नई दिल्ली. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पेश किया। शाह ने कहा कि यह झूठ फैलाया जा रहा है कि बिल मुस्लिमों के खिलाफ है। मैं पूछना चाहता हूं कि जो देश के नागरिक हैं, उन्हें किस बात की चिंता है। आप क्या चाहते हैं कि पूरी दुनिया से जो मुस्लिम आएं उन्हें नागरिकता दे दें। उन्होंने कहा कि इस बिल से पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान के गैर-मुस्लिमों को भारत की नागरिकता मिलेगी और इस सदन की बहस को देश की जनता देख रही है। वहीं, कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने जवाब में कहा कि बिल को लेकर सरकार राज हठ छोड़कर गांधीजी के चश्मे से देखें।

शाह ने कहा, ”भारत के अल्पसंख्यकों और मुस्लिमों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। जिनका वीजा खत्म हो जाता है, उन्हें अवैध प्रवासी माना जाता है। हमने इस बात को बिल में शामिल किया है। धार्मिक आधार पर प्रताड़ितों को भी नागरिकता मिलेगी। 1955 के कानून की धारा 5 के तहत यह भी प्रावधान है कि लोगों को उसी तारीख से भारत का नागरिक माना जाएगा, जिस दिन से वे भारत आए थे। उन्हें कोई कानूनी प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा।”

शाह ने आगे कहा, “जनजातियों और मिजोरम समेत पूर्वोत्तर राज्यों पर यह बिल लागू नहीं होगा। 35 साल तक किसी को असम के लोगों की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत की चिंता नहीं हुई। असम की जनता को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि हम आपके सभी हितों की रक्षा करेंगे।इसलिए हमने क्लॉज 60 कमेटी बनाईं। जितनी जल्दी रिपोर्ट मिलेगी, सरकार निर्णय ले पाएगी।”

कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि यह बिल लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ है यह लोगों को बांटने वाला है। उन्होंने कहा, ”आजादी के बाद नागरिकता को लेकर संविधान सभा में चर्चा हुई थी। महात्मा गांधी के नेतृत्व में जिन्होंने आंदोलन में हिस्सा लिया था। उन्होंने नागरिकता के महत्व को समझा था। संविधान निर्माताओं ने इसे पिछले पीढ़ियों से तय किया था। अगर हम इस पर 70 साल बाद सवाल करें, क्या उन्हें कोई समझ नहीं थी। लाखों लोग बंटवारे के बाद आए थे। उनमें से दो प्रधानमंत्री बने मनमोहन सिंह और आईके गुजराल।”

उन्होंने कहा, ”नागरिकता को लेकर 9 संशोधन हुए। उनके जरिए गोवा, दमन-दीव के लोगों को नागरिकता दी गई। युगांडा के लोगों को भी नागरिकता दी गई। जब भी नागरिकता दी गई, भारत की सरकारों ने धर्म को आधार नहीं बनाया। इसलिए यह अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। भारत ने उत्पीड़न और हिंसा के शिकार लोगों को हमेशा से शरण दी है। चाहे वे यहूदी या ईसाई ही क्यों न रहे हों।”

तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा, ”आप देश के लोगों को रोटी, कपड़ा और मकान नहीं दे पा रहे, और दूसरे पड़ोसी देशों के अधिकारों की बात करते हैं। नागरिकता बिल के विरोध में व्यापक आंदोलन खड़ा हो गया है। आपने घोषणा पत्र में यह भी कहा था कि किसी को भी चिंता करने की जरूरत नहीं है। नोटबंदी, बेरोजगारी, गोरखा के मुद्दे पर प्रधानमंत्री के वादे खोखले साबित हुए।”

उन्होंने कहा, ”एनआरसी में बंगाली हिंदुओं को नागरिकता देने का झूठा वादा किया गया है। आप कहते हैं कि नागरिकता बिल सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। यह हमारे राष्ट्रपिता नहीं, जिन्ना की कब्र पर सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा।”

शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा, ”ये कहा जा रहा है कि जो बिल का समर्थन नहीं करेगा वो देशद्रोही और समर्थन करने वाला देशभक्त। ऐसा भी कहा गया है कि कुछ लोग पाकिस्तान की भाषा बोल रहे हैं, क्या ये पाकिस्तान का सदन है। अगर पाकिस्तान की भाषा पसंद नहीं है, उस देश में अल्पसंख्यकों के साथ छल होता है तो पाकिस्तान को खत्म करो। हम आपके साथ हैं।”

राउत ने कहा, ”बिल पर मानवता के आधार पर चर्चा होनी चाहिए। अगर शरणार्थियों को जगह दे रहे हैं तो घुसपैठियों को बाहर निकालें। मैं मानता हूं कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार होता है, लेकिन इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।”

राहुल गांधी ने लिखा, ”यह बिल सरकार का पूर्वोत्तर के लोगों, उनके जीने के तरीके और भारत के विचार पर आपराधिक हमला है।” 

 

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा, ”यह रोचक होगा कि जो पार्टियां संघ और भाजपा की विचारधारा के खिलाफ हैं, उनका उच्च सदन में नागरिकता बिल पर वोटिंग में क्या रुख रहता है। चर्चा के दौरान वॉकआउट करना मोदी सरकार को समर्थन देने का सबसे आसान रास्ता है। नीतीशजी और रामविलासजी आप लोहिया के सिद्धांतों को मानते हैं तो थोड़ा सोचिए।

14 घंटे बहस के बाद बिल लोकसभा से पारित हुआ

लोकसभा में विधेयक पर सोमवार को करीब 14 घंटे तक बहस हुई थी। इसके पक्ष में 311 और विपक्ष में 80 वोट पड़े थे। मंगलवार को असम और त्रिपुरा में कई जगहों पर प्रदर्शन और आगजनी भी हुई। कांग्रेस इस बिल के विरोध में आज देशव्यापी प्रदर्शन करेगी। पार्टी ने अपनी राज्य इकाइयों से कहा है कि नागरिकता बिल के विरोध में प्रदेश कांग्रेस मुख्यालयों के बाहर प्रदर्शन करें। विपक्षी दलों ने बिल को धर्म के आधार पर भेदभाव करने वाला बताया।

गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब में कहा था कि यह बिल यातनाओं से मुक्ति का दस्तावेज है और भारतीय मुस्लिमों का इससे कोई लेना-देना नहीं है। शाह ने कहा कि यह बिल केवल 3 देशों से प्रताड़ित होकर भारत आए अल्पसंख्यकों के लिए है और इन देशों में मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं हैं, क्योंकि वहां का राष्ट्रीय धर्म ही इस्लाम है। मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में भी नागरिकता बिल लोकसभा से पारित हुआ था, लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण राज्यसभा में अटक गया था।

राज्यसभा का गणित…

राज्यसभा में भी बिल के समर्थन में बहुमत से 7 ज्यादा सांसद

240 सांसद

5 रिक्त सीटें

कुल सीटें- 245

121 बहुमत का आंकड़ा

128 सांसद समर्थन में

110 सांसद खिलाफ

2 सांसदों का रुख साफ नहीं

समर्थन में: भाजपा- 83, बीजेडी-7, अन्ना द्रमुक-11, जेडीयू-6, नामित- 4, अकाली दल- 3, शिवसेना-3, आजाद व अन्य- 11

इनमें पूर्वोत्तर के 2 सांसद शामिल नहीं हैं, जिन्होंने रुख साफ नहीं किया है। ये 2 सांसद वोटिंग के दौरान वॉकआउट करते हैं तो बहुमत का आंकड़ा 120 रह जाएगा।

विरोध में: कांग्रेस-46, टीएमसी-13, सपा-9, वामदल-6, डीएमके-5, टीआरएस-6, बसपा-4 और अन्य-21

कांग्रेस के मोतीलाल वोरा बीमारी की वजह से गैरहाजिर रह सकते हैं। अन्य दलों के सांसद भी गैरहाजिर रहे तो बहुमत का आंकड़ा और कम हो जाएगा। वैसे भी बिल के समर्थन में पर्याप्त सांसद हैं, इसलिए बिल आसानी से पारित हो सकता है।

समझें नागरिकता संशोधन विधेयक…

  • यह कानून 1955 में आया। इसके तहत किसी भी व्यक्ति को भारतीय नागरिकता लेने के लिए कम से कम 11 साल भारत में रहना अनिवार्य है।
  • भारत में अवैध तरीके से दाखिल होने वाले लोगों को नागरिकता नहीं मिल सकती। उन्हें वापस उनके देश भेजने या हिरासत में रखने के प्रावधान हैं।
  • संशोधित विधेयक में पड़ोसी देशों अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के अल्पसंख्यक शरणार्थियों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई) को नागरिकता मिलने का समय घटाकर 11 साल से 6 साल किया गया है। मुस्लिमों और अन्य देशों के नागरिकों के लिए यह अवधि 11 साल ही रहेगी।