संदेहास्पद संगठन पीएफआई के ठिकानों पर छापेमारी, देश विरोधी गतिविधियों के हैं आरोप
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफ़आई) के नेशनल एग्जीक्यूटिव काउंसिल मेम्बर करमना अशरफ मौलवी के तिरुअनंतपुरम स्थित पूंथुरा आवास पर छापेमारी की। इसके अलावा, कोझीकोड, मल्लापुरम और एर्नाकुलम स्थित पीएफआई के नेताओं के घरों पर भी छापेमारी की गई। माना जा रहा है कि यह छापेमारी दंगों और अन्य अराजक गतिविधियों के लिए फ़ंडिंग से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत की गई है। ईडी ने साल 2018 में पीएफ़आई के कई सदस्यों पर मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। हालाँकि, इस संबंध में ईडी ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
प्रवर्तन निदेशालय ने सिंहवाड़ा थाना क्षेत्र के शंकरपुर में पीएफ़आई के जनरल सेक्रेटरी मोहम्मद सनाउल्लाह के घर पर भी छापा मारा। छापेमारी में ईडी को क्या हासिल हुआ इस बात की जानकारी सामने नहीं आई है। ईडी की कार्रवाई के दौरान सनाउल्लाह अपने आवास पर नहीं मौजूद थे। वहीं, ईडी पीएफ़आई के अन्य सदस्यों से पूछताछ कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक़, ईडी ने 9 राज्यों के 26 ठिकानों पर छापेमारी की है।
दरअसल, पीएफ़आई और एसडीपीआई जबरन धर्मांतरण, आपराधिक और देश विरोधी गतिविधियों की वजह से संदेह और जाँच के दायरे में रहा है। पिछले साल दिसंबर में हुए सीएए और एनआरसी के विरोध प्रदर्शन के लिए पीएफ़आई पर फंडिंग कराने और दंगा भड़काने का आरोप लगा था। इस साल के जनवरी महीने में केंद्रीय जाँच एजेंसी ने इस संबंध में कई दस्तावेज़ भी पेश किए थे जिसमें पीएफ़आई के खातों और प्रदर्शनकारियों के खातों के बीच लेन-देन की पूरी जानकारी मौजूद थी।
दस्तावेज़ में यह लिखा था, “4 दिसंबर 2019 से 6 जनवरी 2020 के बीच कुल 15 खातों में (10 पीएफ़आई और 5 रेहब इंडिया फाउंडेशन) 1.04 करोड़ रुपए डाले गए थे। इन खातों में पूरी राशि नगद ही डाली गई थी और यह 5 हज़ार से 49 हज़ार के बीच थी। डिपाजिट की जाने वाली को 50 हज़ार से नीचे इसलिए रखा गया था जिससे जमा करने वाले व्यक्ति की पहचान सामने नहीं आए।
हाल ही में पीएफ़आई के 4 सदस्यों को हाथरस मामले में जातीय उन्माद भड़काने के आरोप में यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया गया था। पीएफ़आई पर केरल में तमाम तरह के कैम्प चलाने का भी आरोप है। वहीं, पीएफआई इन सभी आरोपों को नकारता है।
