बेंगलुरु से दिल्ली तक सुलगाना चाहता था SDPI, इस्लामी आतंकियों से गठजोड़ का है आरोप
बेंगलुरु, मंगलवार की रात हुई बेंगलुरु हिंसा के 30 घंटे बाद सामने आ रहा है कि 4,000 लोगों की भीड़ ने कथित तौर पर कट्टरपंथी सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के समर्थन से बेंगलुरु के एक पुलिस स्टेशन और स्थानीय कांग्रेस विधायक के घर पर लूटपाट और आगजनी की घटना को अंजाम दिया। शुरुआती तौर पर सामने आया है कि भारत के टेक सिटी की राजनीति को प्रभावित करने वाले कई मुद्दे सामने आ रहे हैं जिनसे इस तरह की हिंसा भड़कती है। सांप्रदायिक तर्ज पर होने वाली राजनीति, मुस्लिम वोटों की लड़ाई, अत्यधिक राजनीतिक और हतोत्साहित पुलिस फोर्स कुछ प्रमुख मुद्दे हैं जो इस तरह से लोगों को भड़काते हैं।
इन सबके बीच सबसे महत्वपूर्ण है वह संगठन, जिसपर आरोप है कि बेंगलुरु हिंसा के पीछे उसका हाथ था। सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) पर आरोप है कि जिन लोगों ने हिंसा भड़काई, उनके पीछे उसका हाथ था। मामले में बेंगलुरु पुलिस ने एक स्थानीय एसडीपीआई नेता मुजम्मिल पाशा को भी गिरफ्तार किया है। आरोपी पाशा पहले सगायपुरा वार्ड से बीबीएमपी (ब्रुहत बेंगलुरु महानगर पालिके) का चुनाव भी लड़ चुका है। हालांकि पाशा की गिरफ्तारी को लेकर एसडीपीआई का कहना है कि पुलिस ने अपनी नाकामी छिपाने के लिए पाशा को अरेस्ट किया है।
सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया यानी एसडीपीआई इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का राजनीतिक संगठन है। यह पीएफआई वही संगठन है, जिसपर सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में हुए दंगों के पीछे होने का खुलासा हुआ था। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 23 फरवरी से 26 फरवरी के बीच हुए दंगों में दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में जो प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पेश की था, उसमें भी इस बात का जिक्र था कि दंगे में पीएफआई का भी हाथ था।
ईडी ने पीएफआई पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस भी दर्ज किया था। यह भी सामने आया था कि देशभर में हुए सीएए/एनआरसी विरोधी प्रदर्शनों के पीछे भी पीएफआई का हाथ था। पीएफआई पर विभिन्न इस्लामी आतंकवादी समूहों के साथ गठजोड़ का भी आरोप है। केरल के सीएम पिनरई विजयन ने उस समय आरोप लगाया था कि एसडीपीआई सीएए विरोधी प्रदर्शन के बहाने लोगों को बांट रही है। देश के कई हिस्सों में, खासकर उत्तर प्रदेश में पीएफआई और एसडीपीआई से जुड़े लोग लगातार विवादों में रहते हैं। इनपर अक्सर सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट तथा भड़काऊ भाषण देकर लोगों के बीच सांप्रदायित सामन्जस्य खराब करने का आरोप लगता रहता है।