औरंगजेब को पूर्वज मानने की मानसिकता भारत के लिए खतरनाक: क्या है इसका उपाय?
भारत में इस्लामी आक्रांताओं का एक ऐसा वंशज सुल्तान बना, जिसे हिंदुओं और मंदिरों से चिढ़ थी। उसने देश के हजारों मंदिरों को जमींदोज करवा दिया और हिंदुओं पर जजिया कर लगा दिया। यह क्रूर बादशाह था औरंगजेब। औरंगजेब के बाद उसकी पीढ़ियाँ भारत की शासक बनीं जरूर, लेकिन आखिरकार वो पूरी तरह मिट गईं। आज भारत में लोकतंत्र है और मुगल खानदान का अता-पता नहीं है। इसके बावजूद इसी देश में कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो आज भी औरंगजेब का महिमामंडन करते हैं। वे जानते हैं कि औरंगजेब ने हिंदुओं पर बेतहाशा जुल्म किए, इसके बावजूद उस बेरहम सुल्तान में ऐसे लोगों को दीन, ईमान और भाईचारा दिखता है।
ऐसे लोगों की इस देश में लंबी फेहरिस्त है। इनमें समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र ईकाई के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक अबू आजमी एक हैं। अबू आजमी ने छत्रपति शिवाजी महाराज के बेटे छत्रपति संभाजी महाराज और औरंगजेब के बीच युद्ध पर आधारित हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘छावा’ को परोक्ष रूप से निशाना बनाया और औरंगजेब की तारीफ की। अबू आजमी ने औरंगजेब की तारीफ करते हुए कहा कि फिल्मों के जरिए इस मुगल आक्रांता की छवि को खराब की जा रही है।
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| मुगल आक्रांता औरंगजेब (साभार: कुकु एफएम) |
अबू आजमी ने कहा था, “मैं 17वीं सदी के मुगल बादशाह औरंगजेब को क्रूर, अत्याचारी या असहिष्णु शासक नहीं मानता। औरंगजेब के शासनकाल में हमारा जीडीपी (विश्व जीडीपी का) 24 प्रतिशत था और भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था। उनके शासनकाल के दौरान भारत की सीमाएँ अफगानिस्तान और बर्मा (आज का म्यांमार) तक फैली हुई थीं। सारा गलत इतिहास दिखाया जा रहा है। औरंगजेब ने कई मंदिर बनवाए… वे क्रूर नहीं थे। मैंने औरंगजेब के बारे में जितना पढ़ा है… उन्होंने कभी भी जनता का पैसा अपने लिए नहीं लिया। वह एक महान प्रशासक थे।” इतना ही नहीं, अबू आजमी ने औरंगजेब द्वारा हिंदुओं के इस्लाम में जबरन धर्मांतरण को भी सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा कि औरंगजेब ने 52 साल शासन किया था। अगर वह हिंदुओं को जबरन धर्म परिवर्तन करा रहा होता तो सोचिए कि कितने हिंदुओं ने धर्म परिवर्तन किया होगा।
इस तरह अबू आजमी ने एक ऐय्याश, क्रूर, हिंदू विरोधी, मंदिर को तोड़ने वाले, अपने भाइयों की हत्या करने वाले, अपने बाप को कैद में रखने वाले सुल्तान को बेहतरीन प्रशासक बता दिया। ऐसा नहीं है कि ये काम उन्होंने पहली बार किया है। इसके पहले भी वे औरंगजेब का महिमामंडन कर चुके हैं। अब इस मामले पर विवाद हो गया तो अबू आजमी ने माफी माँग ली और कहा कि उनकी बातों को तोड़-मरोड़कर कर पेश किया गया है। इसको लेकर उनके खिलाफ एक मुकदमा भी दायर हो चुका है। इतना ही नहीं, औरंगजेब को लेकर उनका दिया गया पहले का बयान भी विवादित रहा है और उसको लेकर भी अबू आजमी पर मुकदमा दर्ज हुआ था। इस बार तो अबू आजमी को महाराष्ट्र के विधानसभा के लिए पूरे बजट सत्र से निलंबित कर दिया गया।
अबू आजमी ही अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं, जिन्होंने औरंगजेब का गुणगान किया है। अबू आजमी के बयान के समर्थ में कॉन्ग्रेस के सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद भी आ गए हैं। मसूद ने कहा कि औरंगजेब महान था और उसके शासन काल में भारत की जीडीपी पूरी दुनिया में सबसे अधिक थी। उन्होंने कहा, “जो इतिहास में लिखा है, उसको मिटा नहीं सकते। एक फिल्म बनाकर इतिहास को मिटा नहीं सकते। लोगों को सही ज्ञान मिलना चाहिए। औरंगजेब इस देश का 49 साल बादशाह रहे। वो आतताई कैसे हो सकते हैं? कैलाश मानसरोवर को किसने विजय कराया? बर्मा तक अखंड भारत किसने बनाया? यह सब औरंगजेब के जमाने में था। कॉन्ग्रेस के ही नेता राशिद अल्वी ने भी औरंगजेब का बचाव किया और कहा, “औरंगजेब बुरे थे या अच्छे थे, इसकी 500 साल के बाद भारत में क्या प्रासंगिकता है? औरंगजेब पर आरोप है कि उसने मंदिर तुड़वाए, लेकिन उन्होंने मंदिरों को पैसे भी दिए।”
वहीं, कॉन्ग्रेस के सांसद दानिश अली ने कहा कि औरंगजेब देश का इतिहास है और इतिहास को मिटाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, “अच्छा या बुरा, इतिहास तो इतिहास है। हर राजा-महाराजा का काम करने का अपना स्टाइल होता था। सत्ता हासिल करने के लिए वो लोग कुछ भी करते थे। उसको (औरंगजेब को) राजा-महाराजा की कार्यशैली की तरह देखना चाहिए, किसी मजहब के साथ नहीं जोड़ना चाहिए।” इन विवादों में बिहार नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के विधानसभा पार्षद खालिद अनवर ने कहा कि औरंगजेब को हमेशा लेकर दो राय रही है। इतिहासकारों का एक वर्ग औरंगजेब अच्छा शासक बताता है। उन्होंने कहा कि एक वर्ग औरंगजेब की छवि को क्रूर बनाने की कोशिश कर रहा है।
इस तरह भारत में एक पूरी जमात है जो औरंगजेब अपना रहनुमा मानती है। ये वही जमात है, जो इतने क्रूर शासक के पक्ष में खड़ा होकर उसे महान बनाने पर तुली है। पाकिस्तान का बँटवारा करने वाला मोहम्मद अली जिन्ना भी मानता था कि इस देश पर मुगलों का यानी मुस्लिमों का शासन रहा है, इसलिए अंग्रेजों के जाने के बाद इसकी बागडोर मुस्लिमों के हाथों में मिलनी चाहिए। अगर भारत की बागडोर किसी हिंदू को मिलती है तो मुस्लिमों को यह स्वीकार नहीं है और वे अपना अलग मुल्क पाकिस्तान बनाने के लिए बाध्य हैं। ये वही मानसिकता जो औरंगजेब को आज भी गलत मानने को तैयार नहीं है, जबकि देश दुनिया के इतिहासकारों ने मुगलों की क्रूरता को लेकर अनेकों किताबें लिखी हैं। मुगलों के खुद के दरबारी लेखक भी हिंदू पर मुगलों के जुल्मों को इस्लाम की तारीफ बताकर कसीदे गढ़े हैं।
औरंगजेब की क्रूरता से इतिहास के पन्ने भरे पड़े हैं। इसका एक उदाहरण हिंदुओँ को उनकी धार्मिक प्रथाओं को रोकने का आदेश दिया, जिसे खुद औरंगजेब ने दिया था। 9 अप्रैल 1669 को औरंगजेब ने एक आदेश जारी करके हिंदुओं के मंदिरों को गिराने के आदेश के साथ ही हिंदुओं को उनकी धार्मिक प्रथाओं एवं त्योहारों को मनाने पर भी रोक लगा दी थी। आदेश के बाद सोमनाथ, काशी विश्वनाथ समेत दर्जनों मंदिरों को गिरा दिया गया था। औरंगजेब के दरबार में रहे इतिहासकार साकी मुस्तैद खान ने अपनी किताब ‘मआसिर-ए-आलमगीरी’ में खुद इसका जिक्र किया है। औरंगजेब के आदेश के बाद जिन बड़े मंदिरों को गिराया गया था उनमें जयपुर का मलरीना मंदिर, अहमदाबाद के नजदीक सरसपुर का चिंतामणि मंदिर, सोमनाथ मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, वडनगर के हथेश्वर मंदिर, उदयपुर में झीलों के किनारे बने 3 मंदिर, उज्जैन के मंदिर सहित सैकड़ों प्रमुख मंदिर शामिल हैं।
इस देश में ऐसे हजारों उदाहरण भरे पड़े हैं। इन सब क्रूरताओं को देखने के बाद भी अगर कोई औरंगजेब को कुशल और महान बताता है तो इसका सीधा मतलब है कि वह भारतीय संस्कृति एवं हिंदुओं से नफरत करता है। ये वही मानसिकता है, जिसको लेकर महमूद गजनवी, मुहम्मद गोरी, अहमशाह अब्दाली, तैमूललंग, बाबर आदि भारत आए और यहाँ की संस्कृति को रौंदा। पाकिस्तान भी इसी मानसिकता से त्रस्त है। वह भी भारत पर पहली बार आक्रमण करने वाले मुहम्मद बिन कासिम को अपना पूर्वज बताता है और अपनी मिसाइलों एवं हथियारों का नाम इन मुस्लिम आक्रांताओं पर रखता है। यहाँ याद रखना जरूरी है कि भारतीय महाद्वीप के 90 प्रसिद्ध से अधिक मुस्लिमों के पूर्वज किसी ना किसी दबाव में मुस्लिम बनें है। इनमें प्रताड़ना, उनके धर्म को भ्रष्ट करना, जजिया उत्पीड़न से खुद को बचाना आदि प्रमुख रहा है। आज उन मजबूर पूर्वजों के वंशज उन्हीं आक्रमणकारियों को अपना पूर्वज मानकर उनका महिमामंडन कर रहे हैं। यह एक सिंड्रोम है, जिसे विज्ञान की भाषा में स्टॉकहोम सिड्रोम कहा जाता है। इस सिंड्रोम से ग्रसित व्यक्ति को अपने उत्पीड़क से ही लगाव हो जाता है और उसके बचाव में कुछ भी कर गुजरने को तैयार हो जाता है।
आज अबू आजमी और इमरान मसूद जैसे लोग इसी स्टॉकहोम सिंड्रोम से ग्रसित हैं। वे अपने इतिहास को स्वीकार करना नहीं चाहते हैं। वे नहीं चाहते हैं कि वे जानें कि उनके पूर्वजों के साथ इन मुस्लिम आक्रमणकारियों ने किस तरह की क्रूरता की। उन उत्पीड़नों को भूलकर ये उत्पीड़क को ही अपना मान बैठे हैं। इसी मानसिकता ने आज भारत के पड़ोस में पाकिस्तान नाम के एक नए मुल्क को जन्म दिया, जो आज कंगाली और बदहाली से गुजर रहा है। वे मानने के तैयार नही नहीं हैं कि वे हड़प्पा और मोहनजोदड़ो सभ्यता के विसकित लोगों के वंशज हैं। वे अपने आपको कबायली आक्रमणकारियों से जोड़ते हैं। वहीं पाकिस्तान की मानसिकता भारत के कुछ लोगों में अभी भी जीवित है और वे मुस्लिम आक्रमणकारियों को समय-समय पर महिमामंडित करके इसे प्रदर्शित करते रहते हैं। इस तरह की मानसिकता को आज पूरी तरह कुचलने की जरूरत है।