तुर्की: कब्जा कर चर्च से मस्जिद बनाए गए हगिया सोफिया में नमाज के दौरान ईसाई प्रतीकों को ढंकने का फरमान
इस्तानबुल. हागिया सोफिया (Hagia Sophia) म्यूजियम को नमाज़ पढ़ने के लिए खोलने के मामले में तुर्की (Turkey) एक बार फिर अपनी बातों से पलटता नज़र आ रहा है. हाल ही में तुर्की की एक अदालत ने इसमें नमाज़ पढ़ने की इजाजत दे दी थी. एर्दोगन सरकार (President Tayyip Erdogan) ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा है कि हागिया सोफिया के एक हिस्से को मस्जिद की तरह इस्तेमाल किया जाएगा. इस सफाई में स्पष्ट कहा गया था कि इमारत में मौजूद ईसाई प्रतीकों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी. हालांकि अब सरकार के प्रवक्ता इब्राहिम कालिन ने कहा है कि हागिया सोफ़िया में जब मुसलमान नमाज़ अदा करेंगे तो ईसाई धर्म से जुड़े प्रतीकों को ढक दिया जाएगा.
पिछले हफ़्ते प्रशासन ने कहा था कि अगले शुक्रवार को जब नमाज़ का आयोजन किया जाएगा तो ईसाई धर्म से जुड़े प्रतीकों को दिखने नहीं दिया जाएगा. इससे पहले हागिया सोफ़िया को राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने म्यूज़ियम से मस्जिद में बदलने का फ़ैसला किया था. इससे पहले तुर्की सरकार कह रही थी कि सिर्फ म्यूजियम को शिफ्ट किया जाएगा और टूरिस्ट की एंट्री बंद नहीं की जाएगी. अब एर्दोगन के इस फ़ैसले की दुनिया भर में आलोचना हो रही है और कहा जा रहा है कि कमाल अतातुर्क ने जिस सेक्युलर तुर्की की बुनियाद रखी थी उससे एर्दोगन इस्लामिक तुर्की बनाने में लगे हुए हैं. इससे पहले तुर्की सरकार ने कहा था कि हागिया सोफिया में बनी ‘वर्जिन मैरी’ आइकॉनोग्राफी और अन्य ईसाई पेंटिंग्स और स्थापत्य कला के साथ किसी तरह की कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी. जो जैसा है वैसे ही रहेगा और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की ही रहेगी. कोर्ट के फैसले में भी इन तस्वीरों और मोजेक को तुर्की के इतिहास का हिस्सा बताया गया है.
नमाजियों की निगाह में आ रहे हैं ईसाई प्रतीक
एलटीवी को दिए इंटरव्यू में कालिन ने कहा कि कुछ मोज़ाइक ऑफ मैरी और गैब्रिएल क़िबला की ओर हैं और नमाज़ के दौरान मुसलमान इस तरफ़ ही मुंह रखते हैं. ऐसे में नमाज़ के दौरान इन्हें ढंकना ज़रूरी है. कालिन ने कहा कि मोज़ाइक ऑफ जीसस और अन्य ईसाई प्रतीक नमाज़ियों के लिए बाधा नहीं बनेंगे क्योंकि ये क़िबला की तरफ़ नहीं हैं. हालांकि, उन्होंने ये नहीं कहा कि जो क़िबला के साइड में नहीं हैं वो हमेशा के लिए हागिया सोफ़िया में रहेंगे या नहीं. एर्दोगन सरकार ने कोर्ट के ज़रिए 1934 के उस फ़ैसले को बदलवा दिया था जिसके तहत इसे मस्जिद से म्यूज़ियम बनाया गया. हागिया सोफ़िया सबसे पहले एक चर्च था लेकिन ऑटोमन साम्राज्य के वक़्त में इसे मस्जिद में तब्दील कर दिया गया था. रविवार को एर्दोगन हागिया सोफ़िया गए थे और उन्होंने नमाज़ की तैयारी की समीक्षा की थी.