पाकिस्तान की नीचता, सिर्फ ईसाईयों से मांगा सीवर सफाई के लिए आवेदन
इस्लामाबाद, पाकिस्तान में नीचता की हद को पार करते हुए सीवर की सफाई करने वाले सफाई कर्मचारियों के लिए सिर्फ ईसाई धर्म मानने वाले लोगों से आवेदन मांगे गए हैं. इसके लिए सिर्फ पाकिस्तान के ईसाई धर्म के लोग अप्लाई कर सकते हैं. मानवाधिकार संगठनों के प्रदर्शन और बवाल के बाद आवेदन वापस लिया गया.
पाकिस्तान में ईसाई और हिंदू धर्म के लोगों के साथ समाज में सबसे नीचले स्तर का व्यवहार किया जाता है. पाकिस्तान में ज्यादातर सफाई कर्मचारी ईसाई धर्म के हैं. इनमें ज्यादातर के पुरखे पहले हिंदू थे. हिंदुओं के साथ होने वाले भेदभाव की वजह से उन्होंने अपना धर्म परिवर्तन कर लिया और ईसाई बन गए. लेकिन ईसाई धर्म अपनाने के बाद भी उन्हें हिकारत की नजर से ही देखा गया.
न्यूयॉर्क टाइम्स ने पाकिस्तान में ईसाई धर्म के लोगों के हालात पर एक तथ्यपरक रिपोर्ट की है. इसमें बताया गया है कि कैसे पाकिस्तान में ईसाइयों के साथ भेदभाव वाला व्यवहार किया जाता है. उनकी स्थिति समाज में सबस बदतर बनाकर रखी गई है. रिपोर्ट में एक ऐसे ही ईसाई जमशेद एरिक का जिक्र किया गया है.
जमशेद एरिक कराची में सीवर सफाई का काम करता है. वो कहता है कि सीवर की सफाई करने के लिए न उसे दस्ताने दिए जाते हैं और न ही कोई दूसरा सुरक्षा के उपकरण. न कोई मास्क, न कोई ग्लव्स. सीवर की गदंगी और जहरीली गैसों से बचने का उसके पास कोई उपाय नहीं होता है. सबकुछ भगवान भरोसे होता है. एरिक कहता है कि ये सबसे मुश्किल काम है. गटर में मैं कीड़े मकोड़ों और कॉकरोच से घिरा रहता हूं. एरिक कहता है कि वो जब भी सीवर में उतरता है, पहले जीसस को याद करता है. उसका काम ही ऐसा है, जिसमें जान का जोखिम सदा बना रहता है.
एरिक बताता है कि उसके पुरखे भी पहले हिंदू थे. भेदभाव से बचने के लिए उन्होंने वर्षों पहले ईसाई धर्म अपना लिया. लेकिन उनके हालात नहीं बदले. एरिक के पिता भी यही काम करते थे. अब एरिक भी सफाई कर्मचारी का ही काम करता है. 40 साल के एरिक को कराची के सीवर और गटर की सफाई करनी पड़ती है. कराची के 2 करोड़ लोग प्रतिदिन 1,750 मिलियन लीटर कचरा पैदा करते हैं. इसे एरिक जैसे लोग ठिकाने लगाते हैं. एरिक का कहना है कि उस हाल ही में सीवर की सफाई के लिए लगाया गया है. हर एक सीवर की सफाई पर उसे सिर्फ 6 डॉलर यानी करीब पाकिस्तान की करेंसी में 962 रुपए मिलते हैं.