वाराणसी के भेलूपुर थाना के दुर्गाकुंड क्षेत्र में रविवार (18 जुलाई 2019) की शाम को खोजवां स्थित संतोषी माता मंदिर के विवाद में मंदिर के पुजारियों ने अतर सिंह और उनके भाई राजबहादुर सिंह पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। बताया जा रहा कि जान बचाने के लिए उन्होंने फायरिंग की जिसमें एक पुजारी अभिषेक पांडेय की बांह में गोली लग गई। घायलों को अस्पताल पहुँचाया गया है।

बीएचयू स्थित ट्रामा सेंटर में हंगामा
फोटो साभार: अमर उजाला

मंदिर प्रबंध कमेटी के सचिव अतर सिंह और उनके भाई राजबहादुर सिंह का कहना है कि मंदिर में तमाम असामाजिक तत्व भीड़ लगाए रहते हैं और अवैध तरीके गांजा और भांग पीते रहते हैं। मंदिर जुआ का अड्डा बन गया है। इनका कहना है कि ये आने जाने वाली महिलाओं पर फब्तियाँ कसते हैं। जिसके कारण महिलाओं का इधर से गुजरना मुश्किल हो गया है। देर शाम एक महिला से मंदिर के पुजारी ने छेड़छाड़ की और विरोध करने पर मारापीटा गया।

जानकारी के अनुसार, खोजवां-दुर्गाकुंड मार्ग स्थित शक्तिनगर कॉलोनी में संतोषी माता मंदिर का तीस साल पहले रजिस्ट्रेशन हुआ था और उस समय कब्जा किए हुए किराएदारों से मंदिर परिसर को खाली कराया गया। इसमें विश्व हिंदू परिषद के साथ मोहल्ले के लोगों ने और मंदिर ट्रस्ट के सचिव अतर सिंह के परिवार की मुख्य भूमिका रही।

वहीं, हिंदू युवा वाहिनी का खुद को पदाधिकारी बताने वाले अभिषेक पांडेय अतर सिंह और उनके भाई राजबहादुर सिंह पर जमीन कब्जाने का आरोप लगाया, इसके बाद विवाद बढ़ गया। विवाद बढ़ने के बाद पुजारियों ने राजबहादुर सिंह पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। स्थिति देखकर बड़े भाई ने अपनी लाइसेंसी पिस्तौल से गोली चलाई, जिसके बाद राजबहादुर सिंह की जान बची।

आरोप है कि मंदिर परिसर की जमीन में पुजारी संपूर्ण कब्जा चाहते थे और अपने लोगों को बसाना चाहते थे, जिसका अतर सिंह और उनके भाई अक्सर विरोध करते थे। इस विरोध को जमीन का विवाद बताया जाता है।

घटना के बाद बीएचयू ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की। मौके पर भेलूपुर, लंका थाने की फोर्स मौजूद रही। एहतियातन इलाके में एक गाड़ी पीएसी और भेलूपुर सहित लंका थाने की फोर्स तैनात कर दी गई है।

गौरतलब है कि 2019 के ब्राह्मण सम्मेलन में मंदिर की जमीन और उससे जुड़ी संपत्ति पर कब्जा के लिए ब्राह्मणों ने मांग की थी। वहीं, विश्व हिंदू परिषद मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने की लगातार मांग कर ही है। ऐसे में ऐसे अशिष्ट पुजारियों की वजह से ऐसे अभियानों को चोट पहुँचेगा।