रेखा गुप्ता: एक ऐसा नाम जिसकी आक्रमकता ने DUSU अध्यक्ष से दिल्ली CM की कुर्सी तक पहुँचाया
दिल्ली में भाजपा के वनवास के 27 साल पूरे होने के बाद रेखा गुप्ता ने गुरुवार (20 फरवरी) को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। रेखा गुप्ता दिल्ली चौथी महिला मुख्यमंत्री बन गई हैं। इससे पहले कॉन्ग्रेस आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी सिंह और कॉन्ग्रेस की दिवंगत नेता शीला दीक्षित दिल्ली का सीएम रह चुकी हैं। इन दोनों के पहले भाजपा की ओर से सन 1998 में सुषमा स्वराज सिर्फ 52 दिनों के लिए मुख्यमंत्री बनी थीं। तब दिल्ली का विधानसभा चुनाव होने वाला था और प्याज की महंगाई के कारण भाजपा नेतृत्व ने अपने तत्कालीन मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा को हटाकर सुषमा स्वराज को मुख्यमंत्री बनाया था। सुषमा स्वराज तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पसंद थीं। वहीं, कहा जाता रहा है कि रेखा गुप्ता पीएम नरेंद्र मोदी और संघ दोनों की पसंद हैं।
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| दिल्ली की नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (साभार: X) |
रेखा गुप्ता का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए आने के बाद ही उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर एक अभियान शुरू कर दिया गया। इसमें उनके पुराने ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर कहा जा रहा है कि वह भाषा की मर्यादा का ख्याल नहीं रखती हैं और अपने बयानों में गाली-गलौच के लिए द्विअर्थी संवाद का इस्तेमाल करती हैं। रेखा गुप्ता के इस तरह के कई पुराने स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसमें उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा था। अब आम आदमी पार्टी और भाजपा विरोधी लोग उनके ट्वीट को शेयर करके उन्हें गालीबाज महिला बता रहे हैं।
ऐसे ही कई स्क्रीनशॉट आम आदमी पार्टी के समर्थकों ने साझा किया है। वायरल हो रहा एक स्क्रीनशॉट 5 अक्टूबर 2016 का बताया जा रहा है, जिसमें रेखा गुप्ता नाम दिख रहा है। हालाँकि, लेखक स्क्रीनशॉट की सत्यता की पुष्टि नहीं करता। इस स्क्रीनशॉट में रेखा गुप्ता के हवाले से कहा गया है, “केजरीवाल अपना जन्मदिन कभी नहीं मनाता। उन्होंने अपनी माँ से घटना का वीडियो माँगा था, जिसे वो दे नहीं सकी थी। (कई इमोजी)।” वहीं, एक अन्य स्क्रीनशॉट में रेखा गुप्ता के हवाले से कहा गया है, “अरविंद केजरीवाल दिल्ली तेरे बाप की भी नहीं है जो तू यहाँ मुख्यमंत्री बनकर बकवास कर रहा है। दिल्ली जनता की है और जनता ही तुझे तेरी माँ की कोख में वापिस भेजेगी। कमीना कहीं का।” ये ट्वीट कितना सत्य है, ये तो शेयर करने वाला जान सकता है या फिर जाँच करने वाली एजेंसियाँ।
अगर इन शब्दों से इतर देखें तो रेखा गुप्ता में नेतृत्व का विकास अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) में रहते हुए हुआ है। वह भाजपा की इस ईकाई की ओर से छात्र नेता रही हैं। छात्र जीवन युवा जोश, उमंग और प्रतिबद्धता से भरा हुआ होता है। यही कारण है कि छात्रा नेता के रूप में रेखा गुप्ता के जुझारूपन और आक्रमकता की अक्सर चर्चा होती थी। रेखा गुप्ता की यही विशेषता है कि वे सटीक मुद्दे पर सटीक शब्दों का प्रयोग करती हैं, जिससे विरोध पार्टी या व्यक्ति तिलमिला जाए। वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट से कुछ ऐसा ही आभास हो रहा है। सीएम बनने के बाद इसी प्रतिबद्धता की वजह से उन्होंने पहली घोषणा ये कि वे अरविंद केजरीवाल के बनवाए शीशमहल में नहीं रहेंगी। उन्होंने कहा कि शीशमहल गलत तरीके से बनवाया हुआ है, इसलिए इसमें वह मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं रहेंगी।
ऐसा नहीं है कि उनके जुझारूपन की झाँकी पहली बार दिख रही है। छात्र नेता के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ की महासचिव चुने जाने में भी उनका यही जुझारूपन काम आया था। कॉन्ग्रेस की नेता और रेखा गुप्ता की साथी रहीं अलका लांबा ने उस दौर के किस्से को साझा किया है। बात सन 1995 की है। उस दौर को याद करते हुए अलका लांबा ने कहा कि रेखा गुप्ता आज से 30 साल पहले भी बहुत आक्रामक थीं और आज भी हैं। उन्होंने बताया कि तब रेखा गुप्ता की उम्र सिर्फ 20 साल थी।रेखा गुप्ता ने सन 1992 में दिल्ली विश्वविद्यालय के दौलत राम कॉलेज से पढ़ाई के दौरान छात्र राजनीति में कदम रखा था और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जुड़ गई थीं।
अलका लांबा ने बताया, “उस समय मैं (कॉन्ग्रेस की छात्र ईकाई) एनएसयूआई से दिल्ली यूनिवर्सिटी की अध्यक्ष चुनी गई थी। बाकी के तीनों पद- उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव (भाजपा की छात्र ईकाई) एबीवीपी के खाते में गए थे। रेखा गुप्ता सचिव चुनी गई थीं। तब हमने मिलकर पद की शपथ ली थी। उस समय हमारी उम्र 20 साल थी। हमने एक साथ मिलकर काम किया था।” हालाँकि, लांबा ने यह भी बताया कि उस समय भी दोनों के बीच विचारधारा की लड़ाई चलती है। ABVP के लोग संघ के नेताओं को बुलाकर लेक्चर दिलवाते थे और NSUI के लोग गाँधीवादी विचारधारा के लोगों को बुलाते थे। उन्होंने यह भी बताया कि महिलाओं के मुद्दे पर दोनों साथ मिलकर काम करते थे।
उन्होंने बताया कि हरियाणा में जन्मीं और दिल्ली में पली-बढ़ीं 50 वर्षीया रेखा गुप्ता कॉलेज में भी बहुत आक्रामक थीं और आज भी हैं। लांबा ने कहा, “अभी कुछ दिन पहले मेरे पास उनका एक वीडियो आया, जिसमें वह पार्षद रहते हुए बेहद आक्रामक नजर आ रही हैं। वह जब पार्षद थीं तो मैं पार्षद नहीं थी और जब 2015 से 2020 तक मैं विधायक बनी तो वह विधायक नहीं थीं। इस तरह हम कभी एक सदन में साथ मिलकर काम नहीं कर पाए।” दरअसल, MCD में रहते हुए भी रेखा गुप्ता के मिजाज में कोई बदलाव नहीं आया था। बात साल 2022 की है। तब भाजपा ने रेखा गुप्ता को एमसीडी का मेयर प्रत्याशी बनाया गया था। रेखा गुप्ता जीतकर सदन में आईं। सदन में आम आदमी पार्टी और भाजपा के पार्षदों के बीच जमकर हंगामा हुआ था। इस दौरान उन्होंने आम आदमी के एक पार्षद को थप्पड़ जड़ दिया था। इसका वीडियो भी जमकर वायरल हुआ था।
रेखा गुप्ता तीन बार दिल्ली में भाजपा की पार्षद चुनी जा चुकी हैं। हालाँकि, एमसीडी में मेयर का चुनाव हार गईं, लेकिन उनकी आक्रमकता में कमी नहीं आई। रेखा गुप्ता का जन्म 1974 में हरियाणा के जींद जिले के नंदगढ़ गाँव में हुआ था। सन 1976 में उनका परिवार दिल्ली आ गया। यहाँ पर उनका पालन-पोषण और शिक्षा-दीक्षा हुई। कॉलेज लाइफ में आने के बावद वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के छात्र संगठन ABVP से जुड़ गईं। पहले वह दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ की सचिव बनीं और फिर 1996-1997 में वह DUDU की अध्यक्ष बनीं। इसके बाद वह भाजपा की युवा ईकाई भारतीय जनता युवा मोर्चा की सचिव बनीं। वह सन 2003 से 2006 से युवा मोर्चा से जुड़ी रहीं।
मुख्यधारा की राजनीति में उनका पर्दार्पण सन 2007 में हुआ। भाजपा ने उन्हें उत्तरी पीतमपुरा से पार्षद का टिकट दिया और वह जीत गईं। छात्र नेता से करियर शुरू करने के कारण वह पढ़ाई-लिखाई के महत्व को बखूबी समझती थीं। उन्होंने अपने क्षेत्र में पुस्तकालय, पार्क और स्विमिंग पूल जैसी मूलभूत सुविधाओं का विकास किया और स्थानीय लोगों की दिलों में जगह बनाईं। इसके बाद 2007-09 में वह एमसीडी में महिला कल्याण एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष रहीं। इस दौरान वह कॉलेज लाइफ वाली आक्रमकता नहीं भूलीं। हर मुद्दे पर विपक्षी पार्टी को घेरती रहीं। इसके बाद साल 2009 में उन्हें दिल्ली भाजपा महिला मोर्चा के महासचिव की सचिव की जिम्मेदारी दी गई। इस दौरान उन्होंने महिला वर्ग में भाजपा की पैठ को घर-घर तक बढ़ाया। उनके उल्लेखनीय कार्य को देखते हुए साल 2010 में भाजपा ने उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बना लिया।
साल 2015 और 2020 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने उन्हें शालीमार बाग विधानसभा से मैदान में उतारा, लेकिन वह जीत नहीं सकीं। ये वो दौर था, जब अन्ना आंदोलन से उपजे अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को दिल्ली की जनता परखना चाहती थी। हालाँकि, इन दोनों हारों में भी रेखा गुप्ता नहीं घबराईं। आखिरकार 2025 के विधानसभा चुनावों में अपने प्रतिद्वंद्वी आम आदमी पार्टी के बंदना कुमार को लगभग 30 हजार वोटों से हरा दिया और दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं।
रेखा गुप्ता के राजनीतिक जीवन का संघर्ष अपने आप में एक गाथा है। उनके बयान और थप्पड़ मारने के वीडियो और स्क्रीनशॉट जो आज शेयर किए जा रहे हैं, वही उनकी धरोहर है। इसके कारण जनता का उन पर विश्वास बनता गया और इतने बड़े अंतर से वह इस चुनाव को जीतीं। रेखा गुप्ता ने अपने विरोधियों को परास्त करने के लिए वही तरीके अपनाए, जो भगवान कृष्ण ने महाभारत काल में जरासंध, जयद्रथ और कर्ण जैसे विरोधियों को मात देने के लिए अपनाया। भगवान राम ने धर्म के साथ खड़े सुग्रीव के लिए बालि के साथ अपनाया। ये आक्रमकता नहीं होती तो वे संभवत: ना दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ की अध्यक्ष होतीं और ना ही आज दिल्ली की मुख्यमंत्री। आम आदमी पार्टी जैसे सफेद हाथी को मात देने के लिए आक्रमकता जरूरी थी, जिसे रेखा गुप्ता ने सही समय पर सही तरीके से इस्तेमाल किया।