नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के चलते देशभर में प्रदर्शन के साथ-साथ आगजनी और हिंसा हो रही है. कुछ प्रदर्शन CAA समर्थन में है और कुछ विरोध में. इन प्रदर्शन में अभी तक 17 लोगों की जान गई, हिंसा हुई और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा. ऐसे में सरकार प्रदर्शनकारियों पर लगाम लगाने के लिए उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाने की तैयार कर रही है. रासुका को National security act (NSA) भी कहा जाता है. इसमें हिरासत में लिए व्यक्ति को अधिकमत एक साल जेल में रखा जा सकता है. 

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम-1980, देश की सुरक्षा के लिए सरकार को अधिक शक्ति देने से संबंधित एक कानून है. यह कानून केंद्र और राज्य सरकार को किसी भी संदिग्ध नागरिक को हिरासत में लेने की शक्ति देता है.

सुरक्षा के लिए देश में बनाए गए कई कानूनों में से यह एक महत्वपूर्ण कानून है. 23 सितंबर 1980 को इंदिरा गांधी की सरकार ने इसे कानून का रूप दिया था. ये कानून देश की सुरक्षा प्रदान करने के लिए सरकार को अधिक शक्ति देने से संबंधित है. यह कानून केंद्र और राज्य सरकार को संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लेने की शक्ति देता है.

अगर सरकार को लगता है कि कोई व्यक्ति उसे देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले कार्यों को करने से रोक रहा है तो उसे हिरासत में लिया जा सकता है. इसके अलावा, यदि सरकार को लगता है कि कोई व्यक्ति कानून-व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में उसके सामने बाधा खड़ी कर रहा है तो वह उसे हिरासत में लेने का आदेश दे सकती है. इस कानून का इस्तेमाल जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त, राज्य सरकार अपने सीमित दायरे में भी कर सकती हैं.

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम-1980 (NSA) के तहत किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को बिना किसी आरोप के 12 महीने तक जेल में रखा जा सकता है. राज्य सरकार को यह सूचित करने की आवश्यकता है कि NSA के तहत एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है. राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिए गए व्यक्ति को उसके खिलाफ आरोप तय किए बिना 10 दिनों के लिए रखा जा सकता है. हिरासत में लिया गया व्यक्ति उच्च न्यायालय के सलाहकार बोर्ड के समक्ष अपील कर सकता है लेकिन उसे मुकदमे के दौरान वकील की अनुमति नहीं है.

गौरतलब है कि राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर को कई महीने तक जेल में रखा गया था. वहीं इस कानून के तहत मणिपुर के पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम को जेल में रखा गया था. सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना करने पर उन्हें नवंबर 2018 में गिरफ्तार किया गया था. वह 133 दिन जेल में रहे थे.