बिहार सरकार में मंत्री कार्तिक कुमार सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि भूमिहार होने की वजह से भाजपा उन्हें निशाना बना रही है और उनका चरित्र हनन कर रही है। कार्तिकेय सिंह ने कहा कि राजद के कोटे से भूमिहार समाज के व्यक्ति को मंत्री बनाया जाना भाजपा को पसंद नहीं आ रहा है।
 
अनंत सिंह के साथ कार्तिकेय सिंह

उन्होंने कहा कि उनकी छवि धूमिल करने के लिए भाजपा तरह-तरह की चाल चल रही है और उनकी छवि को खराब कर रही है। कार्तिकेय सिंह का दावा है कि अपनी और पार्टी की छवि को बचाने के लिए ही उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दिया है। उनके इस्तीफे को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वीकार भी कर लिया है।

 

दरअसल, कार्तिकेय सिंह ने वो बात खुलकर कह दी है, जो भाजपा और अन्य दलों के नेता खुलेआम कहने से हिचकते हैं। नाम नहीं छापने की शर्त पर भाजपा के एक नेता ने कहा कि पार्टी में जातीय वर्चस्व अपने चरम पर है और दूसरी जाति के नेताओं का चरित्र हनन किया जाता है, ताकि उन्हें दरकिनार कर अपनी जाति के नेताओं का आगे का रास्ता साफ किया जा सके। उत्तर प्रदेश के इस नेता ने खुलकर नहीं बताया कि लेकिन उनका  साफ इशारा भाजपा में ब्राह्मणवाद की ओर था।
वहीं, एक अन्य नेता ने बताया कि भाजपा में सिर्फ जातीय वर्चस्व ही नहीं है, बल्कि दूसरी पार्टियों के गैर-ब्राह्मण कद्दावर नेताओं का चरित्र हनन किया जाता है। उन्होंने इस मामले में दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का नाम लिया। उन्होंने कहा कि कुछ समय से मनीष सिसोदिया कद्दावर नेता के रूप में उभर रहे थे। ऐसे में घोटाले का आरोप लगाकर उनके चरित्र का हनन करने की कोशिश की गई।
उत्तर प्रदेश से ही संबंध रखने वाले भाजपा के एक पिछड़े नेता ने बताया कि जिस तरह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कद बढ़ रहा है, उससे उनको बदनाम करने के लिए कई नेताओं को आगे किया गया, लेकिन वे सब असफल रहे। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय महापुरूषों के नाम पर जातीयों में संघर्ष और वैमनस्य पैदा किया जा रहा है कि ताकि राजनीति में जातीय वर्चस्व बना रहे।
उन्होंने हाल के क्षत्रिय-जाट और क्षत्रिय-गुर्जर के बीच के विवादों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि मिहिरभोज और अनंगपाल तोमर जैसे महापुरूषों को लेकर पार्टी द्वारा जानबूझकर विवाद पैदा किया जा रहा है, ताकि भाजपा में तेजी से आगे बढ़ रहे क्षत्रिय लोगों को दूसरी जातियों की आपत्तियों के आधार पर साइडलाइन किया जा सके।
पार्टी में अहम पद रखने वाले इस नेता ने कहा कि हाल ही में मिहिरभोज से संबंधित दिल्ली के एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दो बड़े नेता पहुँचे थे। इस कार्यक्रम में पहुँचकर संघ ने यह संकेत देने की कोशिश की कि वह मिहिरभोज को गुर्जर नेता मानता है। वहीं, कुछ ब्राह्मण नेताओं ने जानबूझकर इन महापुरुषों की जयंती पर बधाई संदेशों में जाति का जिक्र किया, ताकि गुर्जर-जाट-राजपूतों के बीच यह विवाद खत्म ना हो सके।
उन्होंने यह भी दावा किया कि इस काम में मीडिया का भी भरपूर सहयोग लिया जा रहा है। मीडिया भी उनके इशारे पर काम कर रही है। खैर जो भी हो, लेकिन कार्तिकेय सिंह ने भारतीय राजनीति की जातीय वर्चस्व को खोल कर रख दिया है।
हालाँकि, सोशल मीडिया पर इस तरह की चर्चाएँ लगातार चलती रहती हैं, लेकिन एक राजनेता द्वारा इसे सार्वजनिक तौर पर कहना, आने वाले समीकरणों का संकेत देता है। ऐसे में भाजपा के लिए 2024 का रास्ता आसान नहीं है। भाजपा से राजपूत और भूमिहार के साथ-साथ कायस्थ भी नाराज बताए जा रहे हैं।
बता दें कि कार्तिकेय सिंह को बिहार के बाहुबली नेता अनंत सिंह का नजदीकी माना जाता है। कार्तिकेय सिंह पर अपहरण का मुकदमा है। वहीं, नीतीश कुमार के साथ जब भाजपा बिहार की सत्ता में थी, तब अनंत सिंह के बुरे दिन शुरू हो गए थे। उन्हें जेल जाना पड़ा था।

इतना ही नहीं, कभी बिहार की राजनीति में लालू यादव से मुकाबला करने के लिए जिस आनंद मोहन सिंह का भाजपा के अटल बिहारी वाजपेयी ने कभी सहयोग लिया था, उन्हीं आनंद मोहन सिंह को लेकर पार्टी के नेता  उल-जूलुल बयानबाजी कर रहे हैं। बिहार की सत्ता में रहते हुए भाजपा ने आनंद मोहन सिंह को जेल से निकलने नहीं दिया। इसको लेकर राजपूत समुदाय में भी गुस्सा है। भूमिहार तो पहले ही राजद के संग जा चुका है। हाल बिहार विधानसभा के चुनावों में इसका असर भी दिखा।