सेना में 3 साल के लिए शामिल हो सकेंगे आम नागरिक, विशेषज्ञों ने बताया 'राष्ट्रीय सुरक्षा' के लिए खतरा
नई दिल्ली. सेना में शामिल होकर देश की सेवा करने की चाहत रखने वाले आम नागरिकों के लिए खुशखबरी है। जल्द ही भारतीय सेना नागरिकों को तीन साल के लिए सेना में शामिल होने का मौका दे सकती है। न्यूज एजेंसी एएनआई ने बुधवार को सेना के सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी। इसके लिए सेना ‘टूर ऑफ ड्यूटी’ के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। अगर सबकुछ सही रहा तो जल्द ही इसका ऐलान किया जा सकता है। प्रस्ताव के तहत टूर ऑफ ड्यूटी के तहत चयनित होने वाले उम्मीदवार को तीन साल तक सेना में सर्विस करनी होगी। प्रस्ताव के बारे में अधिक जानकारी आना अभी बाकी है।
सेना के प्रवक्ता ने इस प्रस्ताव की पुष्टि की है। इस योजना के तहत सेना देश के प्रतिभाशाली युवाओं को आकर्षित करना चाहती है। इस योजना के जरिए वे युवा भी सेना में शामिल हो सकेंगे, जो किसी कारण पहले ज्वाइन नहीं कर पाए थे। भारतीय सेना में अभी अच्छे अधिकारियों की काफी कमी है। सेना इस योजना के तहत इस कमी को पूरा करना चाहती है।
मौजूदा समय शार्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) के जरिए सबसे कम 10 साल के लिए युवाओं को सेना में भर्ती होने का मौका दिया जाता है। पहले इसके जरिए भर्ती होने वाले युवाओं का कार्यकाल 5 साल के लिए होता था, जिसे बाद में 10 साल कर दिया गया।
सेना इस बात पर भी विचार कर रही है कि अर्धसैनिक बलों के जवानों को भी कुछ समय के लिए सेना में काम करने का मौका दिया जाए। सेना के एक सूत्र ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि भारतीय सेना ‘इनवर्स इंडक्शन मॉडल’ नाम के एक प्रस्ताव पर विचार कर रही है, जिसके तहत केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों को सेना में कुछ समय के लिए काम करने का मौका दिया जा सकता है।
वहीं, आम नागरिकों को तीन साल के लिए शामिल करने के सेना के प्रस्ताव (tour for duty) पर सैन्य एवं रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों ने नपीतुली प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए तथा ‘शानदार दिखने वाले’ विचार को क्रियान्वित करने से पहले पर्याप्त सतर्कता और सावधानी बरती जानी चाहिए क्योंकि इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जटिलताएं हो सकती हैं। कई पूर्व सैन्य कमांडरों ने प्रस्ताव का स्वागत किया जबकि कई अन्य ने इसमें जोखिमों की बात करते हुए कहा कि यह ऐसे समय सही विचार नहीं है जब देश चीन और पाकिस्तान से लगती सीमाओं पर जटिल सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है।
सेना के एक अन्य पूर्व जनरल ने कहा, ‘क्या भारत में राष्ट्रवाद की कमी है या हम सशस्त्र बलों में सेवा कर एक पीछे के दरवाजे से राष्ट्रवादी और देशभक्त हो रहे हैं। मैं इस विचार से सहमत नहीं हूं।’ प्रस्ताव के अनुसार नई योजना के तहत भर्ती होने वाले लोग महत्वपूर्ण अग्रिम प्रतिष्ठानों में लड़ाकू भूमिका वाले कर्मियों के रूप में तैनात किए जाने के योग्य होंगे और उनकी भूमिकाओं पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ डॉ. लक्ष्मण कुमार बेहेड़ा ने कहा कि प्रस्तावित योजना के तहत भर्ती किए जाने वालों को अग्रिम प्रतिष्ठानों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और इस बारे में पर्याप्त सावधानी बरती जानी चाहिए कि वे महत्वपूर्ण सुरक्षा विवरण तक पहुंच न बना पाएं।