उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में जिन सीटों पर पक्ष और विपक्ष, दोनों का फोकस रहेगा, उनमें से एक सीट एटा जिले की अलीगंज भी है। यहाँ पिछले विधानसभा चुनाव में हार-जीत का अंतर 5,000 वोटों से कम था। इस सीट पर भाजपा के सत्यपाल सिंह राठौड़ ने सपा प्रत्याशी रामेश्वर सिंह यादव को 3,810 वोटों से हराया था। 

यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में सत्यापाल सिंह को 1,02,873 वोट मिले थे, जो कुल मतों का 45.44% था। वहीं, रामेश्वर को 99,063 वोट मिले थे, जो कुल मतों का 43.76% था। वहीं, बसपा के सऊद अली खान उर्फ जुनैद मियां को 17,751 यानी 7.84% वोट मिले थे। कॉन्ग्रेस के सुभाष वर्मा 1,031 मतों के साथ सातवें स्थान पर थे।

विधानसभा चुनाव में अलीगंज की इतिहास

अलीगंज एटा जिले में और फर्रुखाबाद संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आता है। साल 1956 में परिसीमन के बाद इस सीट का गठन हुआ था और साल 1957 में पहली बार यहां चुनाव हुए थे। इस तरह, अलीगंज सीट पर अब तक 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इन चुनावों में कॉन्ग्रेस, सपा और भाजपा ने चार-चार बार इस सीट को जीती है।

भाजपा ने ‘भारतीय जनसंघ’ के तौर पर इस सीट को दो बार जीता। जनता पार्टी (सेक्युलर) ने यह सीट दो बार जीती है। वहीं, जनता पार्टी, बसपा और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने एक-एक बार इस सीट पर जीत दर्ज की है। इस तरह, क्षत्रिय और यादव बहुल वाली इस सीट पर हर पार्टी को मौका मिलता रहा है। 

साल 2022 के चुनाव के पहले यानी विधानसभा चुनाव 2017 में भी भाजपा के सत्यपाल सिंह राठौड़ ने इस सीट पर जीत हासिल की थी। उन्होंने सपा के रामेश्वर यादव को 13,851 वोटों से हराया था। इस चुनाव में सत्यपाल सिंह को 88,695 वोट मिले थे, जबकि रामेश्वर को 74,844 मत मिले थे। 

यूपी विधानसभा चुनाव 2012 में इस सीट को रामेश्वर सिंह ने बसपा की डॉक्टर संघमित्रा मौर्य को 26,021 वोटों से हराकर जीता था। बाद में संघमित्रा मौर्य भाजपा में शामिल हो गई थीं। इस चुनाव में रामेश्वर को 91,141 और संघमित्रा को 65,120 वोट मिले थे। इसमें भाजपा चौथे नंबर पर थी। यहाँ 1989 में आखिरी बार कॉन्ग्रेस जीती थी।

लोकसभा चुनावों में अलीगंज विधानसभा की स्थिति

पिछले आम चुनाव यानी लोकसभा चुनाव 2024 में फर्रूखाबाद लोकसभा सीट से भाजपा ने मुकेश राजपूत को मैदान में उतारा था। वहीं, सपा ने नवल किशोर शाक्य को अपना उम्मीदवार बनाया था। इस लोकसभा चुनाव में अलीगंज सीट पर सपा ने 21,396 मतों से भाजपा पर बढ़त बनाई थी।

सपा के नवल शाक्य को इस विधानसभा क्षेत्र में 1,13,312 मत मिले थे। वहीं, भाजपा के मुकेश राजपूत को 91,916 मत मिले थे। बसपा के क्रांति पांडेय को भी 12,512 मत मिल गए थे। इस लोकसभा चुनाव में भाजपा के मुकेश राजपूत की सिर्फ 2,678 वोटों से जीत हुई थी।

अलीगंज विधानसभा सीट का जातीय समीकरण

अलीगंज सीट पर क्षत्रिय और यादव की संख्या सबसे अधिक है। यादवों की आबादी लगभग 19% और ठाकुरों की लगभग 18% है। यहाँ शाक्य 10%, लोधी 9%, मुस्लिम 6%, अनुसूचित जाति यानी दलित 12%, ब्राह्मण 3%, बनिया, 4%, निषाद 3% आबादी है। वहीं, नाई, प्रजापति, कायस्थ लगभग 1-1% हैं। बाकी में अन्य जातियाँ हैं। 

साल 2026 में हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में यहाँ मतदाताओं की कुल संख्या 3,23,622 है। इससे पहले 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान यहाँ मतदाताओं की कुल संख्या 3,51,949 थी। SIR के बाद इस विधानसभा क्षेत्र में 28,327 मतदाता कम हुए हैं।

जातीय समीकरण का असर

अगर लोकसभा चुनाव 2024 को देखें तो इस सीट पर सपा प्रत्याशी नवल किशोर शाक्य को यादवों और मुस्लिमों के अलावा अधिकांश शाक्यों का वोट मिला। वहीं, लोधी समाज से आने वाले भाजपा प्रत्याशी मुकेश राजपूत को क्षत्रियों के साथ अन्य सवर्णों और लोधी समाज का वोट मिला। शाक्य वोटों के कारण यहाँ भाजपा पिछड़ गई।

वहीं, अगर पिछले विधानसभा चुनाव यानी यूपी विधानसभा चुनाव 2022 की बात करें तो चुनाव यादव बनाम गैर-यादव रहा। सपा के पक्ष में यादव और मुस्लिम रहे, जबकि भाजपा के पक्ष में ठाकुर, पंडित, बनिया, लोधी, शाक्य, कायस्थ आदि रहे। ओबीसी समुदाय के कुछ वर्ग का वोट सपा में गया। इसके कारण जीत का अंतर घट गया।