उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के तिकुनिया कांड से कुछ दिन पहले केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी ने किसानों को धमकी देते हुए कहा था:
“जान लो मैं कौन हूँ। ऐसे लोगों को कहना चाहता हूं कि सुधर जाओ…नहीं तो सामना करो आकर, हम आपको सुधार देंगे, दो मिनट लगेगा केवल। मैं केवल मंत्री नहीं हूं, या सांसद-विधायक नहीं हूं। जो विधायक और सांसद बनने से पहले मेरे विषय में जानते होंगे उनको यह भी मालूम होगा कि मैं किसी चुनौती से भागता नहीं हूं और जिस दिन मैंने उस चुनौती को स्वीकार करके काम कर लिया, उस दिन पलिया नहीं, लखीमपुर तक छोड़ना पड़ जाएगा, यह याद रखना।”
इसी साल जुलाई में केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लखीमपुर से सांसद अजय मिश्र टेनी को गृह राज्यमंत्री बनाया था। स्थानीय लोगों में टेनी महाराज के नाम से प्रचलित अजय मिश्र का दबदबा इलाके में मंत्री बनने से पहले से ही था।
अजय मिश्र टेनी (साभार: दैनिक भास्कर)
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले के नेपाल सीमा से बिलकुल सटे बनवीरपुर गांव का रहने वाला टेनी परिवार के खिलाफ इलाके का कोई भी व्यक्ति मुँह खोलने को तैयार नहीं होता। अजय मिश्र टेनी का परिवार यहां गल्ले (अनाज की खरीद-बिक्री) के काम से जुड़ा रहा है और राइस मिल भी चलाता है। परिवार के पास गांव में काफी जमीन है, जिस पर खेती की जाती है। यहां लोग उनके बारे में बहुत सावधानी से और सोच-समझकर बोलते हैं।
टेनी की आपराधिक पृष्ठभूमि
अगर टेनी की राजनीति में आने से पहले की पृष्ठभूमि देखें तो वह एक हिस्ट्रीशीटर की निकलती है। टेनी पर तिकुनिया कोतवाली में कई मुकदमे दर्ज थे।
दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय पत्रकार भी टेनी के पुराने इतिहास के बारे में चर्चा करने से काँप जाते हैं। एक स्थानीय पत्रकार कहते हैं, “आप पूरा क्षेत्र घूम लीजिए कोई भी टेनी के पुराने रिकॉर्ड के बारे में बात नहीं करेगा। हम भी नहीं करेंगे। हम जानते हैं कि अगर हम उनका नाम लेंगे तो क्या अंजाम होगा।”
तिकुनिया कांड के बाद टेनी के आपराधिक इतिहास पर सवाल उठा। इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा था, “स्थानीय पुलिस ने मेरी हिस्ट्रीशीट खोली थी, क्योंकि मैं जिले में कई सामाजिक मुद्दों पर काम कर रहा था। मैंने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी और अदालत के आदेश पर DM-SP को मेरी हिस्ट्रीशीट बंद करनी पड़ी।’ हाईकोर्ट के आदेश पर साल 1996 में अजय मिश्र टेनी की हिस्ट्रीशीट बंद कर दी गई थी।
टेनी का खौफ का साम्राज्य
तिकुनिया, बनवीरपुर और आसपास के इलाके में लोग दबी जुबान और सहमी आवाज में अजय मिश्र टेनी के खौफ के किस्से सुनाते हैं। एक स्थानीय सिख ने बताया कि करीब दो दशक पहले टेनी ने दो सिखों को नंगा करके पीटा था और इसी अवस्था में गांव भेजा था।
दो दशक पूर्व टेनी पर तस्करी का भी आरोप लगा था। (साभार: दैनिक भास्कर)
स्थानीय पत्रकारों और कई लोगों ने ये बताया कि टेनी का जितना कारोबार सीमा के इस तरफ है, उससे कहीं ज्यादा दूसरी तरफ है। दबी जबान में लोग यहां होने वाली तस्करी का हवाला देते हुए टेनी का नाम लेते हैं। टेनी पर दो पूर्व तस्करी का आरोप लगा था, लेकिन मामला दब गया।
बहुचर्चित प्रभात गुप्ता हत्याकांड
साल 2000 में टेनी भाजपा की राजनीति में इलाके में अपनी जगह बना रहे थे। वहीं, लखनऊ में छात्र राजनीति में सक्रिय और समाजवादी युवजन सभा से जुड़े प्रभात गुप्ता ने जब स्थानीय राजनीति में कदम रखा तो टेनी को नागवार गुजरा। दोनों के बीच साल 2000 के जिला पंचायत चुनाव के दौरान विवाद हुआ। प्रभात गुप्ता के परिजनों का आरोप है कि इसी विवाद के बाद टेनी ने गोली मारकर प्रभात गुप्ता की हत्या करवा दी।
प्रभात के पिता ने तिकुनिया थाने में तहरीर देकर टेनी को अपने बेटे की हत्या का मुख्य आरोपी बनाया। हालाँकि टेनी को पुलिस ने कभी गिरफ्तार नहीं किया। प्रभात गुप्ता हत्याकांड इतना चर्चित हुआ था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्य सचिव योगेंद्र नारायण को पत्र लिखकर कार्रवाई करने को कहा था, लेकिन टेनी के दबदबा के प्रधानमंत्री का पत्र भी कागज का टुकड़ा साबित हुआ।
इसके बाद प्रभात के परिजन हाईकोर्ट पहुंचकर टेनी की गिरफ्तारी का आदेश कराया। इसके बाद टेनी ने 25 जून 2001 को अदालत में आत्मसमर्पण किया। यहां से तबीयत खराब होने का हवाला देकर उन्हें जिला अस्पताल भेज दिया गया और उसके अगले दिन उन्हें जमानत दे दी गई।
समाजवादी युवजन सभा से जुड़े प्रभात गुप्ता (साभार: दैनिक भास्कर)
प्रभात गुप्ता हत्याकांड के जांच अधिकारी रहे आरपी तिवारी ने अभियोजन रोजनामचे के आखिरी पन्ने पर अजय मिश्र के बारे में लिखा है, “अजय मिश्र उर्फ टेनी भाजपा पार्टी का महामंत्री है तथा क्षेत्रीय विधायक एवं उत्तर प्रदेश सरकार में सहकारिता मंत्री श्री रामकुमार वर्मा का खास व्यक्ति एवं इलाके का दबंग होने के कारण इसके आतंक एवं भय से क्षेत्र का कोई भी व्यक्ति सत्य बात कहने की हिम्मत नहीं कर रहा है। विश्वस्त सूत्र सूचनानुसार यह नेपाल क्षेत्र पास होने के कारण तस्करी के कार्यों में भी लिप्त है, जिससे इसकी आर्थिक स्थिति भी बहुत अच्छी है।”
स्थानीय अदालत ने साल 2004 में इस हत्याकांड में टेनी समेत सभी चारों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया था। जिस जज ने उन्हें दोषमुक्त किया था वो बरी करने के अगले ही दिन रिटायर हो गए थे। प्रभात गुप्ता के परिवार ने इसे इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में चुनौती दी है, जहां ये मामला लंबित है।
इसके अलावा भी अजय मिश्र पर कई मुकदमे दर्ज हैं। अजय मिश्र के खिलाफ 2005 में घर में घुसकर मारपीट और दंगा-फसाद का मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद 2007 में भी अजय मिश्र के खिलाफ घर में घुसकर मारपीट का एक और मुकदमा दर्ज हुआ।
टेनी का राजनीतिक सफर
अजय मिश्र टेनी इस समय केंद्र सरकार का ब्राह्मण चेहरा हैं। उन्होंने बीते 9 सालों में विधायक से शुरुआत करके केंद्रीय मंत्री तक का सफर तय किया है। राजनीति में इतनी जल्दी इतनी बड़ी कामयाबी कम ही लोगों को मिलती है।
61 वर्षीय अजय मिश्र 90 के दशक में ही स्थानीय राजनीति में सक्रिय हो गए थे। भाजपा की जिला इकाई में कई पदों पर रहे टेनी को कल्याण सिंह सरकार के दौरान जिला सहकारी बैंक का उपाध्यक्ष भी बनाया गया था। स्थानीय पत्रकारों के मुताबिक उस दौर में टेनी की छवि एक दबंग व्यक्ति की थी। टेनी को राजनीति में पहली कामयाबी साल 2005 में जिला पंचायत चुनाव में मिली जब वो खीरी जिला पंचायत के सदस्य चुने गए।
इसके बाद उन्होंने BJP की टिकट पर साल 2009 का लोकसभा चुनाव लड़े, जिसमें वो चौथे नंबर पर रहे। हालांकि तीन साल बाद ही 2012 में वो BJP की टिकट पर निघासन विधानसभा सीट से जीते। इसके बाद पार्टी ने उन्हें विधायकी से हटाकर 2014 का लोकसभा चुनाव खीरी सीट से लड़वाया और तब से ही वो खीरी से सांसद हैं। अभी तीन महीने पहले जुलाई में उन्हें केंद्रीय मंत्री बनाया गया है।