यूपी विधानसभा चुनाव 2027: धामपुर में बीजेपी को लग सकता है झटका
साल 2017 और साल 2022 में बिजनौर जिले की नगीना लोकसभा के अंतर्गत आने वाली धामपुर विधानसभा की सीट को भाजपा के अशोक राणा ने जीता है। साल 2017 में उन्होंने सपा के ठाकुर मूलचंद चौहान को लगभग 18,000 वोट से हराया था। वहीं, साल 2022 में अशोक राणा की जीत का अंतर घटकर मात्र 203 वोट का रह गया था।
साल 2022 में मूलचंद चौहान बसपा में चले गए थे और उन्हें लगभग 39,000 वोट मिले थे। वहीं, सपा उमीदवार नईम उल हसन को अशोक राणा के 81,791 के मुकाबले 81,588 वोट मिले थे। यह हार मात्र 203 वोटों से हुई थी। कह सकते हैं अशोक राणा किसी तरह ये चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे।
वैसे तो 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अभी तक किसी पार्टी ने अपने उमीदवारो के नाम सामने नहीं रखें हैं, लेकिन दावेदारों ने भागदौड़ तेज कर दी है। जहाँ ठाकुर मूलचंद चौहान वापस सपा में आकर टिकट की दावेदारी कर रहे हैं, वहीं भाजपा से पूर्व विधायक इंद्रदेव सिंह और हिन्दू युवा वाहिनी के एनपी सिंह भी दावा ठोक रहे हैं।
इंद्रदेव सिंह धामपुर के बगल की वाली अफजलगढ़ विधानसभा से 4 बार विधायक रह चुके हैं। साल 2012 के परिसीमन के बाद अफजलगढ़ सीट समाप्त हो गयी थी और इसे बढ़ापुर विधानसभा सीट में शामिल कर दिया गया था। यहाँ से वर्तमान में मुरादाबाद के पूर्व सांसद स्वर्गीय कुंवर सर्वेश सिंह के पुत्र सुशांत सिंह भाजपा के विधायक हैं।
धामपुर विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो यहाँ 40% मुस्लिम, 18% क्षत्रिय, 15% दलित, 3% जाट और 3% ही वैश्य हैं। आज़ादी के बाद से ही इस सीट पर क्षत्रियों का दबदबा रहा है। साल 1996 से यह सीट ठाकुर मूलचंद चौहान और अशोक राणा के बीच ही रही है।
साल 1996, साल 2002 और साल 2012 के विधानसभा चुनावों में ठाकुर मूलचंद चौहान यहाँ से विधायक बने थे। वहीं, साल 2007 , साल 2017 और साल 2022 के विधानसभा चुनावों में अशोक राणा इस सीट से विधायक बने।
पिछले चुनाव में अशोक राणा के इतने कम वोट एवं मुश्किल से चुनाव जीत पाने का कारण रहा था ठाकुर मूलचंद चौहान का बसपा से खड़ा होना। ठाकुर मूलचंद चौहान को जहाँ दलित वोट तो मिले थे, वहीं उन्होंने क्षत्रिय वोटों में भी सेंध लगायी थी। इसके कारण अशोक राणा की जीत का मार्जिन ना के बराबर रह गया था।
सपा के नईम उल हसन को मुस्लिम वोट भारी संख्या में मिले थे। कह सकते हैं कि केवल मुस्लिम वोटो के दम पर ही समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार नईम उल हसन भाजपा के उम्मीदवार अशोक राणा को इतनी कड़ी टक्कर दे पाए थे।
इस दृष्टि से देखें तो साल 2027 में अगर समाजवादी पार्टी ठाकुर मूलचंद चौहान को टिकट देती है और वो मुस्लिमों वोटो के साथ साथ 25 से 30% क्षत्रिय वोट भी वो लेने में कामयाब हो सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो यह सीट भाजपा के हाथ से निकल सकती है। नईम उल हसन को टिकट मिलने की स्थिति में क्षत्रिय वोट एकतरफा अशोक राणा के पक्ष में जा सकता है और भाजपा की बड़ी जीत हो सकती है।