नई दिल्ली. केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) के पूर्व निदेशक और सेवारत आईपीएस अधिकारी एम. नागेश्वर राव (M Nageswara Rao) एक बार फिर चर्चा में हैं. राव ने शनिवार को इस्लाम धर्म और देश के पहले शिक्षामंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद को लेकर ट्वीट किया है, जिसको लेकर हो-हल्ला मच गया है. उन्होंने दावा किया कि भारत के इतिहास को खूनी इस्लामिक धर्मों/ शासनों ने बड़ी सफाई से ‘विकृत’ किया. ऐसा करने वाले को शिक्षामंत्री का नाम दिया गया. शिक्षामंत्री रहते हुए मौलाना अबुल कलाम आजाद (Maulana Abul Kalam Azad) 30 में से 20 साल यानी 1947-77 तक भारतीय मन-मस्तिष्क के प्रभारी बने बैठे थे.

 

 

एम नागेश्वर राव ने ट्वीट किया- ‘मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के 11 साल (1947-58) के बाद हुमायूं कबीर, एम सी छागला और फकरुद्दीन अली अहमद- 4 साल (1963-67), फिर नुरुल हसन- 5 साल (1972-77). शेष 10 साल अन्य वामपंथी जैसे वीकेआरवी राव… ने ये जिम्मेदारी संभाली’. नागेश्वर राव ने ये लाइनें चार स्लाइड की एक सीरीज से ली, जिसे उन्होंने एक ट्वीट में पोस्ट किया था.

इस स्लाइड की शुरुआत में लिखा है- ‘हिंदू सभ्यता के अब्राहमनिकरण की कहानी.’ इसमें नागेश्वर राव ने छह बिंदुओं को सूचीबद्ध किया-1: हिंदुओं को उनके ज्ञान से वंचित करें 2. हिंदू धर्म को अंधविश्वासों के संग्रह के रूप में सत्यापित करें 3. अब्राहम शिक्षा 4. अब्राहम मीडिया और मनोरंजन 5. अपनी पहचान के बारे में शर्म आनी चाहिए 6. हिंदू धर्म और समाज की मृत्यु हो जाती है.

नागेश्वर राव ने रविवार को एक और पोस्ट किया. उन्होंने लिखा- ‘क्या हम अपने राष्ट्रीय आदर्श वाक्य सत्यमेव जयते के लिए असल में प्रतिबद्ध हैं. क्या सत्य अकेले विजय हो सकता है? ज्यादातर नहीं. इसके विपरीत, हम राजनीतिक शुद्धता के नाम पर झूठ को झूठ बताते हैं, जिसे हम अपनी शिक्षा में ही सीखते हैं. इसमें कोई हैरानी वाली बात नहीं है कि हम पाखंडियों के राष्ट्र हैं, न कि विजेताओं के.’

नागेश्वर राव 1986 में आईपीएस बने. वह ओडिशा कैडर के अधिकारी हैं. नागेश्वर राव साल 2016 में CBI में आए. यहां वह बतौर संयुक्त निदेशक कार्य कर रहे थे. सीबीआई के नंबर 1 और नंबर 2 की लड़ाई के बीच उन्हें अंतरिम निदेशक बनाया गया था.

सीबीआई से हटाए जाने के बाद नागेश्वर राव वर्तमान में होम गार्ड, फायर सर्विसेज और सिविल डिफेंस में महानिदेशक हैं. 31 जुलाई को वह रिटायर हो रहे हैं. आईपीएस के रूल के मुताबिक, IPS अधिकारी सेवाकाल के दौरान सिर्फ वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक उद्देश्यों के लिए लेख लिख सकते हैं. जिसमें ये भी बताया जाना होगा कि ये लेखक के निजी विचार हैं. हालांकि, नागेश्वर राव ने इस्लाम धर्म को लेकर किए गए दावों पर अभी तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है.