लखनऊ, उत्तर प्रदेश की योगी सरकार (Yogi Government) ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई (PFI) पर प्रतिबंध लगाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से सिफारिश की है, इसके साथ ही यूपी पुलिस ने पीएफआई से जुड़े 25 लोगों को गिरफ्तार किया है. आईजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रवीण कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़े 25 व्यक्तियों को विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है.

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ जुलूसों में हिंसा के पीछे पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की भूमिका होने की बात सामने आई है। प्रसाद ने कहा कि इस संगठन पर बैन या दूसरी कार्रवाई को लेकर आगे क्या करना है इसका फैसला सबूतों के आधार पर गृह मंत्रालय करेगा। प्रसाद ने कहा कि पीएफआई के तार प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) से जुड़े होने के भी कई आरोप हैं। इसकी भी जांच होगी।

वहीं, योगी सरकार में मंत्री मोहसिन रज़ा ने कहा कि पीएफआई बिल्कुल सिमी का दूसरा रूप है. इस संगठन ने केरल के बाद यूपी में पैर फैलाने शुरू किए हैं. रजा ने कहा है कि जो लोग प्रतिबंधित संगठन इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) में शामिल थे, उन्होंने ही अब पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के नाम से नया संगठन तैयार कर लिया है। रजा ने कहा कि यही लोग मुस्लिम युवाओं को कट्‌टरपंथी बनाकर उन्हें आतंकवाद की तरफ धकेलना चाहते हैं।

बताया जा रहा है कि संगठन से जुड़े आरोपियों के यहां से आपत्तिजनक सामग्रियां, साहित्य, सीडी आदि मिले थे. जिसको आधार बनाकर पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया नामक संगठन को बैन करने का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश सरकार ने भेजा. नागरिक संशोधन कानून पर हुए प्रदर्शन के पीछे पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई के रोल पर जांच का दायरा और ज्यादा बढ़ सकता है. 7 राज्यों में पीएफआई पिछले कई महीनों से सक्रिय है. सूत्रों के अनुसार, इनमें दिल्ली, आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, केरल, झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश शामिल हैं.

वहीं PFI पर बैन को लेकर सियासत शुरू हो गई. कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने पीएफआई पर प्रतिबंध लगाये जाने को लेकर योगी सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि योगी सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए प्रतिबंध लगाने की बात कर रही है. उन्होंने कहा है कि अगर सरकार के आरोपों में सच्चाई है तो यह इंटेलिजेंस की बड़ी चूक है. जिसके लिए योगी सरकार को प्रदेश की जनता से माफी मांगनी चाहिए.