कोरोना वायरस महामारी को लेकर विवादों में चल रहे चीन के वुहान इंस्टिट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी ने लैब में काम करने वाले वैज्ञानिकों की तस्वीरें अपनी वेबसाइट से हटा दी है। इन तस्वीरों में लैब के वैज्ञानिक कम सुरक्षा उपकरणों के साथ खतरनाक वायरस पर टेस्ट करते नजर आ रहे थे। माना जा रहा है कि कोरोना महामारी से निपटने में अपनी खामियों को छिपाने के लिए चीन ने यह कदम उठाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इंस्टीट्यूट का स्टाफ बिना किसी सुरक्षा किट के गुफाओं में जाकर चमगादड़ों को पकड़ता था और स्वाब इकट्ठा करता था। वहीं, इस वॉयरोलॉजी में एक फ्रिज में 1500 तरह के वायरस को एक साथ रखने वाली तस्वीर भी सामने आई थी। इसके अलावा, इंस्टीट्यूट ने अमेरिकी वैज्ञानिकों के विजिट को भी अपनी वेबसाइट की हिस्ट्री से डिलीट कर दिया है।

दरअसल, मार्च 2018 में अमेरिकी दूतावास के वैज्ञानिक रिक स्विटजर ने इस लैब में विजिट किया था। इस दौरे के बाद स्विटजर ने अमेरिका के विदेश व‍िभाग को चेतावनी देते हुए कहा था कि इस लैब में प्रशिक्षित लोगों की भारी कमी है। यही नहीं, पिछले दि

नों वुहान लैब की ऐसी तस्वीरें सामने आई थीं जिनमें लैब के अंदर टूटी हुई सील दिखाई दे रही थी। ये तस्वीरें पहली बार चाइना डेली अखबार ने 2018 में रिलीज की थीं। ट्विटर पोस्ट होने के साथ ही ये सवालों के घेरे में आ गईं क्योंकि लोगों को इस लैब की ऐसी खामियां दिखने लगीं जिनसे लैब से वायरस लीक पर उठ रहे सवालों को बल मिल गया है।

इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को था कि कि दुनिया भर में दहशत का कारण बना कोरोना वायरस चीन की लैब में ही बनाया गया था। ट्रंप ने कहा कि उन्हें इसका पूरा भरोसा है और इसके पर्याप्‍त सबूत हैं कि कोरोना वायरस को वुहान की जैविक प्रयोगशाला में डिवलप किया गया था, हालांकि उन्होंने इसके सबूतों को लेकर कोई भी जानकारी शेयर करने से इनकार कर दिया। ट्रंप ने कहा कि हां मेरे पास इसके सबूत हैं, लेकिन मैं इसके बारे में आपको बता नहीं सकता और मुझे इसकी इजाजत भी नहीं है।