उइगुर मुस्लिम चरमपंथ से निपटने के लिए चीन दोबारा लिखेगा कुरान, पाक पीएम हैं अनजान
चीन ने उइगर मुस्लिम विद्रोह को पूरी तरह कुचलने के लिए एक कठोर फैसला लेते हुए कुरान सहित अन्य धार्मिक ग्रंथों को अपने हिसाब से लिखने की घोषणा की है. चीन के शिनजियांग प्रांत में में लगातार मुस्लिमों के खिलाफ चीन के कार्रवाईयों की खबरें सामने आती रहती हैं. कई मुसलमानों को उनके परिवार से दूर डिटेंशन कैंपों में भेज दिया जाता है. ‘काउंसिल ऑफ फॉरेन रिलेशंस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से भागने में कामयाब रहे कुछ मुस्लिमों का कहना है कि उन्हें जबरन इस्लाम का त्याग करने के लिए मजबूर किया गया और चीन की सत्तारूढ़ पार्टी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति वफादार रहने की प्रतिज्ञा दिलवाई गई.
अब चीन ने एक और निर्णय लिया जिसमें वह कुरान, बाइबल सहित उन धर्म ग्रंथों को अपने हिसाब से लिखेगा जो की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के विश्वासों के खिलाफ जाती हो. पार्टी के एक अधिकारी ने बताया कि उनमें या तो बदलाव किया जाएगा या फिर उनका फिर से अनुवाद करवाया जाएगा. पश्चिमी देश अक्सर चीन की 10 लाख मुस्लिमों को शिनजियांग प्रांत में कैद में रखने और उन्हें तरह-तरह से प्रताड़ित करने का आरोप लगाते रहते हैं. शुरुआत में चीन इन कैंपों के होने की बात को ही खारिज करता रहा लेकिन बाद में उसने इन्हें धार्मिक अतिवाद और आतंकवाद से लड़ने के लिए बनाए गए प्रशिक्षण केंद्र का नाम दे दिया.
ब्रिटेन ने यूएन में दिए अपने बयान में साफ-साफ उइगर समुदाय को टारगेट करने के लिए बनाए गए सामूहिक हिरासत केंद्र, सांस्कृतिक और धार्मिक क्रियाकलापों को रोकने और उन पर कड़ी निगरानी की रिपोर्ट्स को लेकर चिंता जताई थी. इसके अलावा, अमेरिका ने उइगर और अन्य अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के आरोप में चीन की 28 सरकारी व गैरसरकारी संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाया हुआ है.
वहीं, अब देखना है कि पाकिस्तान इस मसले पर चुप रहता या इसे इस्लाम पर प्रहार मानकर चीन के साथ इस मसले पर बात करेगा. दरअसल, पाकिस्तान के पीएम इमरान खान इस मसले पर अनजान बनते हुए उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है. पूर्व क्रिकेटर शाहिद आफरीदी चीन में उइगर मुसलमानों को लेकर चिंता व्यक्त कर चुके हैं और उन्होंने सीधे देश के प्रधानमंत्री इमरान खान से मामले को लेकर आग्रह किया था. हालांकि चीन विदेश मंत्रालय ने उनको जवाबा देते हुए लिखा कि वह दुष्प्रचार के प्रभाव में न आएं और खुद आकर स्थितियों को देखें.
इन सब के बावजूद पाकिस्तान इन मामलों को लेकर चीन के समक्ष अपनी बात रखेगा, ऐसा मुश्किल नजर आ रहा है. क्योंकि चीन पर पाकिस्तान की निर्भरता किसी से छिपी नहीं है. और इसीलिए इमरान खान इन मुद्दों से लगातार जानबूझकर अनजान बने हुए हैं.