटों की भारी बढ़त मिली थी। लोकसभा चुनाव 2019 में इस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा ने 4,776 वोटों की बढ़त बनाई थी। 

हालाँकि, लोकसभा चुनाव 2014 में स्थिति उलट थी। जब पूरा देश मोदी लहर और हिंदुत्व की चेतना से सराबोर था, तब भी इस विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी ने 47,088 वोटों से भाजपा पर बढ़त बनाकर रखी थी। वहीं, लोकसभा चुनाव 2009 में सपा ने बसपा पर 31,490 वोटों से बढ़त बनाई थी। 

इस सीट का जातीय समीकरण 

जसराना सीट पर सबसे अधिक आबादी अहीर और लोधी मतदाताओं की है। दोनों की संख्या लगभग बराबर मानी जाती है। तीसरे स्थान पर अनुसूचित जाति (SC) की आबादी है, जबकि चौथे स्थान पर क्षत्रिय/ठाकुर मतादाताओं की संख्या है। मुस्लिम, शाक्य/कुशवाहा, ब्राह्मण और वैश्य वर्ग के मतदाताओं की संख्या भी प्रभावी है।

इस सीट पर यादव 31% हैं। इतने ही लोधी मतदाता भी हैं। अनुसूचित जाति के मतदाताओं की आबादी लगभग 16 प्रतिशत है, जबकि क्षत्रिय 12 प्रतिशत हैं। इस विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम तकरीबन 6 प्रतिशत है। बाकी अन्य जातियाँ हैं।

साल 2024 में हुए लोकसभा चुनावों के दौरान इस विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की कुल संख्या 3,72,439 थी। साल 2026 की SIR में 15,547 मतदाताओं के नाम कटने के बाद यह संख्या घटकर 3,56,892 रह गई है। यानी मतदाताओं की संख्या में 4.17 प्रतिशत की कमी आई है।

यूपी विधानसभा 2027 की अनुमानित स्थिति

इस सीट पर समाजवादी पार्टी के यादव बनाम भाजपा नेतृत्व वाली NDA के लोधी का मुकाबला रह सकता है। समाजवादी पार्टी के साथ यादव और अल्पसंख्यक सामने भाजपा का लोधी-सवर्ण गठजोड़ होगा। इसमें गैर-यादव ओबीसी और दलित की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाएगी।

मायावती की बहुजन समाज पार्टी के कमजोर होने के कारण दलित समाज सपा के बजाय भाजपा की ओर अधिक झुकेगा। वहीं, गैर-यादव पिछड़े एवं अतिपिछड़ा समाज भी एनडीए की ओर जा सकता है। हालाँकि, अंतिम फैसला प्रत्याशियों के चयन पर निर्भर करेगा, लेकिन SIR का प्रभाव भी स्पष्ट दिखेगा।