नई दिल्ली, लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पास होने पर पाकिस्तान के बाद एक अमेरिकी संस्था ने आपत्ति जताते हुए इसे एक खतरनाक कदम बताया है. अमेरिका के अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने कहा है कि बिल पास होने को लेकर वह काफी चिंतित है और यह संसद के दोनों सदनों में पास हो जाता है तो अमेरिका को गृहमंत्री अमित शाह सहित सरकार के नेतृत्व पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करना चाहिए. 

हालांकि, अमेरिकी सरकार की तरफ से किसी तरह का आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. हालांकि, इस संस्था के सुझाव बाध्यकारी नहीं हैं लेकिन अमेरिकी सरकार खासकर विदेश मंत्रालय में इसके सुझावों को गंभीरता से लिया जाता है.

अमेरिकी आयोग ने कहा कि बिल में धर्म को लेकर बनाया आधार वह बेहद परेशान करने वाला है, जिसमें मुस्लिमों को नागरिकता देने का रास्ता बंद कर दिया गया है. आयोग ने कहा कि यह भारत के धर्मनिरपेक्षता के समृद्ध इतिहास और भारतीय संविधान के खिलाफ है. आयोग ने कहा कि उसे डर है कि भारत सरकार भारतीय नागरिकता के लिए एक रिलीजन टेस्ट करा रही है जो लाखों मुस्लिमों से उनकी नागरिकता छीन लेगा.

नागरिकता संशोधन बिल के मुताबिक, 31 दिसंबर 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी. बिल को लोकसभा में पेश किया जहां 311 सदस्यों ने इसके पक्ष में मतदान किया जबकि 80 ने इसके खिलाफ वोटिंग की.

अमेरिकी आयोग के इस बयान पर विदेश मंत्रालय ने जवाब दिया दिया है और कहा है कि USCIRF की ओर से जिस तरह का बयान दिया गया है, वह हैरान नहीं करता है क्योंकि उनका रिकॉर्ड ही ऐसा है. हालांकि, ये भी निंदनीय है कि जमीनी हकीकत की कम जानकारी होने के बावजूद भी संगठन ने इस तरह का बयान दिया है.

गृह मंत्री अमित शाह ने बिल पेश करते हुए स्पष्ट कर दिया था कि मोदी सरकार में किसी भी धर्म के लोगों को डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि इस बिल से पड़ोसी देशों में उत्पीड़न के शिकार अल्पसंख्यकों को राहत मिलेगी. उन्होंने इस दावे को भी खारिज कर दिया कि यह बिल मुस्लिम विरोधी है. अमित शाह ने कहा कि इससे पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को अधिकार दिए जाएंगे. मुस्लिमों को बिल में शामिल ना किए जाने पर शाह ने कहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान के कानून में वह इस्लामिक देश हैं, इसलिए वहां मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं हैं. हालांकि, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दलों ने बिल का विरोध किया है.