नई दिल्ली, मनोज मुकुंद नरवाने (Manoj Mukund Naravane) को भारतीय सेना का नया चीफ बनाया गया है. लेफ्टिनेंट जनरल नरवाने फिलहाल उप-सेनाप्रमुख की जिम्मेदारी निभा रहे थे और उन्हें चीन से संबंधित सैन्य मामलों का स्पेशलिस्ट माना जाता है. भारत के साथ चीन के संबंध वर्तमान हालातों में बेहद अहम हैं. चीन के साथ भारत की लंबी सीमा भी लगती है, ऐसे में मनोज मुकुंद सेना चीफ के तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. नरवाने इससे पहले भारतीय सेना की ईस्टर्न कमांड के प्रमुख थे. सेना की ईस्टर्न कमांड चीन के साथ लगने वाली भारत की करीब 4000 किमी लंबी सीमा लगती है. इस सीमा पर लंबे समय तक निगाह रहने के कारण नरवाने चीन की हरकतों से वाकिफ रहे हैं. इसके अलावा भी नरवाने को चीनी मामलों की काफी बेहतर समझ है.

2017 में डोकलाम में हुए चीन के साथ हुए विवाद के दौरान नरवाने ही ईस्टर्न कमांड के हेड थे. रणनीतिक जानकारों का मानना है कि इस मामले में भारत ने चीन के साथ जो रुख अख्तियार किया था वो शायद पहली बार था. बीते कुछ सालों में चीन के साथ भारत का ये सबसे तीखा विवाद था. इस विवाद पूरी दुनिया की निगाहें लगी हुई थीं. नरवणे अपनी त्वरित निर्णय क्षमता और फैसला लेने से पहले अपने साथियों को सुनने की जबरदस्त योग्यता के लिए पहचाने जाते हैं.

नरवाने सेना के आधुनिकीकरण को स्वदेशी बनाने के पक्षधर हैं. उनका मानना है कि चूंकि हमारे पास तकनीक है, सुव्यव्स्थित ऑर्डिनेंस फैक्टरियां हैं-इसलिए हमें आत्मनिर्भर बनना चाहिए. उनका मानना है कि भारत के पास निजी क्षेत्र की बड़ी क्षमताएं हैं जिनका सहारा लेकर हम न सिर्फ आत्मनिर्भर बन सकते हैं बल्कि हथियार निर्यात भी कर सकते हैं. इस समय सेना में आधुनिकीकरण के प्रोग्राम बड़े स्तर पर चलाए जा रहे हैं, ऐसे में नरवाने पर जिम्मेदारी होगी कि सेना के हर हिस्से तक सरकारी फंडिंग और आधुनिकीकरण की प्रक्रिया पहुंचे.

वे जम्मू कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स की बटालियन और पूर्वी मोर्चे पर इंफेंट्री ब्रिगेड की कमान संभाल चुके हैं. लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवाने श्रीलंका में भारतीय शांति रक्षक बल का हिस्सा थे और तीन सालों तक म्यामां स्थित भारतीय दूतावास में रक्षा अताशे रहे. लेफ्टिनेंट जनरल नरवाने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और भारतीय सैन्य अकादमी के छात्र रहे हैं. उन्हें जून 1980 में सिख लाइट इन्फैंटरी रेजिमेंट के सातवें बटालियन में कमीशन मिला. अपने करियर के दौरान नरवाने को कई सेना मेडल मिले हैं. उन्हें विशिष्ट सेवा मेडल (2015), अतिविशिष्ट सेवा मेडल (2017) और परम विशिष्ट सेवा मेडल (2019) मिल चुके हैं.

मराठी परिवार से ताल्लुक रखने वाले मनोज मुकुंद नरवाने के पिता भारतीय वायुसेना में विंग कमांडर थे. उनकी मां ऑल इंडिया रेडियों में अनाउंसर थीं. नरवाने ने अपनी स्कूली शिक्षा पुणे से पूरी की. उन्होंने डिफेंस स्टडीज में पोस्ट ग्रेजुएशन और फिर एम.फिल किया है. नरवाने को पेंटिंग और योग करना बेहद पसंद है. उनकी शादी वीणा नरवणे से हुई है. जो पेशे से टीचर हैं.