योगी का हरित महायज्ञ: प्रदेश में 2,280+ वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र का विस्तार
साल 2026 दुनिया भर के लोगों को गर्मी से झुलसा गया। अप्रैल 2026 के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों की सूची में 98 शहर भारत के हैं। ये बेहद चिंता का विषय है। पिछले कुछ सालों से तापमान में 0.5 डिग्री की बढ़ोत्तरी ने सबको चिंता में डाल दिया है। इसके बाद भाजपा सरकार ने इस पर बेहद गंभीरता से कार्रवाई शुरू कर दी है।
जलवायु परिवर्तन और हर साल तापमान में वृद्धि के बीच इस साल के अल नीनो ने खतरे को कई गुना बढा दिया है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि साल 2026 का अल नीनो कम-से-कम पिछले 150 सालों का सबसे ताकतवर अल नीनो साबित हो रहा है। इससे आने वाले महीनों में बहुत ज़्यादा गर्मी, जलवायु से जुड़ी मौतों में बढ़ोतरी और खाने की गंभीर कमी का खतरा बढ़ गया है।
दरअसल, एल नीनो एक ऐसी जलवायु प्रक्रिया है जिसमें प्रशांत महासागर के ऊपर चलने वाली हवाओं और समुद्र की सतह के तापमान में बदलाव होता है। इसका असर दुनिया भर के मौसम पर पड़ता है। खासकर भारत, इंडोनेशिया, श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया सहित पूरे एशिया में मानसून की कमी और सूखे की स्थिति पैदा हो जाती है।
यूरोपीय देशों के भीषण गर्मी की चपेट में आने का मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन और वायुमंडल में बनने वाली हीट डोम (Heat Dome) और ओमेगा ब्लॉक’ (Omega Block) हैं। इसके चलते यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन गया है। इस बार की गर्मी से फ्रांस से लेकर. स्वीट्जरलैंड तक अछूता नहीं रहा और हर तरफ बेचैनी के हालात रहे।
जलवायु परिवर्तन की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश भर में वृक्षारोपण का काम बड़े पैमाने पर जारी है। इसमें सबसे बड़ी भूमिका उत्तर प्रदेश निभा रहा है। इस साल के सबसे गर्म शहरों की सूची में उत्तर प्रदेश के करीब आधा दर्जन शहर शामिल रहे हैं, जहाँ तापमान लगभग 45 डिग्री तक पहुंच गया।
भविष्य के खतरे को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में सघन वृक्षारोपण महाभियान चलाया है। सीएम योगी ने इसे धरती माता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का महायज्ञ कहा है। इस अभियान में एक दिन में अकेले 35 करोड़ पौधरोपण लगाए गए। सरकार इस बात का भी विशेष ध्यान रख रही है कि लगाए जाने वाले पौधों में 30 प्रतिशत से अधिक फलदार वृक्ष हों। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लोगों को फल भी मिल सकेंगे।
’एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत सीएम योगी ने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर नीम, पीपल, बरगद जैसे पौधे रोपकर इसका शुभारंभ किया। ये वृक्ष कार्बनडाइऑक्साइड को अवशोषित करने वाले प्रमुख कारक माने जाते हैं। इसके साथ ये पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नीम, पीपल, बरगद को हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है। इसके साथ ही इन वृक्षों के औषधिय गुण भी हैं, जिनका इस्तेमाल आयुर्वेद में किया जाता है। हिंदू धर्म में बरगद और पीपल को तो ब्रह्मा, विष्णु और शिव का निवास कहा गया है। जैन धर्म में मान्यता है कि तीर्थंकर ऋषभदेव ने अक्षय वट के नीचे तपस्या की थी। वहीं, पीपल के नीचे भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया था।
नाथ पंथ के पीठाधीश्वर के रूप में योगी वृक्षों और प्रकृति के महत्व को बखूबी समझते हैं। नाथ पंथ में वृक्षों को अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व का माना जाता है। इन्हें केवल पर्यावरण का हिस्सा नहीं, बल्कि ईश्वर का स्वरूप, तपस्या का आधार और ऊर्जा के केंद्र के रूप में देखा जाता है। नाथ पंथ के योगी, खासकर हठयोगी प्राय: झाड़ियों और वृक्षों के नीचे साधना करते हैं।
इस तरह एक संन्यासी परंपरा से आने वाले मुख्यमंत्री योगी ने समय के अनुरूप विकास के साथ हिंदू धर्म की मान्यताओं को भी जीवंत रखने का काम जारी रखा है, जो आज के बदलते हालात में बेहद जरूरी भी हैं। भारत राज्य वन रिपोर्ट 2023 के अनुसार, उत्तर प्रदेश के वन आवरण (Forest Cover) में 559.19 वर्ग किलोमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
साल 2017 में सीएम बनने के बाद योगी राज में यूपी के इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़े पैमाने पर विस्तार हुआ। एक्सप्रेसवे, हाईवे के साथ सड़कों का जाल बिछा। नए-नए उद्योग लगे हैं। शहरीकरण का विस्तार हुआ। इस भौतिक विकास के साथ अब योगी सरकार पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसका असर भी दिखा है। राज्य सरकार ने पिछले 9 वर्षों में 242 करोड़ से अधिक पेड़ लगवाए हैं।
हालाँकि, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस वृक्षारोपण अभियान पर तंज कसा है और कहा है कि भाजपा के लिए ‘पौधारोपण’ दरअसल ‘भ्रष्टारोपण’ का कार्यक्रम है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पौधारोपण का कार्यक्रम भाजपा के लिए 35 करोड़ पौधे लगाने का नहीं, बल्कि प्रत्येक पौधे से कम से कम 10 रुपये मतलब कुल मिलाकर 350 करोड़ कमाने की गुप्त योजना है।
अखिलेश यादव भले ही कुछ भी दावा करें, लेकिन हकीकत तो हकीकत है। साल 2015 की ‘भारत वन स्थिति रिपोर्ट’ (ISFR) के अनुसार, राज्य में कुल हरित आवरण (Forest and Tree Cover) लगभग 9.01% था। आज यूपी में कुल हरित आवरण (वन और वृक्ष आवरण) बढ़कर अब 9.96% हो गया है। यानी लगभग एक प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अगर क्षेत्रफल के हिसाब से देखें तो करीब 2,280 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र में बढ़ोत्तरी हुई है।