कर्नाटक में एक कॉलेज से शुरू हुआ हिजाब का विवाद (Hijab Controversy) उग्र और हिंसक होता जा रहा है। साथ ही भारत में माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वाले लोग लगातार इसे अपना समर्थन दे रहे हैं। शांति का नोबेल पुरस्कार पाने वाली मलाला युसुफजई से लेकर पाकिस्तान के नेताओं ने मुस्लिम छात्राओं का समर्थन किया है। वहीं, मुस्लिम देशों की मीडिया भी मुस्लिम छात्राओं के पक्ष में लगातार माहौल बना रही है।

कर्नाटक के शिमोगा में हिजाब के समर्थन में प्रदर्शन कर रही मुस्लिम भीड़ और हिजाब का विरोध कर रही हिंदू भीड़ के बीच जमकर पत्थरबाजी हुई। हालात ऐसे हो गए पुलिस को लाठी चार्ज करनी पड़ी। इस घटना में दो लोग घायल हो गए हैं। वहीं, पुलिस ने इलाके में धारा 144 लगा दिया है। जबकि राज्य सरकार ने शिक्षण संस्थानों को तीन दिनों के लिए बंद कर दिया है।

वहीं, हिजाब के समर्थन में देश के कई हिस्सों में समर्थन हो रहे हैं। हिजाब को लेकर मुस्लिम छात्राओं के समर्थन में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) और पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता की आलिया यूनिवर्सिटी के मुस्लिम छात्र-छात्राओं द्वारा रैली निकाली गई। 

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं ने हिजाब के समर्थन में पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया और अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाए। बुधवार (9 फरवरी) को प्रदर्शनकारी विश्वविद्यालय के डक प्वॉइंट से बाबा सैयद गेट तक जा रहे थे, लेकिन यूनिवर्सिटी के सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया। यूनिवर्सिटी के छात्र नेता आरिफ त्यागी ने कहा कि हिजाब के समर्थन में 12 फरवरी को बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।

आरिफ ने कहा कि इस प्रोटेस्ट की आवाज पूरे भारत और देश के बाहर भी आवाज जाएगी। उन्होंने कहा, “अगर हमारे इस्लाम पर बात आएगी तो यकीनन हम जवाब देंगे चाहे ईट की जगह हमें पत्थर से जवाब देना पड़े।” छात्र-छात्राओं का कहना है कि कर्नाटक में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के दौरान छात्राओं के साथ बदतमीजी की गई और उनका खून खौल गया।

वहीं, कोलकाता के आलिया यूनिवर्सिटी के लगभग 500 छात्र-छात्राओं ने हिजाब के समर्थन में इन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हिजाब इनके मजहब का हिस्सा है और भारत का संविधान धार्मिक स्वतंत्रता की अनुमति देता है।