नशे के कारण अपना पुत्र खो चुके केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर समाज को बनाएँगे नशामुक्त, अभियान की हुई शुरुआत
नशा कितना घातक होता है इसका दर्द वही बता सकता है, जिसने इसकी वजह से अपनों को खोया है। नशा धीरे-धीरे संपूर्ण जीवन को कैसे लील जाता है, यह नशा करने वाले को पता भी नहीं चलता। आज देश में नशे की लत एक बड़ी समस्या बन चुकी है। इसी समस्या से उबरने के लिए उत्तर प्रदेश के मोहनलालगंज से सांसद और आवासन एवं शहरी कार्य राज्यमंत्री कौशल किशोर ने नशे के खिलाफ अभियान छेड़ा है। इसी क्रम में सोमवार (9 अगस्त) को अगस्त क्रांति के अवसर पर मंत्री ने देश भर के 1,07,547 लोगों को जीवन में नशा नहीं करने का संकल्प दिलाया।
आपको बता दें कि मंत्री कौशल किशोर के बेटे आकाश किशोर की मृत्यु अधिक नशा करने के कारण 19 अक्टूबर 2020 को मृत्यु हो गई थी। अत्यधिक शराब पीने के कारण आकाश का लीवर फेल हो गया था। बेटे की मृत्यु से आहत होकर मंत्री कौशल किशोर एवं यूपी के मलिहाबाद से विधायक उनकी पत्नी जयदेवी कौशल ने संकल्प लिया था कि ऐसा दिन किसी अन्य माँ-बाप को ना देखना पड़े, इसलिए वे नशामुक्त समाज के लिए अभियान चलाएँगे।
इसी अभियान को लेकर कौशल किशोर ने बताया, “जिस तरह 9 अगस्त 1942 को महत्मा गाँधी ने अंग्रेजों को भारत से भगाने के लिए ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ प्रारंभ किया था, उसी तरह से नशामुक्त समाज बनाने के लिए 9 अगस्त से नशा भगाने का अभियान शुरू किया गया है।” उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत साल 2022 में आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर देश के 75 लाख लोगों को नशा न करने का संकल्प दिलाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि देश के हर तबके को नशा से मुक्त होने के लिए संकल्प लेना होगा तभी भारत एक सुंदर एवं स्वस्थ समाज का निर्माण कर पाएगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह अंग्रेज देश को गुलाम बनाकर देश का धन और मान-सम्मान लूटे थे, उसी तरह नशा भी धन के साथ-साथ मान-सम्मान को नष्ट करता है।
गौरतलब है कि देश में नशाखोरी को लेकर कई फिल्में भी बन चुकी हैं। वहीं, साल 2019 में नशे की बढ़ती लत पर भारत सरकार का एक चौंकाने वाला सर्वे सामने आया था। इस सर्वे में बताया गया था कि तकरीबन 7.13 करोड़ भारतीय तरह-तरह के नशे की गंभीर लतों से जुझ रहे हैं। इनमें नशे की लत इतनी बढ़ चुकी है कि इन्हें तत्काल इलाज की जरूरत है, जो पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है।
भारत सरकार के इस सर्वे में देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को शामिल किया गया है। सर्वे में सबसे ज्यादा 5.17 करोड़ लोग शराब के गंभीर लती पाए गए हैं। इसके अलावा 72 लाख लोग भांग, 60 लाख लोग अफीम व चरस आदि और 11 लाख लोग नशीली गोलियों या इंजेक्शन से होने वाले नशे की लत के आदी हैं। सर्वे में 70,293 लोग ऐसे भी शामिल हैं, जो नशे के लिए खतरनाक ड्रग्स का इस्तेमाल करते हैं।
सर्वे में बताया गया है कि कुल आबादी के 27.3 प्रतिशत पुरुष और 6.4 प्रतिशत महिलाएँ शराब का सेवन करते हैं। ये आंकड़े दिसंबर 2017 से अक्टूबर 2018 के बीच एकत्र किए गए हैं।