CM योगी ने दिया कब्जे वाली वक्फ संपत्तियों की पहचान का निर्देश, बारांबकी में 812 मिलीं
बहु-प्रतीक्षित वक्फ संशोधन बिल-2025 संसद के दोनों सदनों में बहुमत से पारित हो गया है। इसके साथ ही 5 अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस विधेयक पर अपनी मंजूरी दे दी। मंजूरी के साथ यह विधेयक अब कानून बन गया है और इसका नाम वक्फ (संशोधन) अधिनियम-2025 हो गया है। यह कानून लागू होते ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिले के अधिकारियों को वक्फ बोर्ड द्वारा अवैध रूप से कब्जा की गई सरकारी संपत्तियों की पहचान करने और उन्हें मुक्त कराने का निर्देश दिया है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि वक्फ से मुक्त अवैध जमीनों पर प्रदेश भर के गरीबों के लिए घर और स्कूल-कॉलेज बनाए जाएँगे। सीएम का निर्देश मिलते ही जिले के अधिकारियों ने अवैध संपत्तियों को खंगालना शुरू कर दिया है। बारांबकी में वक्फ बोर्ड के दावा वाले 812 संपत्तियों को मुक्त कराया जाएगा। इन संपत्तियों का उल्लेख सरकारी अभिलेखों में है।
प्रदेश की जिन सार्वजनिक संपत्तियों पर यूपी वक्फ बोर्ड ने अपना दावा ठोका, उनमें लखनऊ का छोटा इमामबाड़ा, बड़ा इमामबाड़ा, बेगम हजरत महल पार्क, शिव मंदिर, ऐशबाग ईदगाह, टीले वाली मस्जिद, राजभवन, बरनारस का यूपी कॉलेज, काशी विश्वनाथ मंदिर, मथुरा का शाही ईदगाह, आगरा का ताजमहल, आगरा का किला, फतेहपुर सीकरी का किला, सँभल का जामा मस्जिद, रामपुर का इमामबाड़ा किला-ए-मुअल्ला, रामपुर का काशबाग इमामबाड़ा, फैजाबाद का बहू बेगम का मकबरा, जौनपुर का अटाला मस्जिद, अयोध्या की अनेक संपत्तियाँ आदि प्रमुख नाम हैं।
उत्तर प्रदेश का शायद ही ऐसा कोई जिला है, जहाँ की संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड ने अपना दावा नहीं ठोका हो। उत्तर प्रदेश में वक्फ बोर्ड ने कुल 57,792 सरकारी संपत्तियों पर दावा किया है। इन संपत्तियों का कुल क्षेत्रफल 28,912 एकड़ है। वहीं, वक्फ द्वारा किया गया कुल दावा 14,000 हेक्टेयर यानी 34,595 एकड़ है। यूपी में सुन्नी वक्फ बोर्ड ने 2,10,239 संपत्तियों और शिया वक्फ बोर्ड ने 15,386 संपत्तियों पर दावा ठोका है।
उत्तर प्रदेश के पांच जिलों में यूपी वक्फ बोर्ड ने बड़ी संख्या में सरकारी संपत्तियों पर ना सिर्फ अपना दावा किया है, बल्कि उन पर कब्जा भी कर रखा है। इन पांचों जिले में से प्रत्येक जिले में वक्फ बोर्ड ने 2,000 से अधिक संपत्तियों पर दावा किया है। हालाँकि, इन जिलों के राजस्व रिकॉर्ड में संपत्तियाँ सरकारी हैं और वे सार्वजनिक उपयोग की श्रेणी में आती हैं। वक्फ संशोधन बिल पर बनी संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की रिपोर्ट में कहा गया है कि यूपी वक्फ बोर्ड ने जिन संपत्तियों पर अपना दावा हैं, उनमें शाहजहाँपुर में 2,589 संपत्तियाँ दर्ज हैं।
इन संपत्तियों में 2,371 सरकारी संपत्तियाँ हैं। रामपुर में वक्फ बोर्ड ने 3,365 संपत्तियों पर दावा किया है, जिनमें से 2,363 सरकारी संपत्ति हैं। इसी तरह अयोध्या में वक्फ बोर्ड ने 3,652 अपनी संपत्ति बताई है। इनमें से 2,116 सार्वजनिक संपत्ति हैं। जौनपुर में 4,167 संपत्तियों पर अपना दावा है, जिनमें से 2,096 सरकारी संपत्ति हैं। वहीं, बरेली में वक्फ बोर्ड द्वारा किए गए 3,499 वक्फ संपत्तियों में से 2,000 सरकारी जमीनों पर बनी हैं।
इन जिलों के अलावा, उत्तर प्रदेश वक्फ बोर्ड ने लखीमपुर खीरी में 1792 सरकारी संपत्तियों पर दावा किया है। उसी तरह बुलंदशहर में 1778, फतेहपुर में 1610, सीतापुर में 1581, आजमगढ़ में 1575, सहारनपुर में 1497, मुरादाबाद में 1471, प्रतापगढ़ में 1331 संपत्तियाँ सरकारी हैं। बनारस में वक्फ बोर्ड ने 406 सरकारी संपत्तियों को अपनी रजिस्टर में दर्ज कर लिया है। ये संपत्तियाँ लगभग 193 एकड़ में फैली हैं।
ये संपत्तियाँ सरकार के विभिन्न विभागों की हैं, जिन पर कब्जा कर लिया गया है। इन पर मस्जिद, मजार, कब्रिस्तान, दरगाह, इमामबाड़ा आदि बना दिए गए हैं। इस जिले में वक्फ बोर्ड ने कुल 1637 संपत्तियों पर दावा किया है। इनमें से 1537 पर सुन्नी वक्फ बोर्ड और 100 पर शिया वक्फ बोर्ड ने दावा किया है। जिन संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड ने दावा किया है, उनमें खेत, खलिहान, मकान, सार्वजनकि जमीन, इमारतें आदि शामिल हैं।
कानपुर में भी सुन्नी वक्फ बोर्ड और शिया वक्फ बोर्ड ने अपनी कुल 1,670 संपत्तियाँ बताई हैं। जिला प्रशासन ने सर्वे किया तो पता चला कि वक्फ बोर्ड ने 548 सरकारी संपत्तियों पर कब्जा रखा है। कानपुर में वक्फ जिन सरकारी संपत्तियों को अपनी बता रहा है, उन जमीनों पर मस्जिद और कब्रिस्तान बने हैं। आगरा, अलीगढ़, गाजीपुर, मेरठ, संभल, अमरोहा, देवरिया, बिजनौर आदि जिलों में भी वक्फ बोर्ड ने हजारों संपत्तियों पर दावा किया है। इनमें से अधिकांश संपत्तियाँ सरकारी हैं या सरकारी जमीनों पर बनी हैं या सरकारी इमारते हैं।
दरअसल, साल 1989 में मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार के एक आदेश के कारण प्रदेश की बंजर और ऊसर जमीनों को भी वक्फ संपत्ति के तौर पर दर्ज कर दिया गया था। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी तो सीएम योगी ने साल 2022 में इस आदेश को राजस्व कानूनों और वक्फ अधिनियम के खिलाफ बताते हुए रद्द कर दिया था।