नई दिल्ली, भारतीय वैदिक ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने एक बड़ी पहल करते हुए इसे दसवीं और बारहवीं में एक संकाय के रूप में शामिल किया है। कला, विज्ञान और वाणिज्य संकाय के तर्ज पर अब दसवीं और बारहवीं वेद संकाय से भी की जा सकती है। इस कोर्स के सभी विषय संस्कृत भाषा और वेद से जुड़े है। हालांकि, इस माध्यम में अभी सिर्फ दसवीं में ही प्रवेश दिया जा रहा है, लेकिन जल्द ही बारहवीं का भी कोर्स शुरु करने की तैयारी है।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ऑनलाइन पढ़ाई कराने वाली संस्था राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) ने यह पहल की है। एनआईओएस ने वेदों से जुड़े इस खास संकाय को ‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ नाम दिया है। इसके लिए खासतौर पर पांच विषय तैयार किए गए है। इनमें भाषा के रूप में संस्कृत को रखा गया है, जबकि अन्य चार विषयों में भारतीय दर्शन, वेद अध्ययन, संस्कृत व्याकरण और संस्कृत साहित्य होंगे। पूरी तरह ऑनलाइन इस कोर्स में छात्रों को अष्टाध्यायी से लेकर वेद मंत्रों का अध्ययन करना होगा। 

एनआईओएस अध्यक्ष डॉ. सी.बी. शर्मा के मुताबिक, कोर्स को लेकर संस्थान लंबे समय से काम कर रहा था और इस संबंध में देश भर के प्रमुख वेद विद्यालयों से संपर्क कर वहां पढ़ाई जाने वाली विषय-वस्तु की जानकारी को जुटाई गई। गौरतलब है कि वर्तमान समय में स्कूली शिक्षा में ऐसा कोई कोर्स नहीं था, जो वेद और भारतीय वैदिक परंपरा से जुड़ा हो। इसके लिए उन्हें अभी तक सिर्फ वेद विद्यालयों का ही सहारा लेना पड़ता था।

वैदिक ज्ञान को बढ़ावा देने के भारत सरकार के इस पहल को लेकर भारतीय संस्कृति से जुड़े कई देशों ने रुचि दिखाई है। इनमें मारीशस, फिजी, त्रिनिदाद और टोबैको जैसे देश शामिल हैं। फिलहाल इन देशों ने एनआईओएस से अपने यहां भी इन कोर्सो को संचालित करने और सेंटर खोलने का मांग की है। एनआईओएस से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक इन देशों में एनआईओएस सेंटर खोलने को लेकर तैयार है और इन देशों को इससे जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी करने को कहा गया है।