कॉन्ग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कितनी घृणा करती है, इसको समय-समय पर वह जाहिर करती रहती है। अपनी गुयाना यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने जॉर्जटाउन में स्थित महात्मा गाँधी के प्रतिमा के दर्शन किए और उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसको लेकर पीएम मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर एक तस्वीर भी पोस्ट की और उस तस्वीर के साथ लिखा, “उनके (महात्मा गाँधी के) शाश्वत मूल्य पूरी मानवता को शक्ति और आशा देते हैं। उनके विचार हमारे ग्रह को बेहतर और अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में कई समाधान प्रदान करते हैं।” अब चूँकि पीएम मोदी कॉन्ग्रेस के चिर प्रतिद्वंद्वी हैं तो कॉन्ग्रेस को डाह होना जरूरी है।
पीएम मोदी और राहुल गाँधी (साभार: लाइव लॉ)

 

पीएम मोदी के इस ट्वीट को कोट करते हुए कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेता ने लिखा, “जहाँ जाओगे – मेरे सामने शीश झुकाओगे। यह है गाँधी की ताक़त- गोडसे के भक्तों देख रहे हो?” दरअसल, सुप्रिया श्रीनेत इस ट्वीट के जरिए महात्मा गाँधी पर सिर्फ कॉन्ग्रेस और गाँधी परिवार का दावा ठोक रही थीं। उनका मानना है कि भाजपा को महात्मा गाँधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे की पूजा करनी चाहिए।
अब कॉन्ग्रेस को कौन समझाए कि महात्मा किसी पार्टी, विचारधारा या परिवार की बपौती नहीं हैं। वे भगवान गौतम बुद्ध एवं भगवान महावीर के बाद पूरे भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अहिंसा एवं करुणा के सबसे बड़े प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने मानवता को साधने के लिए अहिंसा का जो मार्ग अपनाया, वह कॉन्ग्रेस का अपना मार्ग या विचार नहीं था। वह गाँधी का विचार था। कॉन्ग्रेस ने उनके अनुयायी के तौर पर बस दिखावा किया। महात्मा गाँधी की आज पूरी दुनिया सम्मान देती है और अहिंसा के पुजारी के तौर पर जानती है।
ऐसे में कॉन्ग्रेस द्वारा महात्मा गाँधी की प्रतिमा के सामने पीएम मोदी द्वारा शीश नवाना रास नहीं आ रहा है। कॉन्ग्रेस तो जब तक सत्ता में रही कभी महात्मा गाँधी के आदर्शों पर चलने की बात तो दूर, उस चलने का दिखावा मात्र भी नहीं किया। पंडित नेहरू के खानदान ने महात्मा गाँधी के उपनाम को अपना तो लिया, लेकिन सत्ता के लिए उनके आदर्शों और विचारों की तिलांजलि दे दी। कॉन्ग्रेस को सिर्फ चुनाव के समय ही महात्मा गाँधी याद आते हैं। चुनाव बीतने के साथ ही कॉन्ग्रेस का गाँधी परिवार खुद को अपना वारिस समझकर मनमाने फैसले लेने लगता है।
महात्मा गाँधी पंडित नेहरू की महत्वकांक्षा को समझते थे। वे जानते थे कि कॉन्ग्रेस अगर जारी रही तो वह तानशाह हो जाएगी और उनकी इस आशंका को इंदिरा गाँधी ने सन 1975 में आपातकाल लगाकर सत्य साबित भी कर दिया था। संजय गाँधी ने जबरन नसबंदी और स्लम हटाने के लिए इरादे से दिल्ली में गोली से कई लोगों को मरवाकर महात्मा गाँधी की उस आशंका को सत्य साबित कर दिया, जिसके तहत सत्ता की निरंकुशता को खत्म करने वाले के लिए वे आजादी के बाद कॉन्ग्रेस को खत्म करने के पक्षधर थे।
आजादी के बाद महात्मा गाँधी ने कहा था कि कॉन्ग्रेस की स्थापना का मकसद पूरा हो गया है। अब इसे खत्म हो जाना चाहिए। हालाँकि, जीवन भर महात्मा गाँधी का भक्त होने का ढोंग करने वाले पंडित नेहरू ने इसे नजरअंदाज कर दिया और आजादी के बाद सत्ता प्राप्ति और बाद में सत्ता को अपने वंशजों को हस्तांतरित करने में कॉन्ग्रेस का खूब इस्तेमाल किया। बाद में पंडित नेहरू ने महात्मा गाँधी की बातों को अनसुना करना भी शुरू कर दिया था। इससे वे बेहद दुखी रहने लगे थे और लोगों की भलाई के कामों में व्यस्त रहने लगे थे।
आज कॉन्ग्रेस उन्हीं महात्मा गाँधी पर सिर्फ और सिर्फ अपना हक जता रही है। कॉन्ग्रेस तो ऐसी पार्टी है, जिसने अपनी पार्टी के लालबहादुर शास्त्री तक को उचित सम्मान नहीं दिया। अपनी पार्टी के नरसिंहाराव और सीताराम केसरी जैसे लोगों को तक सरेआम बेइज्जत तक किया। ये सब सिर्फ खुद को गाँधी का अकेला वारिस होने की हनक ने पैदा कर दिया था। हालाँकि, दुनिया जानती है कि सिर्फ गाँधी टाइटल लगाने लेने से कोई महात्मा गाँधी का वारिस नहीं बन जाता।
रही बात पीएम मोदी की तो उन्होंने विपक्ष यानी भारतीय जनता पार्टी में रहते हुए भी महात्मा गाँधी को वो सम्मान दिया, जो कॉन्ग्रेस के लोग आज तक नहीं दे पाए। गुजरात के सीएम रहते हुए भी उन्होंने महात्मा गाँधी को हर समय याद किया। पीएम बनने के बाद उन्होंने महात्मा गाँधी के सम्मान में कई काम किए। स्वच्छता अभियान में उन्होंने महात्मा गाँधी के चश्मे को रखकर उनके आदर्शों की पूर्ति करने की कोशिश की। महात्मा गाँधी के खादी वस्त्र को उन्होंने नए मुकाम पर पहुँचाया। गाँवों को बिजली-पानी-सड़क जैसी योजनाओं से सीधे जोड़ा। किसानों को सहायता दी। ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबी बनाने का बीड़ा उठाया। ये सब चीजें महात्मा गाँधी के विचार थे, जो वे आजाद भारत में करना चाहते थे, लेकिन पंडित नेहरू ने उन पर विशेष ध्यान नहीं दिया।
जब कॉन्ग्रेस की सुप्रिया श्रीनेत पीएम मोदी को नाथूराम गोडसे को पूजा करने की सलाह देती हैं तो यह हास्यास्पद लगता है। पीएम मोदी ने अपने राजनीतिक जीवन में नाथूराम गोडसे का कभी नाम सकारात्मक उद्देश्य से नहीं लिया। उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद अगर किसी ने गोडसे का नाम भी लिया तो उन्होंने उसे चेतावनी दी। साध्वी प्रज्ञा, केंद्रीय मंत्री रहे अनंत हेगड़े और सांसद नलीन कटील को बाद में माफी माँगनी पड़ी थी।
साध्वी प्रज्ञा और अनंत हेगड़े ने कहा था कि नाथूराम गोडसे देशभक्त था, है और रहेगा। इसके सिख दंगों में सिखों की हत्या का संदर्भ देते हुए नलीन कटील ने कहा था कि नाथूराम गोडसे ने तो एक ही आदमी को मारा था, लेकिन राजीव गाँधी ने तो 17 हजार लोगों को मारा। इस बयान के बाद भाजपा ने तीनों नेताओं को कड़ी चेतावनी दी थी। इसके बाद तीनों नेताओं ने माफी माँग ली थी।
बाद में पीएम मोदी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि भले ही इन लोगों ने माफी माँग ली हो, लेकिन वे उन्हें कभी दिल से माफ नहीं कर पाएँगे। इसके बाद साल 2019 के चुनावों में साध्वी प्रज्ञा का टिकट काट दिया गया। महात्मा गाँधी को लेकर पीएम मोदी के दिल में ऐसे विचार हैं। उन्होंने गोडसे का नाम तक नहीं लिया। वहीं, कॉन्ग्रेस उन्हें जबरन गोडसे का पुजारी बनाने पर तुली हुई है।
आजादी के बाद से कॉन्ग्रेस ने महात्मा गाँधी के विचारों को त्याग कर उनकी हत्या कर दी थी। महात्मा गाँधी का नाम लेना अब सिर्फ कॉन्ग्रेस का दिखावा भर है। राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी और सोनिया गाँधी असल में महात्मा गाँधी के विचारों के वाहक नहीं हैं। ये नाम का इस्तेमाल करने वाले लोग हैं। इसलिए गाँधी परिवार को महात्मा गाँधी से नहीं जोड़ा जा सकता।