कॉन्ग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रायबरेली से लोकसभा सांसद राहुल गाँधी अपनी बहन एवं वायनाड से सांसद प्रियंका गाँधी के साथ प्रयागराज महाकुंभ में स्नान करने जाएंगे। संभावना है कि वे आने वाले कुछ समय में वे संगम तट पर पहुँचेंगे और गंगा, यमुना एवं सरस्वती के संगम पर आस्था की डुबकी लगाएँगे।
 
कॉन्ग्रेस ने इसकी तैयारियाँ भी शुरू कर दी हैं। राहुल और प्रियंका गाँधी के दौरा को लेकर उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि पहले भी कॉन्ग्रेस के नेता कुंभ में स्नान के लिए आते रहे हैं। प्रियंका गाँधी भी पहले कुंभ गई हैं। उन्होंने कहा, “अब हम लोग भी कुंभ में जाकर स्नान करेंगे और हर हर महादेव कहेंगे।”
 
राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी के भावी आगमन को लेकर उत्तर प्रदेश के कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है। वहीं, महाकुंभ मेले में शिविर लगाए कॉन्ग्रेस सेवा के कार्यकर्ता भी इसकी तैयारियों में जुट गए हैं। माना जा रहा है कि राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी स्नान के बाद विभिन्न जगहों पर पूजा-अर्चना भी करेंगे और कॉन्ग्रेस सेवा दल के कुंभ मेला क्षेत्र के सेक्टर-15 स्थित शिविर में जाकर कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। इन सबको देखते हुए मेला प्रशासन ने तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। दरअसल, सप्ताहांत होने के होने की वजह से मेला क्षेत्र में भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है। इसको देखते हुए प्रशासन ने तैयारियाँ शुरू कर दी हैं।
 
राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी से पहले कॉन्ग्रेस के चाणक्य कहे जाने वाले राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह अपने बेटे के साथ आकर महाकुंभ में डुबकी लगा चुके हैं। वहीं, कॉन्ग्रेस के संकटमोचक की भूमिका कई बार निभा चुके कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और राजस्थान कॉन्ग्रेस के प्रभावशाली नेता सहित तमाम बड़े नेता महाकुंभ में आ चुके हैं। राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी अब कुंभ के खत्म होने में जब 10 दिन बचे हैं। कहा जा रहा है कि संसद का सत्र होने की वजह से उन्हें समय नहीं मिल पाया था, क्योंकि वे सदन में विपक्ष के नेता भी हैं।
 
एक तरफ राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी कुंभ में स्नान करके खुद को धार्मिक होने का छवि को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं तो दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे महाकुंभ को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं। ऐसे में आम व्यक्ति यही सोचेगा कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष कुंभ के आयोजन पर सवाल उठा रहे हैं और पार्टी के सांसद एवं अन्य नेता कुंभ में जाकर स्नान कर रहे हैं।
 
दरअसल, खड़गे ने महाकुंभ भाजपा नेताओं के स्नान को लेकर महू की एक सभा में उन पर कटाक्ष किया था। खड़गे ने कहा था, “गंगा में डुबकी लगाने से गरीबी दूर होती है क्या? (लोगों से पूछा) क्या आपको पेट में खाना मिलता है? मैं किसी की आस्था को कोई ठेस नहीं पहुँचाना चाहता। अगर किसी को दुख हुआ तो मैं माफ़ी चाहता हूँ, लेकिन आप बताइए कि बच्चा भूखा मर रहा है, बच्चा स्कूल में नहीं जा रहा है, मजदूरों को मजदूरी नहीं मिल रही है, लेकिन गंगा नदी में डुबकी लगाई जा रही हैं। तब तक डुबकी लगाई जाती है, जब तक टीवी पर अच्छा नहीं आ जाता। ये तब तक डुबकी मारते रहते हैं। ऐसे लोगों से देश की भलाई होने वाली नहीं है।”
 
खड़गे ने तो यहाँ तक कह दिया था कि धर्म के नाम पर गरीबों का शोषण हो रहा है और उसके खिलाफ लोगों को लड़ना है। इस बयान को लेकर देश भर में बवाल हुआ था। इसे हिंदू आस्था का अपमान बताया गया था। जगह-जगह उनके पुतले फूँके गए और थानों में शिकायतें दी गईं। उसके बाद राज्यसभा में विपक्ष के नेता की हैसियत से उन्होंने कह दिया कि 29 जनवरी को महाकुंभ में हुई भगदड़ में हजारों लोग मारे गए। उन्होंने हजारों लोगों को श्रद्धांजलि दे दी, जबकि सरकारी आँकड़े 30 मौतों की बात करते हैं। खड़गे बयान पर राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने उन्हें अपना बयान वापस लेने को कहा। इसके बाद खड़गे ने कहा कि ये उनका अनुमान है। इस तरह झूठ बोलकर उन्होंने कुंभ को एक बार बदनाम करने की कोशिश की।
 
ऐसे में सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब कुंभ को लेकर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष का ऐसा नजरिया है तो उनके पार्टी के सांसद-मंत्री-विधायक कुंभ जाकर अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष का अनादर क्यों कर रहे हैं। राहुल गाँधी के साथ पूरा यूपी कॉन्ग्रेस कुंभ नहाने के चक्कर में है। ऐसे में खड़गे सही हैं या राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी, ये वही बता सकते हैं, क्योंकि कॉन्ग्रेस का सनातन विरोध रूख हमेशा से रहा है। कॉन्ग्रेस मुस्लिमों एवं उनके त्योहारों को लेकर उदार ही है, जबकि हिंदू त्योहारों को लेकर आक्रामक रूख अपनाया है। राहुल गाँधी भी इससे अलग नहीं हैं।
 
ये वही राहुल गाँधी हैं, जिन्होंने कई बार हिंदू धर्म और परंपरा को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी कर चुके हैं। उन्होंने लगभग 10 साल पहले कहा था कि मंदिर जाने वाले लोग ही महिलाओं के साथ गलत व्‍यवहार करतें है। इस विवादित बयान की वजह से वे विपक्ष के साथ-साथ हिंदू समाज के निशाने पर आ गए थे। संतों ने भी इसे सनातन का अपमान बताया था। सदन में तो इन्होंने हिंदुओं को हिंसक बता दिया था। उन्होंने कहा था कि जो लोग खुद को हिंदू कहते हैं, वो दिन-रात हिंसा करते हैं।
 
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी को स्वयं खड़े होकर मोर्चा संभालना पड़ा था। इतना ही नहीं, हाथरस कांड में भाजपा को घेरने की कोशिश में उन्होंने मनुस्मृति तक का अपमान कर दिया था। उन्होंने कहा था, “ये संविधान में कहाँ लिखा है कि जो बलात्कार करते हैं वो बाहर घूमें और जिसका रेप हुआ वो घर में रहे। ये आपकी किताब मनुस्मृति में लिखा होगा, लेकिन संविधान में नहीं लिखा है।” इस तरह के दर्जनों उदाहरण हैं, जब राहुल गाँधी ने हिंदू धर्म और हिंदू परंपरा का अपमान किया।
 
खुद को हिंदू कहने वाले दिन-रात हिंसा करते हैं? दरअसल, 9 फरवरी को संतों ने महाकुंभ में आयोजित धर्म संसद में राहुल गाँधी को हिंदू समाज से बहिष्कृत करने का प्रस्ताव पास किया था। यह प्रस्ताव मनुस्मृति को लेकर दिए गए उनके बयान को लेकर था। इससे हिंदू संत काफी नाराज थे। उन्होंने कहा था कि राहुल गाँधी अपने बयान के लिए एक महीने में माफी माँगें, वर्ना उन्हें हिंदू धर्म से निष्कासित कर दिया जाएगा।
 
दूसरी तरफ, खड़गे के उस बयान को लेकर पहले से ही लोगों में नाराजगी है कि गंगा स्नान से गरीबी नहीं मिटती। राहुल गाँधी चौतरफा नुकसान में फँस चुके थे। उनके पास हिंदू विरोधी होने की अपनी छवि को सुधारने का इससे अच्छा विकल्प नहीं था। कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ सूत्र ने बताया कि प्रियंका गाँधी ने ही राहुल गाँधी को कुंभ में स्नान करने के लिए तैयार किया है। वह राहुल गाँधी के हिंदू विरोधी व्यक्तित्व को पूरी तरह बदलने की तैयारी कर रही हैं।
 
प्रियंका गाँधी पहले भी अपने परिवार के साथ कुंभ में जा चुकी हैं। वह साल 2019 और 2021 में कुंभ में अपनी बेटी के साथ जाकर स्नान किया था और नाव की सवारी की थी। इसकी तस्वीर भी उन्होंने सोशल मीडिया पर डाला था। इसको लेकर उनकी हर तरफ वाह-वाही हुई थी और राहुल गाँधी पर सवाल उठाए गए थे। इतना ही नहीं, राहुल गाँधी की माँ सोनिया गाँधी भी साल 2001 में कुंभ में स्नान करने गई थीं। राहुल गाँधी ही अकेले ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्होंने अभी तक कुंभ का स्नान नहीं किया और लगातार हिंदू विरोधी बातें करते रहे हैं।
 
प्रियंका गाँधी इसके नफा और नुकसान को बेहतर समझती हैं। यही कारण है कि मंदिरों में जाने लोग रेप करते हैं बयान देने के बाद साल 2014 में कॉन्ग्रेस को उसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी थी। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान प्रियंका गाँधी अपने भाई राहुल गाँधी को लेकर मंदिर-मंदिर घुमीं और देश को ये बताने की कोशिश की कि राहुल गाँधी भी उतने ही धार्मिक और हिंदू हैं, जितने कि अन्य लोग हैं। हालाँकि, यह भी काम नहीं आया और साल 2019 के लोकसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस को कोई फायदा नहीं मिला। हालाँकि मंदिर जाने का उनका क्रम जारी रहा, लेकिन हिंदुओं पर परोक्ष बाण चलाने से भी वे नहीं चुके।
 
ऐसे में तमाम बयानों के बाद और खड़गे के टिप्पणी का पाप धोने के लिए राहुल गाँधी अपनी बहन प्रियंका गाँधी के साथ कुंभ में जाने के लिए तैयार हो गए। यह राष्ट्रीय अध्यक्ष की भावनाओं के खिलाफ कदम है, लेकिन राजनीतिक रूप से अछूत बनने से बेहतर है। खड़गे के बयान के बाद राहुल और प्रियंका का कुंभ जाना यह भी बताता है कि खड़गे की बात का पार्टी में कोई अहमियत नहीं है। वे सिर्फ कठपुतली हैं।
 
उन्हें ना ही कोई पार्टी में भाव देने को तैयार है और ना ही निर्वाचन क्षेत्र में। ऐसे में राहुल गाँधी ने हर पार से मुक्ति के लिए गंगा मइया की शरण में जाने से बेहतर विकल्प और कोई नहीं समझा और इसे समझाने में प्रियंका गाँधी ने महत्पूर्ण भूमिका निभाई। संगम स्नान के बाद राहुल गाँधी एक नए अवतार में दिख जाएँ तो अचरज की बात नहीं होगी। रही बात मल्लिकार्जुन खड़गे की तो उनकी बातों का मोल ही क्या है।