नई दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने सोमवार को लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 (Citizen Amendment Bill 2019) पेश किया, जिसके बाद विपक्ष ने हंगामा कर कर दिया. विपक्ष ने बिल के अल्पसंख्यक विरोधी (Anti Minority) होने का आरोप लगाया तो शाह ने कांग्रेस पर हमला करते हुए बंटवारे की याद दिला दी. शाह ने कहा कि कांग्रेस (Congress) ने धर्म के आधार पर देश का बंटवारा (Partition) किया और उस समय ऐसा नहीं किया गया होता तो आज यह नहीं करना पड़ता.

शाह ने कहा कि पड़ोसी देशों में मुसलमानों (Muslims) के खिलाफ धार्मिक प्रताड़ना (Religious Persecution) नहीं होती है. इसलिए इस बिल का फायदा उन्हें नहीं मिलेगा. उन्होंने कहा कि यह बिल अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है. कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने कहा कि संसद को ऐसे विधेयक पर चर्चा का अधिकार नहीं है, क्योंकि यह संविधान की प्रस्तावना का भी उल्लंघन करता है.

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Chaudhary) ने विधेयक को संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताते हुए कहा कि सरकार आर्टिकल-14 को नजरअंदाज कर रही है. यह हमारे लोकतंत्र का ढांचा है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद सौगत राय ने कहा, ‘संविधान का अनुच्छेद-14 कहता है कि राज्य (State) भारत में किसी व्यक्ति को विधि के समक्ष समता से या विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा. ये बिल नेहरू-अंबेडकर की सोच के भारत के खिलाफ है. एमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता (Secularism) इस देश के मूलभूत ढांचे का हिस्सा है. 

इस पर अमित शाह ने पलटवार करते हुए कहा कि सदन के नियम 72(1) के हिसाब से यह बिल किसी भी आर्टिकल का उल्लंघन नहीं करता है. उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) ने 1971 में निर्णय किया था कि बांग्लादेश (Bangladesh) से आए लोगों को भारत की नागरिकता दी जाए. उन्होंने पाकिस्तान (Pakistan) से आए लोगों के साथ ऐसा क्‍यों नहीं किया? उन्होंने कहा कि  जब युगांडा से आए सारे लोगों को कांग्रेस के शासन में नागरिकता दी गई, तब इंग्लैंड से आए लोगों को क्यों नहीं दी गई? फिर दंडकारण्य कानून लाकर नागरिकता दी गई. उसके बाद राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) ने असम समझौता किया. उसमें भी 1971 की ही कट ऑफ डेट रखी तो क्या समानता हो पाई? हर बार तार्किक वर्गीकरण के आधार पर ही नागरिकता दी जाती रही है.

गृह मंत्री शाह ने कहा कि दुनिया भर के देशों में नागरिकता का आधार अलग-अलग होता है. उन्होंने पूछा कि कोई देश जब यह कहता है कि उसके देश में निवेश करने वाले व्‍यक्ति को नागरिकता दी जाएगी तो क्या वहां समानता का संरक्षण हो पाता है? उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकार होने पर समानता का कानून कहां चला जाता है? 


अमित शाह ने कहा कि इस विधेयक का आधार सिर्फ भौगोलिक नहीं है, बल्कि इसमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के संविधान को भी देखा गया है. इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ अफगानिस्तान के संविधान के मुताबिक इस्लाम राज्य का धर्म है. पाकिस्तान का संविधान कहता है कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान का धर्म इस्लाम है. वहीं, बांग्लादेश का संविधान भी इस्लाम को राज्य का धर्म बताता है. 1950 में नेहरू-लियाकत समझौता हुआ. दोनों देशों ने अपने अल्पसंख्यकों के संरक्षण का संकल्प लिया. भारत में इसका गंभीरता से पालन हुआ, लेकिन पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हुए जुल्म को पूरी दुनिया ने देखा.