एक ऐसा राजनेता जिसने भाजपा को झारखंड में सत्ता से बेदखल कर दिया, ये हैं सरयू राय
इंटरनेट डेस्क, झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास को खुली चुनौती देने वाले भाजपा के पूर्व नेता व मंत्री सरयू राय को एक प्रखर वक्ता और भ्रष्टाचार का विरोधी माना जाता है। बिहार में बक्सर जिले के इटाढ़ी थाना के अंतर्गत आने वाले कनिता गांव के एक क्षत्रिय परिवार में जन्मे सरयू राय की पहचान अपने सिद्धांतों और शर्तों पर सियासत करने वाली हस्ती के रूप में होती है, जो अपने दिए वचन पर अटल रहता है और अंतिम सांस तक उसे निभाता है।
झारखंड विधानसभा चुनाव में जमशेदपुर पूर्वी सीट से भाजपा पार्टी से टिकट कटने पर उन्होंने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री रघुवर दास पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और कहा कि रघुवर दास नहीं दाग हैं। यह दाग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डिटर्जेंट और अमित शाह की लाउंड्री भी नहीं धो सकती। उन्हाेंने झारखंड की रघुवर सरकार में रहते हुए भी कई बार भाजपा सरकार की मुश्किलें बढ़ाईं। इस बार तमाम विरोधों से आगे बढ़कर सरयू ने सीएम रघुवर दास के खिलाफ उनके जमशेदपुर पूर्वी सीट से चुनावी मैदान में ताल ठोक दिया। यह सीट फिलहाल देश-दुनिया में चर्चा के केंद्र में है। यहां से कांग्रेस ने एक ट्रिलियन में कितने जीरो पूछकर सुर्खियां बटोरने वाले गौरव बल्लभ को मैदान में उतारा है। चुनाव में इस बार सरयू राय सिलिंडर छाप निशान पर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री रघुवर दास के मंत्रिमंडल में रहने के बावजूद सरयू राय उनका खुलकर विरोध करते रहे हैं। कई नीतिगत फैसलों पर उन्होंने सरकार की मुखालफत की है। एक वक्त ऐसा भी आया जब लग रहा था कि वे मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे देंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हालांकि विधानसभा में विपक्षी दलों के हो-हंगामे को आधार बनाकर उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका इस्तीफा तत्काल मुख्यमंत्री रघुवर दास ने स्वीकार कर लिया था। सरयू राय रघुवर दास की कैबिनेट में खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री रहे।
सरयू राय को झारखंड भाजपा का खेवहनहार कहा जाता था। जदयू और भाजपा को करीब लाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। बिहार के सीएम नीतीश कुमार से हैं उनके बेहतर ताल्लुकात हैं। सरयू राय ने ही चारा घोटाले को उजागर किया था, जिसके कारण लालू यादव को जेल की हवा खानी पड़ रही है। इस संदर्भ में उनके द्वारा लिखित पुस्तक ‘चारा चोर, खजाना चोर’ चर्चित रही है। मधु कोड़ा लूटकांड भी इनकी चर्चित पुस्तक है और कोड़ा द्वारा किए गए घोटालों को उजागर किया था।
सरयू राय साइंस कालेज, पटना के मेधावी छात्र रहे हैं, 74 के जेपी आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल। उन्होंने दामोदर नदी को प्रदूषणमुक्त करने में कामयाबी पाई।