वक्फ संशोधन बिल का मुस्लिम संगठनों से लेकर मुस्लिम नेता तक इसका विरोध कर रहे हैं। जमीयत-उलेमा-ए-हिंद से लेकर AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी इस कानून को लेकर मुस्लिमों में गलतफहमी पैदा कर रहे हैं। वे दुष्प्रचार कर हैं कि इस कानून के जरिए केंद्र सरकार मुस्लिमों की संपत्तियाँ और उनके मस्जिदों-दरगाहों को छीन लेगी। हालाँकि, वे ये नहीं बता रहे हैं कि वक्फ बोर्ड की असीमित शक्तियों ने उसे किस तरह मनमानी करने किए उकसाया है, जो आज सरकार के लिए ही भस्मासुर साबित हो रहा है। वक्फ बोर्ड आज किसी भी संपत्ति को अपनी संपत्ति घोषित कर दे रहा है। तमिलनाडु और कर्नाटक में तो वह गाँव के गाँव को ही अपनी संपत्ति बता रहा है और वहाँ रहने वाले लोगों को खाली करने का नोटिस दे रहा है।

पश्चिम बंगाल वक्फ बोर्ड के अनुसार, राज्य में उसके पास कुल 80,548 संपत्तियाँ है। उत्तर प्रदेश के बाद वक्फ की सबसे अधिक संपत्तियाँ बंगाल में ही हैं। बंगाल वक्फ बोर्ड देश के सबसे धनवान वक्फ बोर्डों में से एक है। बंगाल में कई संपत्तियाँ विवादित हैं, जिनको लेकर दावा किया जाता है कि वो वक्फ संपत्ति हैं। इनमें हाल ही दावा किए गए बंगाल का राजभवन, क्रिकेट स्टेडियम इडेन गार्डेन, फोर्ट विलियम्स आदि प्रमुख हैं। इतना ही नहीं, रॉयल कलकत्ता गोल्फ क्लब यानी RCGC और टॉलीगंज क्लब भी वक्फ की संपत्तियाँ हैं। वक्फ बोर्ड द्वारा विवाद किए जाने के बाद गोल्फ क्लब ने 1 लाख रुपए मासिक देने की सहमति दी थी। वहीं, साल 2013 में छपे कुछ मीडिया हाउस के आलेखों में कहा गया है कि 27 एकड़ में फैले राजभवन का किराया 147 रुपए है। हालाँकि, RCGC और टॉलीगंज क्लब को केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय ने भी वक्फ संपत्ति माना है। मंत्रालय ने बताया है कि  गत 2023-24 वित्तीय वर्ष में आरसीजीसी और टॉलीगंज क्लब की ओर से 18,88,224 रुपया किराया के रूप में दिया गया था।

दरअसल, 10 फरवरी को राज्यसभा के सांसद शमिक भट्टाचार्य की द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण बोर्ड ने इसकी जानकारी दी है। मंत्रालय के अनुसार, बंगाल में वक्फ बोर्ड ने कुल 308 संपत्तियों पर कब्जा किया है। वक्फ की जिन संपत्तियों को लेकर सवाल खड़े किए जाते हैं, उनमें RCGC और टॉलीगंज क्लब भी शामिल हैं। RCGC की स्थापना 1829 में अंग्रेजों ने की थी। यह भारत का सबसे पुराना और ग्रेट ब्रिटेन के बाहर उसका सबसे पहला गोल्फ क्लब है। यह 20 बीघा से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है। RCGC प्रिंस अनवर शाह चौराहे पर बनी टीपू सुल्तान मस्जिद के नाम वक्फ संपत्ति है। इसके किराए को लेकर गोल्फ कोर्स प्रबंधन और वक्फ बोर्ड में विवाद हुआ था। इसके बाद गोल्फ कोर्स प्रबंधन ने कुछ वर्ष पहले एक लाख रुपए मासिक किराया देना मंजूर किया था। इसके अलावा, बैंकशाल कोर्ट के सामने बनी बहुमंजिली ‘शॉ वालिस बिल्डिंग’ को भी वक्फ संपत्ति बताया गया है। इस इमारत का किराया 32,000 रुपए दिया जाता और काफी तूल के बाद इसका वक्फ बोर्ड को छह लाख रुपए मिलता है। हालाँकि, इस किराए से भी वक्फ बोर्ड संतुष्ट नहीं है।

वहीं, पश्चिम बंगाल के AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष इमरान सोलंकी ने 12 मार्च 2025 को कहा कि कोलकाता का इडेन गार्डन वक्फ की संपत्ति है। उन्होंने कहा था कि इडेन गार्डन वक्फ की जमीन पर बनी है। उन्होंने ये भी दावा किया था कि ममता बनर्जी की नेतृत्व वाली बंगाल की टीएमसी सरकार इडेन गार्डेन के लिए किराया भी देती है। इससे पहले भी कई बार इडेन गार्डन को वक्फ की संपत्ति बताते हुए दावा किया जा चुका है। ममता बनर्जी की सरकार में सामूहिक शिक्षा मंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने 16 नवंबर 2024 को जी मीडिया से बात करते हुए दावा किया था कि धर्मतल्ला से लेकर कॉलिन स्ट्रीट तक वक्फ संपत्ति है।

बता दें कि इडेन गार्डन का नाम एक व्यक्ति के नाम पर रखा गया है। यह ठीक वैसा ही है, जैसे कि लंदन में ‘लॉर्ड्स’ का नाम है और लॉर्ड्स स्टेडियम है। इडेन लॉर्ड ऑकलैंड का पारिवारिक नाम है। जब देश आजाद हुआ तो इडेन को भारत सरकार को हस्तांतरित कर दी गई और यह सरकारी संपत्ति बन गई। यह रक्षा मंत्रालय के अधीन आता है। रक्षा मंत्रालय की डायरेक्टर जनरल डिफेंस एस्टेट की की वेबाइट पर भी कहा गया है कि यह क्रिकेट मैदान रक्षा मंत्रालय की भूमि पर स्थित है। बंगाल क्रिकेट बोर्ड ने इडेन गार्डन को साल 1987 में रक्षा मंत्रालय से 5 साल के लिए लीज पर लिया था। इसके साथ साल 1992 में इस समझौते को रिन्यू किया गया। इसके बाद यह समझौता साल 1997 में फिर से रिन्यू हुआ।

इतना ही नहीं, बंगाल के राजभवन भवन को लेकर भी दावा किया जा चुका है। हालाँकि, चौतरफा किरकिरी होने और राजभवन को वक्फ बोर्ड के हवाले के करने गुंजाइश ना के बराबर होते हुए देखकर बाद में बंगाल वक्फ बोर्ड ने इस पर से अपना दावा हटा लिया। बोर्ड ने कहा कि राजभवन उसकी संपत्ति नहीं है। बंगाल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष साहिदुल मुंशी ने नवंबर 2024 में कहा था कि बोर्ड के पास इस बात की कोई तथ्यात्मक जानकारी नहीं है कि बंगाल राजभवन वक्फ संपत्ति है। उन्होंने कहा था कि बंगाल का राजभवन वक्फ संपत्ति के तहत पंजीकृत नहीं है। साहिदुल मुंशी ने कहा था, “हम वक्फ रजिस्टर रखते हैं और जो हमारी संपत्तियाँ हैं उनका हम उसमें जिलेवार नामांकन हैं। बंगाल में वक्फ की करीब 8,000 नामांकित संपत्तियाँ हैं, जबकि कुल संपत्ति करीब 80,000 हैं।”

हालाँकि सितंबर 2013 में बंगाल के 12 इमामों सहित 22 मुस्लिम संगठनों ने ऑल बंगाल इमाम और मुअज्जिन समिति के अध्यक्ष एटीएम रफीकुल हसन ने कहा था, “राज्य भर में 29,000 से अधिक वक्फ संपत्तियाँ हैं। कोलकाता में ही गवर्नर हाउस, राज्य विधानसभा और आकाशवाणी भवन जैसे कई प्रतिष्ठित प्रतिष्ठान वक्फ संपत्ति पर बने हैं।” उस समय ऑल बंगाल माइनॉरिटी यूथ फेडरेशन के महासचिव एमडी कमरुज्जमां ने कहा था कि पुलिस-प्रशासन को अतिक्रमणकारियों से वक्फ संपत्तियों को खाली कराना चाहिए और उन्हें व्यावसायिक उपयोग में लाना चाहिए। पश्चिम बंगाल वक्फ बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष मोहम्मद अब्दुल गनी ने कहा था 356 बीघे में फैले गवर्नर हाउस से वक्फ बोर्ड को प्रति माह केवल 27.25 रुपए किराया मिलता है, जो नाकाफी है।

वहीं, हिंदी अखबार प्रभात खबर ने अपने पोर्टल पर 24 जनवरी 2014 को लिखे एक आलेख में कहा है कि कोलकाता में 27 एकड़ में फैले राजभवन का किराया केवल 147 रुपया है। राजभवन वक्फ की संपत्ति है और अब्दुल मतीन एवं मोहम्मद अयूब इस वक्फ संपत्ति के मोतवल्ली (केयर टेकर) हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 1797 ईस्वी में इस संपत्ति को वक्फ किया गया था। हालाँकि, रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि इस संपत्ति को किसने दान की थी। मोहम्मद अब्दुल गनी ने कहा था, “यह मामला राज्यपाल के निवास स्थान का है। इसलिए हम लोग कोई कानूनी कार्रवाई करने से पहले इस मुद्दे पर राज्य सरकार से बात करेंगे।”

जिस राजभवन को वक्फ संपत्ति बताई जा रही है उसका डिजाइन 1799-1803 में डर्बीशायर के केडलस्टन हॉल की तर्ज पर किया गया था। उस समय मार्क्विस वेलेस्ली गवर्नर जनरल थे। सन 1912 में जब देश की राजधानी दिल्ली में स्थानांतरित हो गई तो इस तीन मंजिला राजभवन का कुल क्षेत्रफल 27 एकड़ है। इसमें आवासीय कमरे दूसरी मंजिल के चारों कोनों में हैं। वहीं, इसका मुख्य सुइट ‘प्रिंस ऑफ वेल्स सुइट’ पहली मंजिल पर है। ग्राउंड फ्लोर के सेंटर क्षेत्र को मार्बल हॉल कहा जाता है। दूसरी मंजिल पर गवर्नर के अपार्टमेंट हैं। इसके रखरखाव का जिम्मा राज्य सरकार के लोक निर्माण विभाग के राजभवन विंग के पास है।