धर्मांतरण रैकेट चलाने वाला उमर लड़की के इश्क में बन बैठा मुसलमान, AMU में नौकरी का भी मिला था लालच
देश भर में फैले धर्मांतरण के जाल का पर्दाफास उत्तर प्रदेश से शुरू हो गया है। यूपी एटीएस (UP ATS) ने धर्मांतरण कराने के आरोप में दो मौलानाओं को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक मोहम्मद उमर उर्फ़ श्याम प्रताप सिंह से एटीएस द्वारा पूछताछ की जा रही है।
उमर यूपी के फतेहपुर जिले के थरियांव थाना क्षेत्र के रमवा गांव का रहने वाला है। उमर गांव में ही हाई स्कूल तक पढ़ाई करने के बाद 1979 में नैनीताल के पंतनगर चला गया था। उसके बाद वह वहां से दिल्ली चला गया। बताया जा रहा है कि पंत नगर में ही वह एक मुस्लिम लड़की के इश्क में पड़ा। उमर को एएमयू में प्रवक्ता बनाने का लालच दिया गया था, जिसके बाद उसने धर्म परिवर्तन कर लिया।
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| उमर गौतम (फोटो साभार: दैनिक भास्कर) |
1982 में आकर उमर न जिले के ही गाजीपुर थाना क्षेत्र के खेसहन गांव में छत्रपाल सिंह की बेटी राजेश कुमारी से शादी किया। इसके बाद उमर अपनी पत्नी को लेकर दिल्ली चला गया। वहाँ उसने धर्म परिवर्तन कर लिया। उमर के धर्म परिवर्तन के बाद से परिवार के लोग उमर से नाराज रहते थे।
राजेश कुमारी के साथ शादी हुई थी लेकिन गौना नहीं हुआ था। इस बात को छिपा कर यह राजेश कुमारी का गौना कराकर ले गया था। वापस आकर पत्नी ने मुसलमान हो जाने और बीबी के तौर पर एक मुस्लिम महिला होने की जानकारी अपनी मां और पिता क्षत्रपाल सिंह को दी थी। उसके घर एक बेहद निजी सदस्यों के बीच बैठक भी हुई थी जिसमें उमर गौतम को मूल धर्म में वापसी का दबाव डाला गया था लेकिन वह तैयार नहीं हुआ।
उमर के पिता धनराज सिंह की मौत डेढ़ वर्ष पूर्व हुई थी, लेकिन वह अपने पिता के अंतिम संस्कार में भी नहीं आया। वह अपनी माँ की अंत्येष्टि के समय घर आया लेकिन शव के अग्निदाह का विरोध करने लगा। वह शव को दफनाने की जिद कर रहा था। इस पर उसकी अपने भाइयों से तू-तू मैं-मैं हो गई। उसके बाद वह नाराज हो कर चला गया था।
उमर उर्फ श्याम प्रताप सिंह 6 भाई है और उमर अपने सभी भाइयों में चौथे नंबर का है। उमर साल दो साल में अपने गांव आया करता था, लेकिन उससे कोई ज्यादा बातचीत नहीं करता था।
एक मुस्लिम लड़की के इश्क में पड़कर जीबी पंत विश्वविद्यालय पंतनगर नैनीताल में इस्लाम कबूल किया। इस्लाम कबूल करवाने में मुस्लिम लड़की से निकाह का लालच और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में प्रवक्ता की नौकरी का लालच इसके किसी ताहिर नामक दोस्त ने दिया था।