पाकिस्तान की परोक्ष सहायता से आतंकी संगठन तालिबान ने रविवार को उत्तरी अफगानिस्तान के तीन और प्रांतीय राजधानियों पर कब्जा कर लिया। इस तरह कुंदुज, सर-ए-पुल और तालोकान पर कब्जे के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान के पांच प्रांतीय राजधानियों को अपने अधीन कर लिया है। कुंदुज के एक स्थानीय निवासी ने बताया कि शहर ‘चारों ओर से अराजकता’ में घिरा हुआ है। दूसरी तरफ, एक रिपोर्ट आई है, जिसमें कहा गया है कि पाकिस्तान अपने पड़ोसी मुल्क अफगानिस्तान को हमेशा हिंसाग्रस्त देखना चाहता है।

 

अफगानिस्तान में तालिबान के आतंकी (फोटो: रॉयटर्स)

 

सेंटर ऑफ पॉलिटिकल एंड फॉरेन अफेयर (CPFA) के प्रेसिडेंट फेबियन बासार्ट ने ‘टाइम्स ऑफ इजरायल’ को बताया कि पाकिस्तान पड़ोसी मुल्क के आतंकवादियों की हर संभव मदद कर रहा है। उसके देश से अफगानिस्तान में आतंकवादी बेधड़क प्रवेश कर रहे हैं। इसके पीछे पाकिस्तान की एक सोची-समझी साजिश है।

बासार्ट ने बताया कि पाकिस्तान अपने स्वार्थ के लिए अफगानिस्तान को हमेशा कमजोर और विभाजित रखना चाहता है। इसके लिए वह अफगानिस्तान को हमेशा हिंसाग्रस्त हालात में देखना और रखना चाहता है। यही कारण है कि वह तालिबान जैसे दुर्दांत आतंकी सहित अन्य जेहादी संगठनों को पूरा समर्थन एवं भरपूर संरक्षण दे रहा है।

पिछले महीने अफगानिस्तान के विदेश मंत्री ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई आतंकवादियों को प्रशिक्षण दे रही है। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने कहा था कि पाकिस्तान सीमा से 10,000 विदेशी आतंकी अफगानिस्तान में घुसकर सेना से लड़ाई लड़ रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान के राजदूत गुलाम इसकजई ने शुक्रवार (6 जुलाई) को कहा था कि अफगानिस्तान सरकार सुरक्षा परिषद को इस बात के सबूत देने को तैयार है, जिससे पता चलता है कि तालिबान की सप्लाई चेन पाकिस्तान है। अफगान अधिकारियों कहना है कि पाकिस्तान तालिबान को अपनी हवाई सीमा में भी सहयोग कर रहा है।

उधर, तालिबान और अफगान सेना के बीच संघर्ष अपने चरम पर है। तालिबान ने शेबरगान सिटी में एक जेल पर हमला कर वहाँ बंद 700 तालिबान आतंकियों को छुड़ा लिया है। इसके अलावा, कब्जे वाले प्रांतों में उसने उत्पीड़क शरिया कानून लागू कर दिया है। वहीं, संघर्ष शुरुआत से अब तक पिछले दो माह में लगभग 3,00,000 अफगानी अपने ही देश में बेघर हो चुके हैं, जबकि लगभग 40,000 अफगानी अपनी जान बचाने के लिए ईरान में शरण ले चुके हैं।