मुसलमानों का खलीफा और मुस्लिम देशों का नेता बनने का ढोंग करने वाला और पाकिस्तान का दोस्त तुर्की ने अफगान शरणार्थियों को शरण देने से इनकार कर दिया है। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन ने जी-20 नेताओं के सम्मेलन में कहा कि तुर्की शरणार्थियों के बाढ़ को एक बार फिर नहीं झेल सकता। 

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन (सौजन्य: जी न्यूज)

 

एर्दोआन ने कहा कि तुर्की में पहले से ही 36 लाख सीरियाई शरणार्थी मौजूद हैं। ऐसे में अफगान शरणार्थियों को तुर्की ने झेल सकता। उन्होंने अफगानिस्तान से आने वाले शरणार्थियों को रोकने के लिए सीमा पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने का आदेश दिया है। वहाँ की पुलिस ने कई अफगान शरणार्थियों को पकड़ा है।

अफगानिस्तान शरणार्थी ईरान के रास्ते तुर्की की सीमा तक पहुंच रहे हैं। वहाँ उन्हें मदद मिल जा रही है और वे अवैध रूप से तुर्की में प्रवेश कर जा रहे हैं। पाकिस्तान के बाद तुर्की अफगान शरणार्थियों के लिए सबसे पसंदीदा मुल्क बन दा है। ईरान भी इन लोगों को अपने देश से निकलकर यूरोपीय सीमा तक पहुंचने रोक नहीं लगा रहा है।

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद लाखों की संख्या में अफगान नागरिकों ने देश छोड़ा है। इस मानवीय संकट को हल करने या संभालने की दिशा में तुर्की ने दिखावा करने की कोशिश की है। शरणार्थी समस्या हल करने के लिए तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन ने जी-20 में अफगानिस्तान पर एक वर्किंग ग्रुप बनाने का भी प्रस्ताव पेश किया। एर्दोआन ने कहा कि तुर्की इस वर्किंग ग्रुप का नेतृत्व करने को भी तैयार है।

दरअसल, जी-20 देशों की बैठक में अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद पैदा हुई परिस्थिति पर चर्चा हुई। इसमें यूरोपीय यूनियन, अमेरिका और तुर्की समेत कई दूसरे देश भी शामिल हुए। यूरोपीय यूनियन ने एक दिन पहले ही अफगानिस्तान के लिए 1 बिलियन यूरो की सहायता राशि का ऐलान किया है। इसमें से कुछ पैसा अफगान शरणार्थियों को शरण देने वाले देशों को भी मिलेगा।

वहीं, अफगान शरणार्थियों की मदद में हाथ खड़े कर देने वाला तुर्की अफगानिस्तान में अपना प्रभुत्व स्थापित करने के लिए तालिबान को साध रहा है। काबुल एयरपोर्ट के संचालन को अपने हाथों में लेने के लिए उसने कई बार पेश की, लेकिन तालिबान ने कतर की मदद से उसे फिर से संचालित कर दिया। वहीं, इलाके में अपनी दखल बढ़ाने के लिए तुर्की अपने सदाबहार दोस्त पाकिस्तान की भी मदद ले रहा है।