खुद को दुनिया का सबसे ताकतवर देश बनाने के लिए चीन वो तमाम कोशिशें कर रहा है, जिससे दुनिया मुश्किल में पड़ रही है और आगे भी पड़ सकती है। कोरोना वायरस के फैलाव के बाद चीन से एक और खबर सामने आ रही है, जो दुनिया को डरा रही है। खबर है कि चीन अपनी सेना को अपराजेय बनाने के लिए सैनिकों पर जैविक परीक्षण कर रहा है। इस परीक्षण में सैनिकों पर जैविक प्रयोग करके उनके मानवीय संरचना में बदलाव करने की कोशिश की जा रही है। इससे चीन अपने सैनिकों को ऐसा बनाने की चेष्टा कर रहा है, जिनमें किसी तरह की भावना ना रहे और ना ही उन पर किसी तरह के प्राकृतिक या कृत्रिम हालातों का प्रभाव पड़े।


आमतौर पर जेनेटिक इंजीनियरिंग फसलों पर इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। कुछ पशुओं पर इसके परीक्षण हुए हैं, जिनका दुनिया भर में विरोध हुआ और अभी भी हो रहा है। लेकिन, चीन इन विरोधों को दरकिनार कर इंसानित के दैवीय संरचना के साथ खिलवाड़ कर मनुष्यों पर ही यह शोध शुरू कर दिया। दरअसल इसका खुलासा अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी के डायरेक्टर जॉन रेटक्लिफ ने वॉल स्ट्रीट जर्नल में किया है।

चीन सैनिकों के डीएनए को बदलने का प्रयास कर रहा है। बायलॉजी में इसे क्लस्टर्ड रेगुलरली इंटरस्पेस्ड शॉर्ट पेलिंड्रोमिक रिपीट्स (CRISPR) के नाम से जाना जाता है। यह एक डीएनए स्ट्रक्चर है, जो बैक्टीरिया आदि में होता है और अब तक इसका इस्तेमाल बीमारियों से बचाव के लिए शोध के तौर पर होता आया है। फसलों की उन्नत किस्म तैयार करने में भी इस तकनीक का उपयोग होता है। इससे संकर नस्लें की फसलों को तैयार किया जाता है, ताकि पैदावार अधिक हो सके।

इस परीक्षण में जिस चीनी वैज्ञानिक का नाम सामने आया है, वह हैं He Jiankui और इन्होंने साल 2018 में सात जोड़ों पर यह जैविक प्रयोग किया था। फिलहाल इसके नतीजे सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन अंदेशा जताया जा रहा है कि डीएनए में मिलावट से तैयार शख्स पूरी तरह से सेना के लिए काम करने के बनाया गया होगा। उसका दिमाग हमेशा आक्रामक तरीके से सोचेगा और शरीर भी उसी तरह काम करेगा।

हालांकि चीन ने इस बारे में कोई बयान नहीं दिया है, लेकिन CRISPR-Cas तकनीक के बारे में चीनी रक्षा विभाग का एक दस्तावेज गलती से मीडिया में आ चुका है। इसमें चीन ने माना है कि वह साल 2016 से जीन-एडिटिंग पर काम कर रहा है, ताकि सैनिकों की ताकत बढ़ाई जा सके। इस बारे में नेचर बायोटेक्नोलॉजी (Nature Biotechnology) जर्नल में खौफनाक रिपोर्ट आ चुकी है।   


माना जा रहा है कि जीन एडिटिंग के बाद सैनिकों के शरीर में खतरनाक बदलाव भी दिखेंगे, जिनमें कई असाध्य बीमारियाँ हो सकती हैं। अगर डीएनए बदलाव के क्रम में ऐसी जीन डिलीट हो जाएं या कर दी जाएं, जिनका होना मानवीय शरीर के लिए जरूरी है तो इसके कई गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। इनमें कैंसर सहित कई असाध्य संक्रामक बीमारियों सहित व्यावहारिक विसंगतियाँ शामिल हैं। इनके बारे में आज के वैज्ञानिकों को भी कोई अंदाजा नहीं है।