नई दिल्ली, दिल्ली में ऐसे कई स्थान हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि वहां नकारात्मक शक्तियों का वास है. वहां आम लोग रात में या अकेले जाने में डरते हैं. आइए जानते हैं दिल्ली की उन 10 जगहों के बारे में जिनके बारे में माना जाता है की यहाँ पर आज भी भूतों, आत्माओं या कोई अदृश्य शक्तियो का निवास है.

1. दिल्ली कंटोनमेंट (Delhi Cantonment)

Delhi Cantonment  जिसे कि सामान्यतया Delhi Cant कहा जाता है कि स्थापना ब्रिटिश-इंडियन आर्मी ने कि थी. यह पूरा इलाका एक छोटे से जंगल की तरह दिखाई देता है. यहां चारों तरफ हरे-भरे पेड़ हैं. कहा जाता है कि दिल्ली केंट में सफेद लिबाज पहने एक महिला लोगों से लिफ्ट मांगती है. अगर आप आगे निकल जाते हैं तो यह महिला कार के जितना तेज भाग कर पीछा करती है. बहुत से लोगों ने उसको देखने की पुष्टि की है. हालांकि आज तक किसी इंसान को नुकसान पहुंचाने की कोई खबर नहीं है. लोगों का कहना है शायद किसी महिला यात्री की आत्मा है जिसकी मृत्यु इसी इलाके में हुई है.

2.फिरोज शाह कोटला किला (Feroz Shah Kotla Fort)

सन 1354 में फिरोज शाह तुगलक द्वारा बनवाया गया यह किला आज खंडहर हो चुका है. आसपास की लोगों की मानें तो हर गुरुवार की शाम यहां मोमबत्तियां और अगरबत्ती जलती दिखाई देती हैं. और तो और, अगले दिन किले के कुछ हिस्सों में कटोरे में दूध और कच्चा अनाज भी रखा मिलता है. ऐसा अक्सर होता रहा है, जिसके चलते किले की पहचान अब भूतहा किले के रूप में होने लगी है.

3. खूनी नदी, रोहिणी (Khooni Nadi, Rohini)

रोहिणी के कम शोरगुल वाले इस इलाके में यूं भी कम लोग आते हैं. नदी के आसपास भी कोई नहीं जाता है. वजह है कारण, नदी के किनारे लाशों का मिलना. हत्या, आत्महत्या, दुर्घटना कारण चाहे जो हो, यहां नदी किनारे लाशें मिलनी आम बात हो गई है. यही कारण है कि लोग इसे डरावनी जगहों में शुमार करते हैं. लोगों का मानना है कि जो भी इस नदी के पानी को छूता है उसे नदी निगल जाती है.

4. मालचा महल (Malcha Mahal)

मालचा महल दिल्ली के दक्षिण रिज़ के बीहड़ो में छुपा है. इसका निर्माण आज से 700 साल पहले फ़िरोज़ शाह तुगलक ने करवाया था, जिसका इस्तेमाल वह अपनी शिकारगाह के रूप इस्तमाल करता था. यह महल पिछले कई सदियों से वीरान रहने के कारण खंडहर हो चुका था. इस खंडहर हो चुके महल में 1985 में खुद को अवध घराने की बेगम बताने वाली (जो कि बाद में गलत साबित हुई) विलायत खान अपने दो बच्चों, पांच नौकरो और 12 कुत्तों के साथ रहने आई. इस महल में आने के बाद वह कभी बाहर नहीं निकली. इसी महल में विलायत खान ने 10 सितम्बर 1993 को आत्महत्या कर ली थी. कहते है कि बेगम की रूह आज भी उसी महल में भटकती है.

5. म्यूटिनी हाउस, कश्मीरी गेट (Mutiny House, Kashmiri Gate)

यह स्मारक 1857 में मारे गए सिपाहियों की याद में अंग्रेजों ने बनवाया था. कहा जाता है कि उन सैनिकों की यादें और साए अभी भी इस इमारत के आसपास रहते हैं. 

6. भूली भतियारी का महल, झंडेवालान (Bhuli Bhatiyari ka Mahal)

यह महल किसी ज़माने में तुगलक वंश का शिकारगाह हुआ करता था. इस शिकारगाह की देखरेख अबुल बख्तियारी करता था. उसी बख्तियारी का नाम अपभ्रंश होकर “भूली भटियारी” हो गया. आज इस महल को इसी नाम से जाना जाता है. कहा जाता है कि अंधेरा होने के बाद यहां परिंदा भी पर नहीं मारता. अक्सर सुनाई देने वाली अजीबोगरीब आवाजें यहां माहौल को और डरावना बना देती हैं.

7. संजय वन (Sanjay Van)

दक्षिणी दिल्ली के वसंत कुंज इलाके के पास 10 किमी क्षेत्रफल में फैले इस इलाके में बच्चों की आत्माएं दिखने के दावे किए गए हैं, जो अक्सर खेलते रहते हैं. अंदर से यह वन घना और डरावना भी है.

8. करबला कब्रिस्तान (Karbala Graveyard)

जैसा नाम, वैसा कब्रिस्तान. लोगों का कहना है कि इस कब्रिस्तान अकसर शाम को रोने की आवाजें आती है. ये आवाजें शरीर में सिहरन पैदा कर देती हैं. आसापास के लोग शाम के बाद इस कब्रिस्तान भी तरफ जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते.

9. जमाली-कमाली का मकबरा और मस्जिद, महरौली, (Jamali Kamali Tomb & Mosque)

यह मस्जिद दिल्ली के महरौली में स्थित है. यहां सोलवहीं शताब्दी के सूफी संत जमाली और कमाली की कब्र मौजूद है. इस जगह के बारे में लोगों का विश्वास है कि यहां जिन्न रहते हैं. कई लोगों को इस जगह पर डरावने अनुभव हुए हैं. सूफी संत जमाली लोधी हुकूमत के राज कवि थे. इसके बाद बाबर और उनके बेटे हुमायूं के राज तक जमाली को काफी तवज्जो दी गई. माना जाता है कि जमाली के मकबरे का निर्माण हुमायूं ने कराया था. जमाली कमाली मस्जिद का निर्माण 1528-29 में किया गया था. यह मस्जिद लाल पत्थर और संगमरमर से बनी है. मकबरे में दो संगमरमर की कब्र हैं, एक जमाली की और दूसरी कमाली की. कमाली के बारे में कुछ ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाती. कुछ इतिहासकारों का मानना है कि दोनों सूफी थे और कुछ का मानना है कि दोनों भाई थे, जो अफगानिस्तान से भारत आए थे. वहीं, एक अमेरिकी लेखक का मानना है कि कमाली नौकर था और जमाली का उससे समलैंगिक संबंध थे.

10. खूनी दरवाजा (Khuni Darwaza)

मुस्लिम शासक शेरशाह सूरी द्वारा बनवाये गये इस द्वार को काबुली बाज़ार के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि अफ्गानिस्तान से आने वाले लोग इस द्वार से गुजरते थे. दरअसल, 22 सितम्बर 1857 को बहादुरशाह जफर के आत्मसमर्पण के बाद ब्रिटिश नेता विलियम हडसन द्वारा मुगल वंश के तीन राजकुमारों का कत्ल कर दिया गया था जिसमें बहादुरशाह जफर के बेटे मिर्जा मुगल और खिज्र सुलतान और पोता मिर्जा अबू बख्र शामिल थे. इसलिये इस गेट का नाम खूनी दरवाजा पड़ा. इसके अलावा, ऐसा माना जाता है कि अकबर के बेटे जहाँगीर ने अकबर के नवरत्नों में से एक, अब्दुल रहीम खानखाना के बेटों को इस गेट पर मरवा दिया था और उनके शरीर को सड़ने के लिये लटका दिया था क्योंकि अब्दुल रहीम ने अकबर के उत्तराधिकारी जहाँगीर के खिलाफ बगावत की थी. ऐसा भी कहा जाता है कि औरंगज़ेब ने अपने बड़े भाई दारा शिकोह को राजगद्दी की दौड़ में पिछाड़ दिया था और उसके कटे हुये सिर को इसी गेट पर प्रदर्शनी के रूप में लटका दिया था. ऐसा भी कहा जाता है कि जब 1739 में पारस के राजा नादिर शाह ने दिल्ली को लूटा था और हजारों की संख्या में हिंदुओं का कत्ल कर यहां मीनार बनवा दिया था. स्वतन्त्रता के पश्चात भी 1947 के दंगों में भी खूनी दरवाजे पर काफी रक्तपात हुआ था. पुराना किला स्थित कैंप की ओर जाते हुये कई शर्णार्थियों को यहाँ पर मौत के घाट उतार दिया गया था. हलाँकि वर्ष 2002 में इस गेट पर घटी एक अप्रिय घटना के फलस्वरूप अब इसे पूरी तरह से सील कर जनता के प्रवेश के लिये प्रतिबन्धित कर दिया गया है.