नई दिल्ली, लंदन ब्रिज पर हमला करने वाले आतंकवादी उस्मान खान के शव को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर स्थित उसके पैतृक गांव कजलानी में गुपचुप रूप से दफना दिया गया है। पाकिस्तान ने उस्मान के पाकिस्तानी मूल के होने की खबरों का खंडन किया था। यही नहीं, उस्मान को पाकिस्तानी मूल का बताए जाने पर पाकिस्तान और ब्रिटेन में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। दरअसल, पाकिस्तान नहीं चाहता था कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हो रहे आतंकी हमलों में उसकी एक और भूमिका दुनिया के सामने आए। उसे डर था कि इससे भारत के उस आरोप को बल मिलेगा जिसमें भारत पाकिस्तान को आतंकवाद का फैक्ट्री बताता रहा है। 

                                  (लंदन ब्रिज आतंकवादी हमले का गुनाहगार उस्मान खान)

दरअसल, इस्लामाबाद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा के अधिकारियों ने एक ब्रिटिश न्यूज चैनल से इसकी पुष्टि की। यही नहीं, पाकिस्तान के स्थानीय अखबारों ने भी इसे प्रमुखता के छापा है। अधिकारियों के अनुसार, ब्रिटेन में कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद 28 वर्षीय आतंकी उस्मान का शव एक पैसेंजर प्लेन द्वारा पाकिस्तान लाया गया और जुम्मे के दिन दफना दिया गया। कोटली जिले के कजलानी गांव की आबादी लगभग 3 हजार है।

ब्रिटेन के स्थानीय मुस्लिम समुदाय के कई लोग नहीं चाहते थे कि उस्मान को स्टोक ऑन ट्रेंड स्थित कोब्रिज के जामिया गौसिया में कब्रिस्तान में दफनाया जाए। उस्मान का परिवार स्टोक ऑन ट्रेंट में ही रहता है। उस्मान के परिवार ने पिछले मंगलवार को बताया था कि उसने मेट्रोपॉलिटन पुलिस की ओर से जारी एक बयान में उस्मान की करतूतों की निंदा की है।

         (ब्रिटेन का कुख्यात मौलवी और आतंकियों का समर्थक अंजेम चौधरी के साथ आतंकी उस्मान खान)

इससे पहले, उस्मान के चचेरे भाई ने बताया था, ‘परिवार उस्मान के शव को ब्रिटेन में नहीं दफनाना चाहता है और गुपचुप तरीके से उसे पाकिस्तान में दफनाना चाहता है।’ उसने बताया कि उस्मान के पिता और दूसरे करीबी रिश्तेदार उसके शव को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) स्थित पैतृक गांव में सुपुर्दे खाक करेंगे। हालांकि, लाश को पाकिस्तान भेजने से पहले बर्मिंघम की एक मस्जिद में जनाजे की रस्म पूरी हुई। 

                                     (पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर का कजलानी गांव)

दरअसल, पाकिस्तान सरकार के मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने उस्मान को पाकिस्तानी मूल का बताने पाकिस्तानी अखबार डॉन न्यूज को लताड़ लगाई थी और उसके अगले दिन गुस्साए लोगों की भीड़ ने अखबार के इस्लामाबाद स्थित दफ्तर पर धावा बोल दिया था। भीड़ ने दफ्तर की घंटों तक घेराबंदी कर रखी थी। फिर 6 दिसंबर को करीब 100 प्रदर्शनकारियों ने फिर से अखबार के दफ्तर को घेर लिया था।