नई दिल्ली, समझौता एक्सप्रेस विस्फोट मामले में सभी आरोपियों को बरी किये जाने के बाद पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायुक्त अजय बिसारिया को तलब करके अपना विरोध दर्ज कराया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बताया कि पाकिस्तान के कार्यवाहक विदेश सचिव ने भारतीय उच्चायुक्त को तलब किया और वर्ष 2007 के समझौता एक्सप्रेस विस्फोट मामले के स्वामी असीमानंद सहित सभी चार आरोपियों को हरियाणा में पंचकूला की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत से बरी किये जाने पर अपना विरोध दर्ज कराया।

कार्यवाहक विदेश सचिव ने कहा, ”पाकिस्तान ने इस जघन्य आतंकवादी कृत्य, जिसमें 44 निर्दोष पाकिस्तानियों को जान गंवानी पड़ी थी, के दोषियों को छोड़ने के भारत के केंद्रित प्रयासों का मुद्दा लगातार उठाया है।” बयान के मुताबिक, यह मुद्दा 2016 में हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन के इतर सहित कई मौकों पर उठाया गया। मामले में प्रगति का अभाव और अन्य मामलों में आरोपियों को बरी किए जाने के मुद्दों को लेकर भारत के सामने औपचारिक विरोध भी जताया गया। विदेश कार्यालय ने कहा कि समझौता आतंकी हमले की ”जघन्य घटना के 11 साल बाद आरोपियों को बरी कर दिया जाना न्याय का मजाक है और यह भारतीय अदालतों की नकली विश्वसनीयता की पोल खोल देता है।”

बयान के मुताबिक, भारतीय उच्चायुक्त को बताया गया कि दोषियों को धीरे-धीरे छोड़ना और आखिरकार बरी कर देने का योजनाबद्ध भारतीय निर्णय न सिर्फ 44 मृत पाकिस्तानियों के परिवार की तकलीफ के प्रति भारत की अत्यंत संवेदनहीनता को दर्शाता है बल्कि हिंदू आतंकवादियों को प्रोत्साहित करने और उनका संरक्षण करने की भारत की शासकीय नीति को भी दिखाता है। विदेश कार्यालय के मुताबिक, पाकिस्तान ने भारत का आह्वान किया कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक तरीके तलाशे कि दोषियों को सजा मिल सके।

पंचकुला स्थित एक विशेष अदालत ने समझौता ट्रेन विस्फोट मामले में बुधवार को स्वामी असीमानंद और तीन अन्य को बरी कर दिया। 18 फरवरी 2007 को हुए समझौता ट्रेन विस्फोट मामले में 68 लोगों की मौत हो गई थी जिनमें ज्यादातर पाकिस्तानी थे। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के वकील राजन मल्होत्रा ने बताया, ”अदालत ने सभी चारों आरोपियों नब कुमार सरकार उर्फ स्वामी असीमानंद, लोकेश शर्मा, कमल चौहान और राजिन्दर चौधरी को बरी कर दिया।”