नई दिल्ली, बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने एक बार फिर देश को जलील करने का प्रयास किया है। पद्मश्री और पद्म भूषण से सम्मानित शाह ने कहा है कि देश में धर्म के नाम पर नफरत की दीवारें खड़ी की जा रही हैं और अन्याय के खिलाफ खड़े होने वालों को सजा दी जा रही है। नसीरुद्दीन का यह बयान बुलंदशहर हिंसा पर उनकी प्रतिक्रिया के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें अपने बच्चों की सुरक्षा की चिंता होती है।

नसीरुद्दीन शाह ने गैर-सरकारी संगठन ऐमनेस्टी इंडिया के 2.13 मिनट के वीडियो संदेश में कहा कि जो लोग मानवाधिकारों की बात करते हैं उन्हें जेल में डाला जा रहा है। कलाकारों, अभिनेताओं, विद्वानों, कवियों, बुद्धिजीवियों को दबाया जा रहा है और पत्रकारों को भी चुप कराया जा रहा है।

ऐमनेस्टी इंडिया की ओर से जारी वीडियो में शाह कह रहे हैं, “हमारे देश का संविधान हमें बोलने, सोचने, किसी भी धर्म को मानने और इबादत करने की आजादी देता है, लेकिन अब देश में मजहब के नाम पर नफरतों की दीवार खड़ी की जा रही है। जो लोग इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हैं, उन्हें इसकी सजा दी जाती है।”

वीडियो में नसीरुद्दीन शाह ने दावा किया कि निर्दोषों की हत्या की जा रही है। देश भयानक नफरत और क्रूरता से भरा है। जो इस अन्याय के खिलाफ खड़ा होता है, उन्हें चुप कराने के लिए उनके कार्यालयों में छापे मारे जाते हैं, लाइसेंस रद्द किए जाते हैं और बैंक खाते फ्रीज किए जाते हैं ताकि वे सच ना बोलें। उन्होंने कहा, “हमारा देश कहां जा रहा है? क्या हमने ऐसे देश का सपना देखा था जहां असंतोष की कोई जगह नहीं है, जहां केवल अमीर और शक्तिशाली लोगों को सुना जाता है और जहां गरीबों तथा सबसे कमजोर लोगों को दबाया जाता है? जहां कभी कानून था लेकिन अब बस अंधकार है।’ 

ऐमनेस्टी ने ‘अबकी बार मानवाधिकार’ हैशटैग के तहत दावा किया कि भारत में ‘अभिव्यक्ति की आजादी और मानवाधिकारों की पैरवी करने वालों पर बड़ी कार्रवाई की गई।’

नसीरुद्दीन एमनेस्टी के एम्बेसडर हैं। कुछ दिन पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बेंगलुरु स्थित ऐमनेस्टी इंटरनेशनल के दफ्तर पर छापेमारी मारी की थी।