सऊदी में महिलाएं अब अकेले जा सकेंगी रेस्तरां, लेकिन नहीं कर सकती गैर-मुस्लिम से निकाह
नई दिल्ली, सऊदी अरब की सरकार ने महिलाओं की आजादी में थोड़ी सी ढील देते हुए उन्हें रेस्तरां अकेले जाने की अनुमति दी है। सऊदी में कानूनी तौर पर किसी महिला को अकेले रेस्तरां में प्रवेश करने पर प्रतिबंध था, जबकि किसी पुरुष रिश्तेदार के साथ ही वह रेस्तरां में प्रवेश कर सकती थी। इससे पहले रेस्तरां में लिंग के आधार पर दो प्रवेश द्वार अनिवार्य रूप से होते थे। साथ ही, सऊदी महिलाओं को हाल ही में ड्राइव करने की भी अनुमति मिली है। इससे पहले, एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए उन्हें अपने परिवार के मर्दों के रहम के भरोसे रहना पड़ता था।
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने विजन 2030 दिया है जिसमें महिलाओं की आजादी को धीरे-धीरे बहाल किया जाना है। 12 दिसंबर, 2015 में पहली बार सऊदी महिलाओं ने मतदान के अधिकार का प्रयोग किया था। इसके अलावा नगर परिषद के इस चुनाव में 978 महिलाएं उम्मीदवार भी बनीं।
सऊदी में वर्ष 1979 में रुढिवादी ताकतों के उभार के साथ गार्डियनशिप सिस्टम के नियम को सख्ती से लागू करते हुए सख्त इस्लामिक कानून थोपे गए। इस कानून के अनुसार, महिला अपने पुरुष अभिभावक की अनुमति के बिना जीवन का कोई काम नहीं कर सकती थीं। हालांकि कई पाबंदियों को हटा लिया गया है। महिलाओं के ये अभिभावक पिता, पति के अलावा भाई या बेटे हो सकते हैं। हालांकि, इन पाबंदियों के बावजूद वहां 15 साल तक की लड़कियों के लिए शिक्षा अनिवार्य है। स्नातक की उपाधि लेने वालों में पुरुषों के मुक़ाबले महिलाओं की संख्या ज़्यादा है।
महिलाओं पर लागू कुछ सख्त पाबंदियां –
- सऊदी की महिलाएं अपने परिवार के पुरूष अभिभावक की अनुमति के बिना ना शादी कर सकती हैं और ना ही तलाक ले या दे सकती हैं।
- वे अपने करीबी पुरूष रिश्तेदारों से बाहर में ज्यादा घुलमिल नहीं सकती। अगर ऐसा करती हुई पकड़ी जाती हैं तो उन्हें जेल हो जाती है।
- सऊदी महिलाएं बाहर रेस्तरां में खाना नहीं खा सकती थीं, क्योंकि वहां के रेस्तरां में अलग से फैमिली सेक्शन नहीं होता था। अब इसे हटा लिया गया है।
- महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर अबाया (बुर्का) पहनना आवश्यक है।
- महिलाएं किसी गैर-मुस्लिम पुरूष से विवाह नहीं कर सकतीं। ऐसा करना सऊदी अरब में घोर अपराध माना जाता है। यहां तक कि एक सुन्नी महिला एक शिया पुरूष से शादी नहीं कर सकती है।
- सऊदी की महिलाएं कुछ खास प्रकार के व्यवसाय खुद नहीं कर सकती हैं। इसके लिए दो पुरूष उनकी परीक्षा लेते हैं कि वे लोन लेने या लाइसेंस लेने के काबिल हैं या नहीं।
- तलाक के मामले में सऊदी की महिलाएं 7 साल के ऊपर के अपने लड़के और साल के ऊपर की अपनी लड़की की कस्टडी के लिए अधिकार नहीं जमा सकती है।
- उन्हें कोर्ट में निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलती है। उनके कानून के हिसाब से दो महिलाओं के बराबर एक पुरूष होता है। सऊदी अरब में एक महिला की कानूनी स्थिति एक अल्पसंख्यक के बराबर होती है। इस कारण उसकी खुद की जिंदगी उनके वश में नहीं होती है।
- सऊदी महिलाएं बराबर की विरासत की हकदार नहीं होती हैं। शरिया विरासत कानून के तहत बेटियों को बेटों को मिलने वाले विरासत का आधा दिया जाता है।