नई दिल्ली, नागरिकता संशोधन कानून को लेकर बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने कहा है कि हम धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करते हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को भारतीय से शादी करने पर यहां की नागरिकता मिली. क्या किसी ने उनका धर्म पूछा. ये कानून इतना साफ है, लेकिन विवाद को पैदा किया गया. कई लोगों की मौत हुई. 

उन्होंने कहा कि भारत में 4 तरीके से नागरिकता मिलती है. जन्म, नैचुरलाइजेशन या देशीकरण, जो शरण लेने चाहते हैं और अब नागरिकता संशोधन कानून. उन्होंने कहा कि इसमें तीन पड़ोसी देश के लोगों को नागरिकता मिलेगी. ये नागरिकता लेने का कानून नहीं है. कोई भी मुस्लिम भारत की नागरिकता ले सकता है, लेकिन इसके लिए कुछ मानदंडों को पूरा करने की जरूरत होती है.

राम माधव ने कहा कि साल 1972 में युगांडा में तानाशाह आदि अमीन का राज था. उसने सभी बाहरी मूल के लोगों को देश से बाहर दिया. उनमें से ज्यादातर गुजराती थे. कुछ लोग लंदन चले गए और फिर भारत आ गए. इंदिरा गांधी ने उस वक्त उनकी सहायता की. किसी ने कुछ नहीं कहा. भारत में इस्लाम धर्म का अलग-अलग 72 समुदाय रहता है. पाकिस्तान जब इस्लामिक रिपब्लिक बना तो अल्पसंख्यकों पर अत्याचार होने लगा.

राम माधव ने कहा कि मुजीबुर्रहमान एक धर्मनिरपेक्ष देश चाहते थे लेकिन उनकी मौत के बाद बांग्लादेश इस्लामिक देश में बदल गया. नागरिकता कानून अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं है. बांग्लादेश के मौजूदा हालात अल्पसंख्यकों के लिए ठीक नहीं हैं. एनआरसी पूरी तरह से सीएए से अलग है. पहला एनआरसी पहली जनगणना से सामने आएगा. एनपीआर की शुरुआत यूपीए सरकार ने 2010 में की थी.