सावरकर को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा तारीफ के पुल बांधे जाने के बाद सियासी बवाल हो गया है। इन दोनों के बयान के बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-मुसलमीन के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने निशाना साधा है। ओवैसी ने कहा है कि इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। अगर ऐसा ही रहा तो एक दिन वे महात्मा गांधी की बजाय सावरकर को राष्ट्रपिता बना देंगे।

    महात्मा गांधी और सावरकर (सौजन्य: ummid.com)

 

ओवैसी ने कहा कि सावरकर ने अपनी रिहाई के लिए अंग्रेजों को माफीनामे लिखा था। यहां तक कि सावरकर पर महात्मा गांधी की हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोप थे और जस्टिस जीवनलाल कपूर की जांच में भी ये बात कही गई थी।
 
वहीं, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि सावरकर ने अंग्रेजों से एक बार नहीं, आधा दर्जन बार माफी माँगी थी। माफी मांगकर छूटने के बाद सावरकर पूरी जिंदगी अंग्रेजों के साथ रहे और उनके खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोले। बघेल ने आरोप लगाया कि सावरकर अंग्रेजों के फूट डालो और राज करो के एजेंडे पर काम करते रहे। 1925 में जेल से बाहर आने के बाद सावरकर ने सबसे पहले दो राष्ट्र की बात की।
 
रअसल सावरकर पर एक किताब के विमोचन में मोहन भागवत मंगलवार को कहा था कि वीर सावरकर को बदनाम करने के लिए आजादी के बाद से ही मुहिम चल रही है। वहीं, राजनाथ सिंह ने सावरकर एक महान देशभक्त बताया था।
 

 

भागवत ने कहा था कि सावरकर को लेकर भारत में जानकारी का अभाव है। उनके बाद स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद सरस्वती और योगी अरविंद को बदनाम करने का नंबर लगेगा, क्योंकि सावरकर इन तीनों के विचारों से प्रभावित थे। भागवत ने कहा कि सैयद अहमद को मुस्लिम असंतोष का जनक कहा जाता है।

 

इसी कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा था कि सावरकर ने कानूनी अधिकार के तहत और महात्मा गांधी के कहने पर अंग्रेजों के सामने अर्जी दी थी, ताकि जेल से रिहा हो सकें और आजादी के आंदोलन में शामिल हो सकें।