प्रदीप शर्मा
 एनकाउंटर स्पेशलिस्ट व शिवसेना नेता प्रदीप शर्मा (तस्वीर: सोशल मीडिया)

देश के विख्यात उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के सामने विस्फोटक रखने के मामले की जाँच में एक बड़ा खुलासा हुआ है। महाराष्ट्र पुलिस के पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट और वर्तमान में शिवसेना नेता प्रदीप शर्मा को एंटीलिया विस्फोटक मामले और कारोबारी मनसुख हिरेन की हत्या मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है। इससे पहले शर्मा से लंबी पूछताछ की गई थी।

एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा को कभी मुंबई में अपराधियों के लिए मौत का दूसरा नाम माना जाता था। शर्मा के एनकाउंटर के आंकड़ों की संख्या 150 के आसपास बताई जाती है। यही नहीं, शर्मा ने शिवसेना के टिकट पर 2019 में महाराष्ट्र विधानसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं सके।

मामले की जाँच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे के साथ ही शर्मा को भी हिरेन की हत्या का मास्टरमाइंड बताया है। उन्हें वाजे का गुरु भी बताया जाता है। शर्मा मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के मातहत काम भी कर चुके हैं। इसलिए इस मामले में कई अन्य लोग भी एनआईए के रडार पर हैं।

एनआईए (NIA) का कहना है कि इस काम के लिए शर्मा ने मोटी रकम देकर अपने खास लोगों को काम पर लगाया था। एनआईए की गिरफ्त में आने के बाद विनायक शिंदे, संतोष शेलार और आनंद जाधव ने यह राज खोला। 

शर्मा के कहने पर ही इन्होंने हत्या को अंजाम दिया और शव को ठिकाने लगाया। एनआईए की ओर से विशेष कोर्ट में दलील दी गई है कि हिरेन की हत्या के बाद शर्मा और वाजे को फोन कर बताया गया था कि काम हो गया है। इस साजिश में अब तक वाजे, रियाजुद्दीन काजी और सुनील माने सहित सजायाफ्ता कांस्टेबल विनायक शिंदे की गिरफ्तारी हुई थी। इसके बाद एनआईए ने शर्मा को भी गिरफ्पतार कर लिया है। 

एनआईए के सूत्र बताते है कि बर्खास्त इंस्पेक्टर सुनील माने से मिली जानकारी के आधार पर ही संतोष शेलार और आनंद जाधव को लातूर से गिरफ्तार किया गया। उसके बाद हत्या की कड़ियां जुड़ती गई। 

एनआईए के अनुसार 4 मार्च को उस दौरान कांदिवली क्राइम ब्रांच में तैनात इंस्पेक्टर सुनील माने ने हिरेन को रात में फोन कर घोड़बंदर रोड पर बुलाया था। इसके बाद उसकी हत्या की गई और फिर मुंब्रा के रेतीबंदर खाड़ी में फेंक दिया गया था। 5 मार्च को रेतीबंदर से ही हिरेन का शव बरामद हुआ।  

दरअसल, 1990 के दशक और 2000 की शुरुआत में जब मुंबई में गैंगवार अपनी चरम पर हुआ करता था, तब महाराष्ट्र सरकार ने स्पेशल टीम गठित की थी। इसमें प्रदीप शर्मा समेत क्राइम ब्रांच के प्रमुख अधिकारियों को शामिल किया गया था। इस टीम ने अंडरवर्ल्ड के कई अपराधियों को ताबड़तोड़ एनकाउंटर किया था। हालांकि, इनमें से कई एनकाउंटर विवादित भी रहे। 

2008 में प्रदीप शर्मा को लखन भैया फर्जी एनकाउंटर मामले और माफिया के साथ संबंध रखने के आरोप में निलंबित कर दिया गया था। इस मामले में 13 अन्य पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी भी हुई थी। हालांकि,  बाद में 2013 में उन्हें क्लीन चिट मिल गई।

#एंटीलिया #प्रदीप_शर्मा #शिवसेना #एनआई #NIA #Shivsena #Pradip_Sharma